हरदुआगंज#गंग नहर की सिल्ट चोरी की शिकायत सीएम दरबार पहुंची

अलीगढ मीडिया डॉट कॉम,अलीगढ। हरदुआगंज इलाके में गंग नहर की सिल्ट चोरी की शिकायत सीएम दरबार पहुंच गयी है. शहर के समाजसेवी कार्यकर्ता ने जनसुनवाई पोर्टल पर मुख्यमंत्री को शिकायत भेजकर पूरे मामले में जाँच की मांग की है. शिकातकर्ता ने दैनिक जागरण समाचार पत्र में प्रकाशित खबरों की कटिंग को भी शिकायत के साथ संलग्न किया है. आपको बताते चले कि जनपद के मुख्य गंग नहर खंड तृतीय की गत वर्ष सफाई के दौरान निकली सिल्ट नहर किनारे ही सर्विस रोड पर पड़ी है। हरदुआगंज के निकट बरौठा व माछुआ नहर पुल के मध्य करीब डेढ किमी लंबे क्षेत्रफल की मिटटी को खनन माफिया ने उठाकर बेच दिया। इस संदर्भ में दिनांक 26 जनवरी 2020 को दैनिक जागरण समाचार पत्र के अलीगढ़ संस्करण में प्रमुखता से खबर प्रकाशित की गई . खबर के संज्ञान पर मौके पर पहुंचे जिल्लेदार खण्ड तृतीय ने संबंधित थाने में तहरीर दी। वहीं पुलिस जांच में खननकर्ता कुलदीप सिंह निवासी इटावली हरदुआगंज के नाम अधिशासी अभियंता खण्ड गंग नहर अलीगढ के कार्यालय से पत्रांक संख्या 7099/अखगनअ/ अनुमति दिनांक 27/12/2019 को जारी अनुमति पत्र सामने आया। जिसमें हरदुआगंज अवर अभियंता हरदुआगंज अनुभाग की संतुति पर जनहित में सिल्ट की अनुमति दी गई है। जो इस बात का प्रमाण है कि विभागीय अधिकारियों की सह पर उक्त सिल्ट को खननकर्ता ने निजी लाभ के लिए प्लॉटों में भराव हेतु बेचा है। मामले में हरदुआगंज नहर अनुभाग के अवर अभियंता उप खंड तृतीय यतेंद्र प्रताप सिंह ने अनुमति पत्र के बावत सफाई पेश करते हुए सिकंदरपुर व इटावली के मध्य मिटटी उठवाने के बात लिखित रूप से स्वीकार करते हुए दिनांक 28 जनवरी 2020 को थानाध्यक्ष को पत्र प्रेषित किया है।

हैरानी की बात ये है कि हरदुआगंज अनुभाग के अवर अभियंता की संतुति पर सुमेरा अनुभाग ;बरौठा-माछुआ के मध्यद्ध से मिटटी उठान हुआ है। जबकि उक्त स्थल जहां से सिल्ट उठाई/ चोरी की गई है वह संतुतिकर्ता जेई की सीमा में ही नहीं आता है। शिकायतकर्ता प्रवीण कुमार ने शिकायत में कहा है कि नहर की सिल्ट की नीलामी कराने के आदेश पारित किए जा चुके हैं। उक्त आदेशों की अवहेलना/ नियमों की अनदेखी कर सिल्ट उठवाने में लाखों रूपये के राजस्व की क्षति पहुंचाई गई है।

… विभागीय कर्मियों की मिलीभगत निम्नप्रकार स्पष्ट है;
1: नहर विभाग की किसी संपत्ति को पाने के इच्छुक आवेदक द्वारा नियमानुसार अधिशासी अभियंता कार्यालय में मांग पत्र देने का प्रावधान है। वहां से सहायक अभियंता से जांच आख्या मांगने पर अवर अभियंता/ जिल्लेदार की संतुति के बाद पत्रावली पुन: अधिशासी अभियंता कार्यालय जाने पर निर्णय लेने का नियम है।
2: मामले में सहायक अभियंता गिर्राज सिंह व जिल्लेदार कुंवरपाल सिंह से कोई भी आख्या न लेकर सीधे अधिशासी अभियंता कार्यालय से पत्रांक संख्या 7099/अखगनअ/ अनुमति दिनांक 27/12/2019 को जारी करना विभागीय मिलीभगत दर्शाता है।
3: जारी पत्रांक संख्या 7099/अखगनअ/ अनुमति दिनांक 27/12/2019 में उल्लेखित कार्य विभागीय जूनियर इंजीनियर की देखरेख में कराने के निर्देश थे। लेकिन न तो इंजीनियर को नामित किया गया ना ही उक्त कार्य उसके परिवेक्षण में किया गया।
4: यह है कि हरदुआगंज अनुभाग में सिकंदरपुर व इटावली के मध्य करीब आठ किमी की दूरी है इटावली के निकट से नहर भी नहीं गुजरती है। अत: किसानों द्वारा सिल्ट हटवाने के अनुरोध की बात मिथ्या व बनावटी है।
5: यह है कि विभागीय सींचपाल व सींचपर्यवेक्षक क्षेत्र में रोजाना नहर संचालन का निरीक्षण करते हैं नहर किनारे करीब डेढ़ किलोमीटर लंबी दूरी से उठी सिल्ट की बावत उन्हें जानकारी नहीं हो सका उदासीनता का प्रमाण है।
6: सिल्ट उठान/ चोरी की बावत सुमेरा अनुभाग के जेई द्वारा संज्ञान न लेने व दैनिक जागरण समाचार पत्र द्वारा लगातार खबर प्रकाशन के बाद भी कार्यवाही/संबंधित विभागीय अधिकारियों को पत्राचार नहीं किया गया। ये कृत्य मामले पर पर्दा डालने का प्रयास है।

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