जलवायु के परिवर्तन तथा जलसंकट से धरती पर हो गया है बड़ा खतरा

अलीगढ़ मीडिया ब्यूरो,अलीगढ: अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविधालय के भूगोल विभाग द्वारा ‘‘अन्तर्राट्रीय जल संकटः जलवायु के परिवर्तन के समय में कृषि एवं खाद्य सुरक्षा’’ विषय पर तीन दिवसीय अन्तर्राष्ट्रीय कांफ्रेंस का आयोजन किया गया जिसमें विश्व के विभिन्न क्षेत्रों से विशेषज्ञ भाग ले रहे हैं। केनेडी हाल में आयोजित कांफ्रेंस के उद्घाटन समारोह को सम्बोधित करते हुए अमुवि कुलपति प्रोफेसर तारिक मंसूर ने कहा कि पानी प्राकृति की एक बड़ी नेमत है जिसके बगैर जीवन की कलपना नहीं की जा सकती। दूसरी ओर विश्व भर में जलवायु का परिवर्तन देखा जा रहा है। उन्होंने कहा कि जलवायु के परिवर्तन से जल पर भी दुष्प्रभाव पड़ता है। प्रोफेसर मंसूर ने आशा व्यक्त की कि उक्त कांफ्रेंस द्वारा इस समस्या को समझने तथा जलवायु के परिवर्तन एवं जल संकट से निबटने में सहायता प्राप्त होगी।
उद्घाटन समारोह के मुख्य अतिथि इंटरनेशनल कमीशन फॉर इरीगेशन के महासचिव डॉक्टर अश्विन बी पांडे ने कहा कि जीवन जल पर आधारित है तथा जल खाद्य एवं ऊर्जा का एक दूसरे से गहरा सम्बन्ध है। अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय तथा कांफ्रेंस के आयोजकों की सराहना करते हएु उन्होंने आशा व्यक्त की कि कांफ्रेंस के प्रतिभागी जलवायु के परिवर्तन की समस्या तथा उसके नाकारात्मक प्रभाव का समाधान खोजने में सफल होंगे।
मानद् अतिथि इंटरनेशनल ज्योग्राफिकल यूनियन के अध्यक्ष प्रोफेसर यूकियो हिमलियामा ने इस आश्य पर प्रसन्नता व्यक्त की कि अमुवि के भूगोल विभाग ने अन्तर्राष्ट्रीय ज्योग्राफिकल यूनियन की एक्जीक्यूटिव बैठक तथा कांफ्रेंस का आयोजन किया। उन्होंने कहा कि धरती को जलवायु के परिवर्तन तथा जलसंकट से बड़ा खतरा हो गया है। इंटरनेशनल ज्योग्राफिकल यूनियन के महासचिव प्रोफेसर आर बी सिंह ने बताया कि राष्ट्रीय जल मिशन जल की सुरक्षा एवं बचत के साथ राज्यों के बीच इसके न्याय पूर्वक वितरण के उद्देश्य की पूर्ति के लिये कार्य कर रहा है।
मानद् अतिथि डॉक्टर एस मसूद हुसैन ने कहा कि जल संसाधनों की सही व्यवस्था की आवश्यकता है। भारतीय मौसम विभाग के महानिदेशक डॉक्टर केजे रमेश ने कहा कि अर्थ साइंसेज के मंत्रालय ने मौसम, जलवायु तथा प्राकृतिक आपदाओं की भविष्यवाणी की व्यवस्थाओं को काफी बेहतर किया है।विज्ञान संकाय के अधिष्ठाता प्रोफेसर मोहम्मद शाकिर ने कहा कि जल सुरक्षा इक्कीसवीं शताब्दी का एक बड़ी अन्तर्राष्ट्रीय चुनोती है। जल संकट तथा खाद्य की कमी से निबटने के लिये बड़ी योजनाबंदी की आवश्यकता है।इससे पूर्व अतिथियों का स्वागत करते हुए विभाग के अध्यक्ष तथा कांफ्रेंस के संयोजक प्रोफेसर अतीक अहमद ने कांफ्रेंस के आयोजन में कुलपति प्रोफेसर तारिक मंसूर द्वारा प्राप्त होने वाले सहयोग के लिये उनका आभार व्यक्त किया।
इस अवसर पर भूगोल विभाग के अध्यापकों द्वारा लिखित पॉच पुस्तकों का विमोचन भी हुआ। इसके अतिरिक्त छ माही पत्रिका ‘‘द ज्योग्राफर’’ का विमोचन भी हुआ। द ज्योग्राफर के बायोग्राफरजर्नल इंडेक्स वोल्यूम 1 का भी विमोचन हुआ जिसका संपादक डॉ. अहमद मुजतबा सिद्दीकी ने किया है। कांफ्रेंस में 18 विदेशी प्रतिनिधि भाग ले रहे हैं। प्रोफेसर निजामउद्दीन खॉन ने उपस्थितजनों के प्रति आभार व्यक्त किया जबकि प्रोफेसर नौशाद अहमद ने संचालन किया।

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