बंदियों की सुरक्षा और देखभाल नहीं कर सकते तो नौकरी से इस्तीफ़ा दे दें जेलर

अलीगढ़ मीडिया न्यूज़, अलीगढ। ‘अलीगढ जिला कारागार में दिनांक 02-08-2019 को विचाराधीन बंदी मोहन पुत्र लाखन निवासी गाँव भाय, थाना दादों की आत्महत्या की खबर को अधिवक्ता और मानवाधिकार कार्यकर्ता जियाउर्रहमान ने शर्मनाक बताया है। उन्होंने एडीजी जेल को पत्र लिखकर जेलर पर कार्यवाही की मांग की है। पत्र में उन्होंने कहा है कि जेल में बंदी की मौत की खबर ने जेल प्रशासन की सक्रियता और सुरक्षा पर प्रश्नचिन्ह खड़े कर दिए हैं। जेल में प्रत्येक बैरक में पुलिस का पहरा होता है और बंदियों पर नजर रखी जाती है।बैरकों में सीसीटीवी कैमरे भी होते हैं, इन सबके बीच बरगद के पेड़ पर चढ़कर आत्महत्या की खबर बड़े षड्यंत्र और बंदियों के उत्पीड़न की ओर इशारा करती है।
उन्होंने पत्र में कहा है कि जेल अधीक्षक की अनुपस्थिति में मोहन की आत्महत्या जेलर की विफलता को दर्शाती है।

जियाउर्रहमान ने पत्र में यह भी कहा है कि मोहन से जेलर ने अवैध रूप से अपने घर दो कूलर लगवाने के रूपये की मांग रखी थी, न देने पर टॉर्चर किया गया। उन्होंने एडीजी जेल से मानवाधिकारों की रक्षा और मोहन के परिवार को न्याय दिलाने के लिए मोहन की आत्महत्या के पीछे के कारणों और जेलर की भूमिका की जांच की मांग की है। उन्होंने जेल अधीक्षक की अनुपस्थिति में हुई मोहन की मौत के पीछे के षड्यंत्र और अवैध रूपये मांगने के बिंदु पर भी जांच की मांग की है। उन्होंने जेल में बंदी की सुरक्षा और जीवन रक्षा की जिम्मेदारी जेल प्रशासन की बताते हुए मोहन के परिजनों को 2० लाख रूपये मुआवजा देने की भी मांग की है।
जियाउर्रहमान ने कहा है कि बंदी की मौत के जिम्मेदार जेलर है, जेलर जब बंदी की सुरक्षा और देखभाल नहीं कर सकते तो उन्हें नौकरी से इस्तीफ़ा दे देना चाहिए।

 

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