AMU organises Alumni Meet-2018#धार्मिक मतभेद की नहीं होनी चाहिये राजनैतिक या राष्ट्रीय प्रासंगिकता

अलीगढ़ मीडिया ब्यूरो,अलीगढ: अलीगढ़ मुस्लिम यूनीवर्सिटी के पूर्व छात्रों का वार्षिक सम्मेलन आज अमुवि की एल्युमनाई अफेयर्स कमेटी द्वारा पूरे हर्षोल्लास के साथ आयोजित हुआ। विश्वविद्यालय के कैनाडी हाल में आयोजित उद्घाटन समारोह के मुख्य अतिथि उत्तर प्रदेश के सेवानिवृत डीजीपी तथा 1978 बैच के आईपीएस अधिकारी रिजवान अहमद ने अमुवि के संस्थापक सर सैयद अहमद खॉन के समाज सुधार के मिशन पर विचार व्यक्त करते हुए कहा कि सर सैयद ने भारत वासियों में आधुनिक वैज्ञानिक चिंतन के प्रचार प्रसार का कार्य बौद्विक रूप से किया तथा उन्होंने मोलिक दृष्टिकोण पर सीधे सीधे कटाक्ष नहीं किया। उन्होंने कहा कि सर सैयद का सदैव यह मानना रहा कि धार्मिक मतभेद की राजनैतिक या राष्ट्रीय प्रासंगिकता नहीं होनी चाहिये।

अमुवि के पूर्व छात्र रहे श्री रिजवान अहमद ने कहा कि अमुवि गंगा तथा जमुना के बीच उपजाऊ क्षेत्र में स्थित है जो गंगा जमुनी संस्कृति की रक्षक है और यह हम पूर्व छात्रों तथा वर्तमान छात्रों की जिम्मेदारी होनी चाहिये कि इस संस्कृति का विश्व भर में प्रतिनिधित्व करें। उन्होंने कहा कि मानवता की सेवा हमारा मिशन होना चाहिये जो सर सैयद का मिशन था। जिन्होंने इस संस्था की स्थापना धर्मनिरपेक्षता के सिंधान्तों पर की। पूर्व डीजीपी ने कहा कि हम आज जो कुछ भी हैं वह अमुवि की बदौलत हैं, इसलिये हमारा यह कर्तव्य है कि अपनी शैक्षणिक संस्था का ऋण वापिस करें तथा खुले मन के साथ संस्था की सहायता करें। उन्होंने कहा कि अमुवि के पूर्व छात्र वर्तमान छात्रों का मार्गदर्शन कर सकते हैं। उनकी सहायता कर सकते हैं तथा अन्य सेवायें अंजाम देने के साथ एल्युमनाई संगठनों की सदस्यता ग्रहण कर सकते हैं।

कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए अमुवि कुलपति प्रो. तारिक मंसूर ने कहा कि यह प्रसन्नता का विषय है कि अमरीका, यूरोप, मध्यपूर्व एशिया, मारिशस तथा विश्व के अन्य देशों से पूर्व छात्र अपनी शैक्षणिक संस्था से जुड़ रहे हैं तथा संस्था को हर संभव सहयोग भी प्रदान कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि पूर्व छात्र हमारे राजदूत हैं और वह जो सफलता प्राप्त करते हैं उसमें हमारे विश्वविद्यालय की झलक होती है.प्रो. तारिक मंसूर ने सिंगापुर में भारत के हाई कमिश्नर श्री जावेद अशरफ से होने वाली भेंट की चर्चा करते हुए कहा कि उन्होंने विभिन्न देशों विशेष रूप से सिंगापुर में एएमयू एल्युमनाई एसोसिएशन के नेटवर्क की सराहना करते हुए बताया कि एल्युमनाई एसोसिएशन द्वारा उन्हें समय समय पर विभिन्न कार्यक्रमों में आमंत्रित किया जाता है।

कुलपति ने कहा कि हमारा एल्युमनाई नेटवर्क अत्यधिक सुदृढ़ है तथा मैं चाहता हूँ कि कैरियर के मार्गदर्शन, रोजगार तथा छात्रों की मेंटरिंग में पूर्व छात्रों को शामिल करके उसे और अधिक सुदृढ़ बनाया जाये। उन्होंने बताया कि भारत समेत विश्व भर में फैले हमारे पूर्व छात्रों की एक एल्युमनाई डायरेक्टरी प्रकाशित की जायेगी जिसमें उनसे सम्बन्धित जानकारियॉ उपलब्ध कराई जायेंगी। प्रो. तारिक मंसूर ने कहा कि वर्तमान छात्रों के लिये ‘‘अलीग कनेक्ट’’ के नाम से एक सोशल नेटवर्क उपलब्ध है जिससे वह पूर्व छात्रों से सम्पर्क स्थापित कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि ‘‘कशिश’’ के नाम से हम एक कार्यक्रम प्रारंभ करने जा रहे हैं जिसके अन्तर्गत पूर्व छात्रों के बच्चे अमुवि आकर अपने अभिभावकों की संस्था से जुड़ सकते हैं। कुलपति ने कहा कि पूर्व छात्रों के दान से अमुवि में एक एल्युमनाई गैस्ट हाउस भी निर्मित किया जायेगा।

प्रो. तारिक मंसूर ने आगे कहा कि अमुवि एक बार फिर सर्वश्रेष्ठ भारतीय विश्वविद्यालयों की सूची में शामिल हुई है। उन्होंने कहा कि ‘‘टाइम्स हायर एजूकेशन’’ ने अमुवि को पॉचवां सबसे सर्वश्रेष्ठ विश्वविद्यालय, जबकि नेशनल इंस्टीटयूट रैकिंग फ्रेमवर्क (एनआईआरएफ) ने दसवां सबसे सर्वश्रेष्ठ भारतीय विश्वविद्यालय घोषित किया है। परन्तु अमुवि इस रैकिंग से सर्वोपरि है तथा हमारा उद्देश्य होना कि हम यहॉ से ऐसे छात्र पैदा करें जो अपने व्यवसाय में सर्वश्रेष्ठ होने के साथ साथ ‘‘अच्छे इंसान’’ भी हों। एम्स नई दिल्ली के प्रमुख आर्थोपैडिक सर्जन प्रो. शाह आलम खॉन ने छात्रों से आव्हान करते हुए कहा कि वह उच्चतम उद्देश्य की प्राप्ति के लिये लगन तथा परीश्रम के साथ कार्य करें तथा सर सैयद अहमद खॉन एवं महात्मा गांधी के पद चिन्हों पर चलते हुए अमुवि को नई ऊचाईयों तक ले जाए।

मौलाना आजाद नेशनल उर्दू यूनीवर्सिटी, हैदराबाद के कुलपति डॉ. असलम परवेज ने कहा कि हम चाहे जहॉ रहें न्याय के पथ पर चलना अति आवश्यक है तथा उच्च स्तरीय शिक्षा के साथ हम सर्वश्रेष्ठ व्यवसयी बनें तथा समाज को अपनी सेवायें प्रदान करें। सीएसजेएम यूनीवर्सिटी, कानपुर की कुलपति प्रो. नीलिमा गुप्ता ने अमुवि में अपने छात्र जीवन की चर्चा करते हुए कहा कि वह कैनेडी हाल में आयोजित होने वाले कार्यक्रमों में शामिल होती थीं तथा उन्होंने कभी यह विचार भी नहीं किया था कि वह एक दिन यहॉ मंच पर होंगी और वर्तमान छात्रों को सम्बोधित करेंगी। उन्होंने कहा कि सफलता का यह पथ जिसने मुझे मंच पर बैठने का अवसर प्रदान किया अमुवि ने ही प्रदान किया है।

भारत सरकार के अल्पसंख्यक मामलों के मंत्रालय में ज्वाइंट सेकरेटरी श्री एमजे आलम ने कहा कि सिविल सर्विसेज में प्रथम प्रयास में असफल होने के बाद उन्होंने विश्वविद्यालय छोड़ दिया था परन्तु यहॉ के अध्यापकों ने उन्हें वापिस आने के लिये प्रोत्साहित किया। उन्होंने कहा कि सिविल सर्विसेज़ में सफलता मुझे अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के अपने अध्यापकों के कारण ही प्राप्त हुई जिन्होंने मेरा मार्गदर्शन किया तथा मेरी सरपरस्ती भी की। मौलाना आजाद एजूकेशन फाउन्डेशन के सचिव तथा सीईओ श्री रिजवान उर रहमान ने कहा कि सर सैयद ने शिक्षा को जन जन तक पहुचाया तथा हमें भी उन्हीं के पद चिन्हों पर चलना होगा। उन्होंने कहा कि पावर सेक्टर में उन्होंने नोकरी छोड़ दी तथा अल्प संख्यक मामलों के मंत्रालय में नोकरी शुरू की ताकि लड़कियों की शिक्षा के क्षेत्र में विशेष रूप से पिछड़े वर्गों की लड़कियों की शिक्षा के लिये वह कुछ सेवायें अंजाम दे सकें।

एम्स से सेवानिर्वत हुए प्रो. एम फारूख ने अपने जीवन की घटनाओं की वर्णन करते हुए कहा कि अमुवि के पूर्व छात्र विश्व भर में फैले हुए हैं जो एल्युमनाई नेटवर्क द्वारा एक दूसरे से जुड़े हुए हैं। उन्होंने छात्रों से अपनी कोशलता तथा कला को विकसित करने का आव्हान किया. इससे पूर्व स्वागत भाषण में एल्युमनाई अफेयर्स कमेटी के चैयरमैन प्रो. एमएम सुफियान बेग ने कहा कि हम आज के दिन की बड़ी बैचेनी से प्रतिक्षा कर रहे थे। उन्होंने कहा कि हमें अमुवि को नई ऊचाइयों पर ले जाने के लिये पूर्व छात्रों का सहयोग चाहिये। एल्युमनाई अफेयर्स कमेटी के वाइस चैयरमैन प्रो. अनवर खुरशीद ने उपस्थितजनों के प्रति आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम का संचालन डॉ. फायजा अब्बासी ने किया। इस अवसर पर कुलपति प्रो. तारिक मंसूर तथा अन्य अतिथियों ने डॉक्टर समीना सालिम की पुस्तक ‘‘डिस्टिंगुइश्ड अलीगः पद्म एवार्ड्स एण्ड मोर’’ तथा पूर्व छात्रों की स्मारिका का भी विमोचन किया।

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AligarhMedia.com Desk Aligarh: Greying hair and wrinkles of experience written on their faces, ex-students of Aligarh Muslim University (AMU) did take some time to recognise each other, but when they did – their days in the University flashed brilliantly in their conversations. In a walk down the memory lane, alumni from different parts of the world reconnected with their alma mater at the AMU Alumni Meet-2018. Mr Rizwan Ahmad (1978 batch IPS officer and retired DG-Police, Uttar Pradesh), who attended the inaugural function at the Kennedy Hall auditorium as the Chief Guest spoke on Sir Syed’s mission of ardent reform and how he wanted to reconcile modern scientific thought among Indians by rationalistic interpretations and not by attacking basic belief system. He said that Sir Syed always believed that religious differences should have no political and national significance.
“Aligarh Muslim University lies in the fertile plains between river Ganges and Yamuna and fully subscribes to ‘Ganga-Yamuna Tehzeeb (culture)’ and it is the responsibility of us alumni and students to represent this culture in all parts of the world,” said Mr Rizwan Ahmad pointing out that serving humanity is of foremost importance and this was also the mission of Sir Syed Ahmad Khan, who built the foundations of this University on the principles of secularism and plurality.
He further said that on this day; we must ponder on how AMU has made us what we are and how we should generously pay back to our alma mater. “Alumni can mentor current students, volunteer to speak at events, write about their experiences, join alumni organisations and talk to prospective students besides giving financial help,” said Mr Rizwan Ahmad.    Presiding over the function, AMU Vice Chancellor, Professor Tariq Mansoor said that it is heartening to see how alumni from the United States of America, European countries, Middle-East, Mauritius and other parts of the world are connecting their successes with their alma mater and contributing in all possible ways. “Alumni are our brand ambassadors and what they achieve is a direct reflection of our University,” said Prof Mansoor.
The Vice Chancellor shared how the Indian High Commissioner to Singapore, Mr Javed Ashraf in a recent meeting with him praised the network of AMU alumni associations in various countries particularly in Singapore, where the alumni association frequently invites him to various programmes. “We have an excellent alumni network and I wish to further strengthen it by involving alumni in career guidance, employment and mentoring of the current students,” said Prof Mansoor informing that the University will soon have an alumni directory with information and contacts of alumni spread all over India and the world.
“We also have a social network, ‘Alig Connect’ for the current students to get in touch with the alumni. We are starting a programme known as ‘Kashish’ in which the children of alumni from various parts of the world can come to AMU and connect with the alma mater of their parents. We will have an alumni guest house in the university built from the donations from the alumni,” said the Vice Chancellor.
While concluding his address, Prof Mansoor mentioned that AMU has once again been ranked in the top Indian universities. “Times Higher Education has ranked AMU as the 5th best, while National Institute Ranking Framework (NIRF) has ranked AMU as the 10th best Indian university, but AMU is beyond these rankings and we should aim to produce students who are good human beings, besides being the best in their professions,” said the Vice Chancellor.
AMU Pro Vice Chancellor, Prof M H Beg and Registrar, Mr Abdul Hamid (IPS) were also present at the dais.
Prof Shah Alam Khan (Department of Orthopaedics, AIIMS) urged students to continue to realise their beautiful dreams with the required hard work and dedication and follow footsteps of Sir Syed Ahmad Khan and Mahatma Gandhi to take AMU on greater heights.
Dr Mohammad Aslam Parvaiz (Vice Chancellor, MANU University, Hyderabad) said that it is imperative to follow the path of justice, no matter what we do and where we live. We need to be good professionals with the best in our education and contribute to society in the best of ways, he said.
Prof Neelima Gupta (Vice Chancellor, CSJM University, Kanpur) recalled that as a student she used to attend programmes in the Kennedy Hall and never thought that one day, she will be sitting on the dais and addressing the current students. “This success passage, which has made me sit on the dais, has been given to me by AMU,” she pointed out.
Mr M J Alam (Joint Secretary, Ministry of Minority Affairs, Government of India, New Delhi) shared that he left the University after failing to qualify the Civil Services exams in the first attempt, but his teachers convinced him to come back. “I owe my success of qualifying the Civil Services exam to my teachers in AMU, who guided and mentored me,” said Mr Alam. Mr Rizwan ur Rahman (CEO and Secretary, Maulana Azad Educational Foundation/ Chairman MANAS, New Delhi) spoke on the importance of following Sir Syed’s path of spreading education to masses. Mr Rahman said that he quit his job in the power sector of the Government to join the Ministry of Minority Affairs for the purpose of providing education to girls, especially those of the marginalised sections.
Prof (Retd.) M Farooque (Department of Orthopaedics, AIIMS) shared anecdotes and experiences from his life. He pointed out that the AMU alumni community spread all over the world shares a bond of love and brotherhood. He also urged students to recognise and hone their skills.      Delivering the welcome address, Prof M M Sufyan Beg said that AMU was waiting eagerly for the alumni meet and we seek the help of our alumni to take AMU to new heights.
Prof Anwar Khursheed, Vice Chairman, Alumni Affairs Committee proposed the vote of thanks, while Dr Faiza Abbasi conducted the programme. On the occasion, ‘Distinguished Aligs: Padma Awards and More’, by Dr Samina Salim and a souvenir of the Alumni Meet were also released by the Vice Chancellor and the guests.

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