अयोध्या विवाद पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला, रामजन्म भूमि न्यास को मिली विवादित भूमि

अलीगढ मीडिया डॉट कॉम, अलीगढ़/दिल्लीः देश की सबसे बड़ी अदालत ने सबसे बड़े संवेदनशील विवाद पर पांच जजों की बैंच ने एक मत होकर फ़ैसला दिया है। चीफ जस्टिस ने कई मुद्दों पर कई महीनों तक चली वहस के निचोड़ को ध्यान में रखते हुए रामलला की विवादित बड़ा फैसला लिया है।

तयशुदा वक्त करीब 10 बजकर 30 मिनट पर कोर्ट ले बाहर सभी पक्षों के बकील कोर्ट रूम के बाहर पहुँच गए। उसके बाद पांचो जजों की सामूहिक राय के आधार पर चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया ने फैसला के टाईटल सूट को पढ़ते हुए कहा कि हिंदुओं का केस विश्वास पर आधारित है। उन्होंने निर्मोही अखाड़े का दावा खारिज करते हुए कहा कि निर्मोही अखाड़े को सेवा का अधिकार नही दिया जा सकता। उन्होंने टिप्पणी करते हुए कहा कि एएसआई की रिपोर्ट को महत्वपूर्ण मानते हुए उन्होंने कहा कि मस्जिद के नीचे विशाल मंदिर था, मस्जिद के लिए इमारत तोड़ी गयी थी। उन्होंने कहा कि अयोध्या में राम जन्म पर विवाद नही।

CIJ ने कहा कि मुस्लिम के पास जमीन पर विशेष कब्जा नही है। आस्था और विश्वास के आधार पर फैसला नही। आस्था के आधार पर जमीन पर मालिकान हक तय नही किया जा सकता है। 18वी सदी तक नमाज का कोई सबूत नही है।

मुस्लिमों को वैकल्पिक जमीन देने का आदेश सुप्रीम कोर्ट ने दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने साफ किया कि ढांचा गिराने से कानून का उल्लंघन हुआ था। शिया वक्क बोर्ड और सुन्नी वक्क बोर्ड के दावे को खारिज करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अयोध्या में मस्जिद बनाने के लिए 5 एकड़ जमीन दी जाए। राम जन्म भूमि न्यास को रामलला की विवादित जमीन देने का फैसला देते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि एक ट्रस्ट बनाकर मंदिर निर्माण कराया जाए।

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