महिला एवं बच्चों के साथ हुए अपराध को सामने लाकर पीड़ितों को कानूनी सहायता प्रदान कराएं

अलीगढ मीडिया ब्यूरो,अलीगढ: मण्डलायुक्त अजय दीप सिंह ने शुक्रवार को डीआईजी प्रीतेन्द्र सिंह के साथ कमिश्नरी सभागार में महिला कल्याण विभाग के तहत संचालित संस्थाओं- बाल कल्याण समिति, चाइल्ड लाइन, बाल एवं नारी संरक्षण गृह तथा महिला हैल्प लाइन 181 आदि की समीक्षा करते हुए कहा कि इस क्षेत्र में अच्छा कार्य किया जा रहा है इसे और बेहतर ढ़ंग से किए जाने की आवश्यकता है ताकि घरेलू हिंसा एवं एसिड अटैक से पीड़ित महिलाओं, बालिकाओं और बेसहारा बच्चों को कानूनी सहायता प्रदान कर उन्हें पुर्नवासित किया जा सके। उन्होंने समीक्षा में पाया कि जनपद अलीगढ़ में लड़कों के लिए बालगृह स्थापित है, लड़कियों के लिए नहीं है। जनपद हाथरस में भी कोई बाल गृह न होने के कारण ऐसे बच्चों को अन्य जनपदों में भेजा जाता है इसलिए दोनों जगह बालगृह बनाने हेतु प्रस्ताव शासन को भेजा जाए।

श्री सिंह ने अपर आयुक्त कृष्ण कुमार सिंह को सासनीगेट स्थित चाइल्ड लाइन में उपलब्ध संसाधनों एवं व्यवस्थाओं का निरीक्षण करने के निर्देश देते हुए कहा कि एक सप्ताह के अन्दर निरीक्षण कर रिपोर्ट से अवगत कराएं ताकि वहां पर साफ-सफाई के साथ बेसहारा बच्चों को प्रदत्त सुविधाओं में और इजाफा किया जा सके। उन्होंने 181 महिला हैल्प लाइन की जनपदवार समीक्षा में पाया कि घरेलू हिंसा की शिकार महिलाओं एवं खोए हुए बच्चों एवं महिलाओं से सम्बन्धित पंजीकृत मामलों में अधिकांश का निस्तारण किया गया है लेकिन हाथरस में और कार्य करने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि निस्तारित मामलों में सम्बन्धित महिलाओं एवं बच्चों की काउंसलिंग लगातार किए जाने की आवश्यकता है ताकि उन्हें यह भरोसा हो सके कि मेरे साथ शासन एवं प्रशासन खड़ा है। उन्हांने कहा कि महिलाएं स्वयं सशक्त बनें और दूसरों को भी सशक्त बनाएं, इसके लिए वृहद स्तर पर प्रचार-प्रसार किया जाए इसके लिए समस्त विकास खण्डों, तहसील मुख्यालयों, थानों एवं अन्य सार्वजनिक स्थलों पर बाल राईटिंग, पोस्टर एवं होर्डिग्स के माध्यम से प्रचार-प्रसार कराएं। उन्होंने कहा कि जेजे एक्ट के तहत बाल संरक्षण योजना को बढ़ावा देने के लिए मण्डल स्तर पर कार्यशाला का आयोजन किया जाए जिसमें अच्छे एनजीओ एवं स्वयं सहायता समूह की महिलाओं तथा महिला कल्याण के क्षेत्र में कार्य करने वाली महिलाओं को प्रशिक्षित किया जाए। उन्होंने सभी अधिकारियों एवं कर्मचारियों को निर्देश देते हुए कहा कि महिला उत्पीडन, घरेलू हिंसा की शिकार महिलाओं के साथ-साथ असहाय एवं बेसहारा बच्चों के पुर्नवासन का कार्य एक सामाजिक कार्य है इसमें लगन से कार्य करने की आवश्यकता है।

डीआईजी प्रीतेन्द्र सिंह ने अधिकारियों एवं कर्मचारियों को सम्बोधित करते हुए कहा कि आप लोगों द्वारा अच्छा कार्य किया जा रहा है, बहुत सी ऐसी शिकायतें जो महिला एवं बालिकाओं के उत्पीडन से सम्बन्धित रहती हैं वह पुलिस तक नहीं पहुॅच पाती। ऐसे मामलों को आप द्वारा काउंसलिंग के माध्यम से या पुलिस अधिकारियों के संज्ञान में लाकर उसका निस्तारण कराएं। आवश्यकतानुसार एफआईआर भी दर्ज कराई जाएं। उन्होंने कहा कि इस प्रकार की घटनाओं में कुछ असत्य भी होती हैं हम सभी की यह जिम्मेदारी है कि सच्चाई को सामने लाकर दोषियों को सजा दिलवाएं। कार्यवाही न होने से दोषी व्यक्तियों को शर्मिन्दगी या ग्लानि महसूस नहीं होती बल्कि प्रभावित व्यक्ति ही शर्मिन्दा होता है। इन मामलों में अधिक कार्यवाही होने पर अपराधियां के अन्दर खौफ पैदा होगा और घटनाएं कम होंगी। उन्होंने सभी वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक एवं पुलिस अधीक्षकों को निर्देश देते हुए कहा कि महिला हैल्प लाइन के तहत जो पुलिस आरक्षी तैनात हैं उनके साथ समन्वय स्थापित कर इनके कार्यो में सहयोग प्रदान करें।

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