पढ़िए, ‘बेटी दिवस’ पर गीतकार अवनीश राही की विशेष कविता

अलीगढ मीडिया डॉट कॉम,अलीगढ: ‘बेटी दिवस’ पर विशेष रूप से कुछ पक्तियो के माध्यम से गीतकार अवनीश राही ने दर्शायी हकीकत…

भ्रूण हत्या की स्याह कहानी,
और कब तक दोहराओगे।
बेटी कोख़ में मारोगे तो,
बहू कहाँ से लाओगे।।

कुदरत का उपहार है बेटी।
लक्ष्मी का अवतार है बेटी।।
बेटी बोझ समझने वालो।
इस जीवन का सार है बेटी।।
सार हुआ ये तार तार तो,
जीवन कहां से पाओगे।
बेटी कोख़ में मारोगे तो,
बहू कहाँ से लाओगे।।

जित् देखो तित् ओर है बेटी।
ना समझो कमजोर है बेटी।।
बेटी-बहन-माँ-बीबी-प्रेमिका।
हर रिश्ते की डोर है बेटी।।
डोर अगर ये टूट गई तो,
रिश्ते कैसे निभाओगे।
बेटी कोख़ में मारोगे तो,
बहू कहाँ से लाओगे।।

सतयुग का ज्यों सत है बेटी।
करवा-चौथ का व्रत है बेटी।।
राखी का त्यौहार है पावन।
त्यौहारों का बट है बेटी।
आज अगर ये बट काटा,
त्यौहार ये कैसे मनाओगे।
बेटी कोख़ में मारोगे तो,
बहू कहाँ से लाओगे।।

बेटी बिन आंगन है सूना।
बेटी बिन सावन है सूना।।
बेटी बिन सूनी है रसोई।
बेटी बिन जीवन है सूना।।
अबभी समय है”राही”सम्हल जा,
बाद में फिर पछताओगे।
बेटी कोख़ में मारोगे तो,
बहू कहाँ से लाओगे।।

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