जंगली जानवरों के प्रवास स्थल एवं उनके संरक्षण के लिए कोई वैकल्पिक व्यवस्था नहीं, शिकायत

अलीगढ मीडिया डॉट कॉम,अलीगढ: पर्यावरण एवं पर्यटन विकास समिति के प्रबंधक /सचिव रंजन राना ने बुधवार को मुख्यमंत्री के जनसुनवाई पोर्टल पर अंडला स्थित वन क्षेत्र के संदर्भ में पर्यावरण वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग को जंगली जानवरों की समस्या से संबंधित शिकायत दर्ज कराई गई। शिकायत में कहा गया है कि अलीगढ़- खैर मार्ग पर अंडला ग्राम से पूर्व ही सड़क के दोनों ओर हरा भरा वन क्षेत्र है, इस वन क्षेत्र को विकसित करने के लिए वन विभाग द्वारा समय-समय पर वृक्षारोपण कार्यक्रम किए गए हैं। दशकों से इस हरित क्षेत्र में विभिन्न प्रकार के जंगली जानवर निवास करते चले आ रहे हैं, इन जानवरों में पहाड़ी गाय, हिरण, गांव निवासियों द्वारा छोड़ी गई देशी गाय, (जो कि हजारों की संख्या में है), सांप, नेवला, सियार, राष्ट्रीय पक्षी मोर, कोयल, कौवा, मैना, उल्लू, मधुमक्खी, ततैया आदि कीट पतंगे निवास करते चले आ रहे हैं, परंतु अब जिला प्रशासन द्वारा यह 50 हेक्टेयर लगभग संबंधित भूमि डिफेंस कॉरिडोर की स्थापना के लिए चयनित की जा रही है। वास्तव में विकास होने से इस रोड पर औद्योगिकीकरण की संभावनाएं और अधिक बढ़ेंगी तथा क्षेत्रीय निवासियों को भी लाभ हो सकता है।

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परंतु अवगत कराना है तथा आपका ध्यान आकर्षण कराना है कि राष्ट्रीय वन नीति एवं वन्य जीव संरक्षण अधिनियम 1972 के अंतर्गत जंगली जानवरों को भी जीवन यापन करने के लिए अपने निवास स्थान की उपलब्धता प्राप्त करना अथवा शासन प्रशासन द्वारा उन्हें उपलब्ध कराया जाना अनिवार्य बताया गया है, इसके पालन न करने पर विभिन्न प्रकार के दंड एवं सजा का भी प्रावधान कानून में सुरक्षित किया गया है परंतु इन सब के बाद भी उक्त दोनों कानूनों का पालन अंडला स्थित हरित क्षेत्र में नहीं किया जा रहा है। उन्होंने मांग की है कि जंगली जानवरों के प्रवास स्थल एवं उनके संरक्षण के लिए जब तक अन्य कोई वैकल्पिक व्यवस्था शासन प्रशासन द्वारा इसके बदले में उपलब्ध नहीं कराई जाती है, तब तक वर्तमान हरित क्षेत्र को उजाड़ने की कार्रवाई पर तत्काल रोक लगा देनी चाहिए।
आपको बताते चले कि रंजन राणा गत 10 वर्षों से अधिक जनपद अलीगढ़ एवं निकटवर्ती क्षेत्रों में पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता अभियान चलाए हुए हैं तथा समय-समय पर वन विभाग द्वारा जारी दिशा-निर्देशों के अनुपालन एवं वन संरक्षण की जागरूकता के लिए जन सामान्य के बीच प्रयास के जाते रहे हैं। अतः शिकायत पर गंभीरता के साथ विचार करते हुए डिफेंस कॉरिडोर आदि विकास के मॉडल को जंगली जानवरों की बलि देकर स्वीकार न किया जाए।

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