मण्डलायुक्त की अध्यक्षता में “पैगाम-ए-हुब्बल वतनी कांफ्रेंस” सम्पन्न

अलीगढ मीडिया डॉट कॉम,अलीगढ: जिस व्यक्ति में देश प्रेम की भावना नहीं है और जो अपने मुल्क व अपनी कौम की तरक्की करना अपना मजहब नहीं समझता, वह मनुष्य नहीं पशु है, उसका जीवन व्यर्थ है। जिस देश में पैदा हुए, जिसकी मिट्टी में लोटकर हम बड़े हुए, जिस धरती से उपजा अन्न खाकर हम पले-बढ़े, उस मुल्क के प्रति हमारी मोहब्बत होना लाजिमी है। उक्त उद्गार मण्डलायुक्त अजय दीप सिंह ने अलीगढ़ पब्लिक स्कूल में आयोजित ’’पैगाम-ए-हुब्बल वतनी कांफ्रेंस’’ में व्यक्त किये। उन्होंने कहा कि ’’जननी, जन्मभूमिश्च, स्वर्गादपि गरियसी’’ उन्होंने कहा कि ऐसा कोई नागरिक ही क्या वरन चर-अचर, पशु-पक्षी सभी अपनी मातृभूमि से प्यार करते हैं। कुछ अपने मुल्क से मोहब्बत का बखूबी इजहार करते हैं और कुछ में इजहार करने का हुनर न होने के चलते दिल की बात दिल में ही रह जाती है, मगर ऐसा नहीं है कि उन्हें अपने मुल्क से मोहब्बत नहीं है। श्री सिंह ने कहा कि चाहे गीता हो, कुरान हो या बाइबिल- सभी धर्मां का मूल इंसानियत है। ईमान के मायने ही इंसानियत है, और जब इंसानियत इंसान में आ जाती है तो वह सभी धर्मों से ऊपर उठ जाता है। उन्होंने कहा कि ’’जिया इस अंदाज में न खुद रहो उदास, न दूसरों को उदास रहने दो’’।

मण्डलायुक्त ने मैथलीशरण गुप्त की पंक्तियां दोहराते हुए कहा- जो भरा नहीं है भावों से, बहती जिसमें रसधार नहीं। वह हृदय नहीं है पत्थर है, जिसमें स्वदेश का प्यार नहीं। उन्होंने कहा कि अपने मुल्क के लिये मोहब्बत रखने वाले व्यक्ति मुल्क की तरक्की में सहायक होते है, और देश और मुल्क की मान-मर्यादा के लिये अपना सर्वस्व बलिदान करने के लिये सदैव तत्पर रहते हैं। जो व्यक्ति देश की सभी संस्थाओं से स्वाभाविक प्रेम करता है, देश के रीति-रिवाजों से मोहब्बत करता है, देश में उत्पन्न हुई सभी वस्तुओं से स्नेह दिखाता है, देश की वेश-भूषा को अपनाता है और देश की जुबान की तरक्की करता है, वह ही सच्चा देशभक्त कहलाता है।

अवध प्रान्त के प्रचारक मुरारी दास ने कहा कि रसूल-ए-खुदा ने कहा है कि दुनिया में फैलो और जहां भी रहो उस वतन के वफादार रहो। उन्होंने कहा कि कुरान वह ग्रन्थ है जो दुनिया को अमन-पसन्दी और नेकी का रास्ता दिखाता है। उन्होंने कहा कि अल्लाह पाक को अपने नबी की तौहीन पसन्द नहीं है, और जिसने भी तौहीन की वह वजूद में नहीं रहा, और जो नबी को मानता है वही पैगाम-ए-मसीहा कहलाता है।

प्रो0 जिलुरर्रहमान ने अपने बयान में कहा कि ऐसा कौन है जो अपने मुल्क से मोहब्बत नहीं करता. यह अ़ाम मौजूअ़ हर वाशिन्दा अपने देश से मोहब्बत करता है। यहीं पैदा हुए हैं, यहीं सांस लेंगे, वो लोग और थे, जो करांची चले गये। उन्होंने बयां किया कि हर इंसान को अपने अमल से इस बात का इजहार करना चाहिये कि वह अपने मुल्क से मोहब्बत करता है। उन्होंने अपील करते हुए हुए कहा कि हम सभी को मुल्क से मोहब्बत है और हम सभी का फ़रीज़ा है कि इसे स्वच्छ और साफ-सुथरा रखें।
मुफ्ती शामून काजमी ने बयां किया कि संसार का पहला ज्ञान वेद और अन्तिम ज्ञान कुरान है लेकिन दोनों का इल्म एक है, हमारे दूध और खून के रिश्ते इतने मजबूत हैं कि आसानी से जुदा नहीं किये जा सकते। मो0 इस्लाम अब्बास ने कहा कि यह राम का देश है, यह रहीम का देश है, यह नानक का देश है, और वतन से मोहब्बत ही ईमान है। हूजूर सल्लाह अलह वसल्लम को इस देश से सुकून की ठण्डी हवाएं आती थीं। हम ऐसे महान ऋषियों, मनीषियों और महर्षि दधीच की संतानें हैं जिन्होंने अपने शरीर का त्याग कर मातृभूमि की रक्षा की।  कांफ्रेंस में हाजी जहीर, मो0 दानिश अंसारी, रूवीना परवीन, मो0 जुबेर, दौलतराम, आदिल आदि ने भी अपने विचार प्रकट किये। डा0 फातिमा जेहरा ने कांफ्रेंस का संचालन किया। कांफ्रेंस के अन्त में सभी अतिथियों को शॉल एवं पुष्प देकर सम्मानित किया गया।

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