‘‘अन्तर विषयी भाषा अध्ययन’’ विषय पर हुया सिम्पोजियम का आयोजन

अलीगढ मीडिया ब्यूरो,अलीगढ: अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के भाषा विज्ञान विभाग के 50 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर ‘‘अन्तर विषयी भाषा अध्ययन’’ विषय पर एक तीन दिवसीय सिम्पोजियम का आयोजन किया गया। जिसके उद्घाटन सत्र से सम्बोधित करते हुए अमुवि कुलपति प्रो. तारिक मंसूर ने कहा कि विभिन्न भारतीय एवं अन्तर्राष्ट्रीय भाषाओं के मध्य उच्च स्तरीय अध्ययन एवं शोध की अपार संभावनाऐं हैं तथा अमुवि के मार्डन इण्डियन लैंग्वेजेज विभाग के अन्तर्गत विभिन्न भाषाओं में उच्च स्तरीय शिक्षा के अवसर प्रदान किये जा रहे हैं। इसके अतिरिक्त विश्वविद्यालय में उर्दू तथा हिन्दी के अलग विभाग हैं तथा इन सभी विभागों के मध्य सहयोग एवं समन्वय से अन्तर विषयी अध्ययन एवं शोध के नये अवसर उत्पन्न किये जा सकते हैं।

उन्होंने कहा कि भारत में ऐसी कई भाषाऐं हैं जो लुप्त होने के कगार पर हैं। जो न केवल भाषा के स्तर पर बल्कि एक समृद्व सांस्कृतिक व्यवस्था के स्तर पर भी देश के लिये बड़ी हानि सिद्व होगी। उन्होंने कहा कि हमें ऐसी भाषाओं का चिन्हांकन कर उनके संरक्षण एवं उत्थान के लिये आवश्यक कदम उठाने होंगे।

कुलपति ने कहा कि भारत बहुसांस्कृतिक धरोहर का देश है तथा यहॉ स्थानीय भाषाओं एवं संस्कृतियों को विभिन्न क्षेत्रों में विशेष महत्व प्राप्त है। इस भाषाई विविधता को सजोये रखना तथा इसके विकास के लिये कार्य करना हमारी जिम्मेदारी है। क्योंकि इसी से विविधता में एकता के स्वरूप इस महान देश के चरित्र का निर्माण होता है।

इस अवसर पर प्रो. मंसूर ने डॉक्टर जहांगीर वारसी की मैथली उर्दू पुस्तक तथा सिम्पोजियम के स्मारिका एवं जर्नल का भी विमोचन किया।कार्यक्रम के मुख्य अतिथि सेंट्रल इंस्टीटयूट ऑफ इंडियन लैंग्वेजेज, मैसूर के निदेशक प्रो. डीजी राव ने अपने उद्बोधन में उक्त सेंटर के उद्देश्यों तथा उपलब्धियों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यह केन्द्र केन्द्रीय तथा राज्य सरकारों को भाषा के सम्बन्ध में सुझाव प्रदान करने में मुख्य भूमिका निभाता है तथा विभिन्न भारतीय भाषाओं के संरक्षण तथा विकास के लिये कार्य करता है।

लिंग्विस्टिक विभाग के अध्यक्ष प्रो. एस इम्तियाज हसनैन ने सिम्पोजियम के विषय पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए कहा कि विभिन्न विषयों के मध्य संयुक्त अध्ययन एवं शोध की संभावनाऐं बढ़ी हैं तथा भाषाई सीमाओं से परे जा कर अध्ययन के नये विषय ढूंढे जा रहे हैं। इस आधार पर नई वैश्विक सांस्कृतिक व्यवस्था को बढ़ावा मिल रहा है तथा इसमें अन्तर विषयी अध्ययन के माध्यम से अन्तर्राष्ट्रीय सांस्कृतिक मूल्यों के विकास का रास्ता प्रशस्त हो रहा है। आर्ट्स संकाय के अधिष्ठाता प्रो. मसूद अनवर अलवी ने स्वागत भाषण प्रस्तुत जबकि प्रो. मसूद अली बेग ने कार्यक्रम का संचालन किया। डॉ. एमजे वारसी ने अतिथियों का धन्यवाद ज्ञापित किया।

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