…ये गौशाला, बनती जा रही मौतशाला? लोधा ब्लॉक के श्री खेरेश्वर गौशाला की हालत

अलीगढ मीडिया डॉट कॉम, अलीगढ़: उत्तर प्रदेश सरकार ने किसानों को छुट्टा गायों से निजात दिलाने के लिए हर जिले, तहसील व ब्लॉक में छुट्टा गायों के लिए गौवंश आश्रय स्थल बनवाए हैं, लेकिन लोधा ब्लॉक क्षेत्र में बनी गौशाला, जहां पर गायों की बहुत बुरी हालत है। न उन्हें चारा मिल रहा है और न पानी। वाजिदपुर स्थित श्री खेरेश्वर गौशाला का बेहद बुरा हाल है। गौशाला में बेहद दिक्कतों का सामना कर रही गायों की भूख-प्यास से बेहाल होकर हड्डियां निकल गई है। इन गायों को खाने के नसीब में सिर्फ सूखा और गीला तूरी का कटा हुआ चारा मिल रहा है। पानी समय से मिलता भी है या नहीं, ये बताया नहीं जा सकता।

योगी सरकार गौशालाओं को बेहतर सेवाएं देने के कई दावे कर रही है, लेकिन गांव वाजिदपुर स्थित श्री खेरेश्वर गौशाला की तस्वीर अलग कहानी बयां कर रही है। यहां बने गौशाला में लगभग 150 गाय हैं, जिनमें आधा दर्जन से अधिक गाय दुर्लभ अवस्था मे अपनी दुर्दशा को देख आंसू बहाने को मजबूर हैं। इस गौशाला में न तो एक भी पेड़ लगा है, न ही ऐसी कोई छाया की व्यवस्था। मात्र छोटे से टिन शेड हैं। जबकि नियम के मुताबिक गाय, बिजार, गर्भवती गाय और बछड़ों को अलग रखने की व्यवस्था होनी चाहिए। वहीं गांव प्रधान एवं गौशाला प्रबंधक सोनू बघेल ने बताया कि हमारे यहां 290 गाय हैं, जिसमें सभी गाय स्वस्थ हैं, जिन्हें हम सुबह-शाम चारा खिला रहे हैं, चारे में भूसा, खल चुनी और भूसी खिला रहे है, पानी की व्यवस्था चुस्त-दुरूस्त है, समय-समय पर डॉक्टर आ रहे हैं बल्कि सच्चाई इसके उलट थी।

…क्या गौशाला की सुध लेगी सरकार?
स्वतंत्र फोटो जर्नलिस्ट मनोज अलीगढ़ी ने श्री खेरेश्वर गौशाला में गायों की दुर्दशा को फोटो के माध्यम से दर्शाने की कोशिश की है। यहां पर भूखी-प्यासी लाचार गाय मानो अपनी मौत का इंतजार कर रही हो। वहीं दूसरी ओर चारे की नांद में पड़ी हुई एक बेसुध गाय पानी का इंतजार कर रही थी। कुछ कदम आगे बढ़कर एक गाय का बछड़ा शायद मौत के आवेश में पहुंच चुका था। उसके पास ही कुछ कदम की दूरी पर एक सफेद दुर्बल गाय बेसुध होकर पड़ी हुई थी, जिसके मुंह से झाग निकल रहे थे। वहीं पास में जब पानी की कुंडी देखी गई, तो उसमें काई जमी हुई थी और पानी का स्तर काफी कम था। कुछ कदम आगे बढ़ने पर घायल पूंछ वाली गाय भी असहाय सी देखी गई। गायों के झुंड़ छोटे से टिन शेड की छांव में धूप से बचने का प्रयास कर रहे थे। यहीं दूसरे पानी के कुंडी में भी पशुओं की गर्दन से पहुंच से पानी दूर था। पूछने पर बताया कि सफाई की गई है, इसके बाद पानी भरा जाएगा। आखिर ऐसे में क्या मोदी-योगी सरकार के नुमाइंद जिलाधिकारी या एसडीएम कोल इसकी सुध लेंगे?

 

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