ALIGARH#पूर्व पीएम अटल विहारी बाजपेयी को दी श्रद्धांजलि

अलीगढ मीडिया ब्यूरो,अलीगढ: श्री विनोद बाल मन्दिर स्कूल में एक श्रृद्धांजलि सभा के दौरान अखिल भारतीय ब्राहम्मण महासभा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष पंडित विनोद गौतम सहित अनेक लोगों ने पूर्व प्रधानमंत्री और भारतरत्न स्व0 अटल विहारी वाजपेई को शोक श्रद्धांजलि देते हुए अपने श्रद्धासुमन अर्पित किए इतना ही नहीं सभी ने अटल जी के प्रखर व्यक्तित्व की प्रशंसा करते हुए उनके निधन को अनूर्णनीय क्षति बताया।
इस अवसर पर श्रद्धांजलि सभा को सम्बोधित करने से पहले दो मिनट कामौन रखा गया और बाद में अखिल भारतीय ब्राह्मण महासभा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष पं0 विनोद गौतम ने स्व0 अटल बिहारी जी के जीवन पर विस्तार से प्रकाश डाला और कहा कि वे सच्चे देशभक्त और राजनेता होने के साथ-साथ कलम के सिपाही थे और कवि व रचनाकर अपनी कविताओं के माध्यम से सदैव लोगों के दिल में जीवित रहते हैं। श्री गौतम ने बताया कि यूपी आगरा के बटेश्वर निवासी पंडित कृष्ण विहारी वाजपेयी ग्वालियर रियासत में अध्यापक होने के साथ-साथ बृजभाषा के सिद्ध हस्त कवि थे वहीं शिंदे की छावनी में दिसम्बर 1924 की 25 तारीख को ब्रह्ममूहर्त में उनकी पत्नी कृष्णा वाजपेयी ने अटल जी को जन्म दिया पुत्र में काव्य के गुण वंशानुगत परम्परा के अनुरूप आए साथ ही महात्मा रामचन्द्र वीर द्वारा रचित अमर कृति विजय पताका ने अटल जी के जीवन की दिशा और दशा बदल दी बीए की शिक्षा ग्वालियर के विक्टोरिया कालेज से पूरी करने के बाद छात्र जीवन से ही राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के कार्यकर्ता बने और विभिन्न प्रकार की वाद विवाद प्रतियोगिताओं में भाग लेने लगे।
पं0 विनोद गौतम ने बताया कि अटल जी ने कानपुर के डीएवी कौलेज से राजनीति शास्त्र में एम0ए0 की परीक्षा प्रथम श्रेणी से उत्तीर्ण की और यही कानपुर में एलएलबी की पढाई शुरू की लेकिन इसे बीच में विराम देकर अटल जी सानिध्य में आए पं0 दीपदयाल उपाध्याय और श्यामा प्रसाद मुखर्जी के तब तो शायद उन्हें देश सेवा का खुला आमंत्रण मिल गया इधर अटल जी ने ना सिर्फ पूरी निष्ठा व ईमानदारी से संघ का काम किया बल्कि उन्होंने पत्र व पत्रिकाओं का सफल संचालन किया पं0 विनोद गौतम ने अटल जी के राजनैतिक जीवन के बारे में बताया िकवे भारतीय जनसंघ की स्थापना करने वालों में एक थे और 1968 से लेकर 1973 तक इसके अध्यक्ष भी रहे । 1955 में लोकसभा चुनाव लडने के उपरांत अटल जी को भले ही सफलता न मिली हो लेकिन अपने नाम के अनुरूप् इनके इरादे अटल रहे तब अन्ततः गौण्डा बलरामपुर के अन्दर जनसंघ प्रत्याशी के रूप में विजयी होकर लोकसभा में पहुंचे और 1957 से 1977 तक जनता पार्टी की स्थापना तक वे 20 वर्ष लगातार जनसंघ सदस्यीय दल के नेता रहे, मोरारजी देसाई की सरकार में 1977 से 1979 तक विदेश मंत्री का प्रभार सम्भालकर भारत देश का नाम विदेशों में रोशन किया 1980 में असन्तुष्ट होकर अटल जी ने जनता पार्टी छोड दी और भारतीय जनता पार्टी की स्थापना में मदद कराई, अटल जी दो बार राज्यसभा के लिए निर्वाचित हुए और लोकतन्त्र के सजग प्रहरी के रूप में 1997 के अन्दर देश के प्रधानमंत्री पद की बाग डोर सम्हाली, 19 अप्रैल 1998 को पुनः प्रधानमंत्री पद की शपथ ली और 13 दलों की गठबन्धन सरकार ने पूरे सामंजस्य के साथ 5 साल तक देश को कई मुकाम दिए ।
पं0 विनोद गौतम ने आगे कहा कि अटल जी ने भारत को परमाणु शक्ति से सम्पन्न राष्ट बताया और और पाकिस्तान से सम्बन्धों में सुधार की पहल की, उन्होंने 19 फरवरी 1999 को सदाए सरहद दिल्ली से लाहौर तक बस की शुरूआत की और इस बस के प्रथम यात्री के रूप में पाकिस्तान जाकर पाक के प्रधानमंत्री नवाजशरीफ से मुलाकात की इतना ही नहीं चाहे पोखरन परीक्षण हो या फिर कारगिल का युद्ध, इन सभी मुददों पर भी बाजपेयी कुशल शाषक के रूप में नजर आए जबकि विरोधियों से भी दोस्ताना व्यवहार रखने वाले अटल जी ने अपने वक्त में देश को तमाम कल्याणकारी योजनाएं दी और तमाम सरकारी कार्यक्रम भी किए पं0 विनोद गौतम ने अन्त में बताया कि अटल बिहारी वाजपेयी का प्रखर व्यक्तित्व हालांकि सम्मान से भी ऊपर है लेकनि बावजूद इसके 1992 में पद्मभूषण 1993 में डी.लिट कानपुर, 1994 में लोकमान्य तिलक पुरूस्कार, 1994 में श्रेष्ठ सांसद पुरूस्कार, 1994 में ही भारत रत्न पं0 गोविन्द बल्लभ पन्त पुरस्कार, 2015 में डी0लिट मध्यप्रदेश 2015 में फ्रेड्स आफ बग्लादेश लिबरेशन वार अवार्ड के अलावा अटल जी 2015 में ही भारत रत्न से सम्मानित किए गए। अटल जी की प्रमुख रचनाएं मृत्यु या हत्या अमर बलिदान, कैदी, कविराय की कुडलिया, संसद में तीन दशक, अमर आग है, कुछ लेख कुछ भाषण, सेक्युलरवाद, राजनीति की रपटीली राहे, बिन्दु बिन्दु विचार के अलावा मेरी इक्यावन कविताए सदैव अविस्मरणीय रहेंगी और उनके हर पल हमारे साथ रहने का अहसास कराती रहेंगी। खास बात ये है कि उने विरोधी भी इस बात के कायल रहते थे कि वो अपने दुश्मनों से भी दोस्ताना व्यवहार रखते थे और यही वो वजह है कि इंदिरागांधी उनकी और अटल जी इंदिरा गांधी जी की तारीफ करती थी जबकि ऐसे उदावादी, युगदृष्टा और महान व्यक्ति से आज के उनराजनेताओं को सबक लेना चाहिए जो स्वार्थ की खातिर विरोधियों से असंसदीय भाषा का प्रयोग करते हैं।
पूर्व प्रधानमंत्री और भारत रत्न स्व0 अटल विहारी वाजपेई को श्रद्धा सुमन अर्पित करने के लिए रखे गऐ शोक सभा के इस कार्यक्रम में यहां श्रीमती वीना गौतम डा0 अनुराग गौतम, ठा0 भंवर पाल सिंह, सी0बी0 शर्मा डा0 ऋषभ गौतम, डा0 आधा गौतम, श्रीमती मीना शर्मा, हेम कुमारी वाष्र्णेय, कुमकुम अग्रवाल, प्रदीप पंडित, मेाहन लाल शर्मा, मनोज शर्मा, राजेश कुमार, कुँवर सार्थक गौतम के साथ निष्ठा गौतम की उपस्थिति प्रमुख थी ।

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