‘‘कानून सामाजिक परिवर्तन का माध्यम है’’ विषय पर दिया व्याख्यान

अलीगढ़ मीडिया न्यूज़,अलीगढ: अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के विधि संकाय द्वारा भारत के भूतपूर्व मुख्य न्यायधीश एवं भूतपूर्व अध्यक्ष मानवाधिकार आयोग के अध्यक्ष न्यायमूर्ति केजी बालकृष्णन द्वारा ‘‘कानून सामाजिक परिवर्तन का माध्यम है’’ विषय पर एक व्याख्यान दिया गया। भूतपूर्व मुख्य न्याधीश केजी बालकृष्णन ने कहा कि संविधान के नीति निर्देशक सिद्वान्त सामाजिक परिवर्तन का मुख्य आधार है और इसी की रोशनी में भारत में सामाजिक न्याय और परिवर्तन का कार्य किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि उच्चतम न्यायालय द्वारा बहुत से निर्णयों में सामाजिक न्याय के सिद्वांतों को आगे बढ़ाने का कार्य किया गया है। उन्होंने आगे कहा कि संविधान के अनुच्छेद 21 को उच्चतम न्यायलय ने इस प्रकार परिभाषित किया है कि भारत में सामाजिक परिवर्तन का रास्ता साफ हो गया है। मुख्य अतिथि ने मिड डे मील योजना का उदाहरण देते हुए कहा कि भारत सरकार द्वारा इस स्कीम को शुरू करने से पहले छात्रों का ड्राप-आउट 68 प्रतिशत था परन्तु स्कीम के लागू होने के बाद इसमें भारी कमी आ गई है। उन्होंने कहा कि राज्य के नीति निर्देशक सिद्वान्त अति महत्वपूर्ण हैं और उन्हें मूलभूत अधिकारों से कम नहीं समझना चाहिए। न्यायमूर्ति बालकृष्णन ने आगे कहा कि यदि कानून को सही तौर पर लागू किया जाए तो देश में सामाजिक परिवर्तन लाया जा सकता है। उन्होंने इस बात पर हर्ष व्यक्त किया कि शिक्षा के अधिकार को मौलिक अधिकार बना दिया गया है। अन्त में उन्होंने कहा कि न्यायविदों के अतिरिक्त अधिवक्ताओं की भी जिम्मेदारी है कि वो सामाजिक परिवर्तन की दिशा में काम करें।
सर सैयद अहमद खान के बारे में अपने विचार व्यक्त करते हुए उन्होंने कहा कि 1877 मे सर सैयद ने जो कालिज स्थापित किया था वो आज विश्वविद्यालय बन चुका है। जहाँ से हजारों छात्र व छात्राऐं तालीम हासिल कर रहे हैं। इस संस्था की महत्ता से इन्कार नहीं किया जा सकता क्योंकि शिक्षा ही ऐसा हथियार है जिसके द्वारा सामाजिक न्याय लाया जा सकता है। अन्त में उन्होंने फैकल्टी के अधिष्ठाता प्रो. शकील समदानी द्वरा एक शानदार लेक्चर आयोजित करने का आभार व्यक्त किया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए ला फैकल्टी के डीन प्रो. शकील समदानी ने कहा कि फैकल्टी के लिए सौभाग्य की बात है कि जस्टिस बालकृष्णन ने छात्र व छात्राओं को संबोधित किया और उन्हें कानून के साथ साथ सामाजिक कार्यों के लिए प्रेरित किया। उन्होंने आगे कहा कि जस्टिस बालकृष्णन ने अपने निर्णयों के द्वारा करोड़ों लोगों की परेशिानियों को दूर किया विशेषकर मिड डे मील को अनिवार्य करके और सरकार द्वारा आयोजित हड़ताल को गैर कानूनी करार देकर इतिहास में अपना नाम स्वर्णिम अक्षरों में दर्ज कर लिया है। प्रो. समदानी ने आगे कहा कि जिस प्रकार से मुख्य अतिथि ने देश में अपना मकाम बनाया और दुनिया के सबसे बड़े लोकतन्त्र के मुख्य न्यायधीश बने वो छात्रों के लिए एक उदाहरण हैं। उन्होंने छात्र व छात्राओं का आव्हान किया कि वह जस्टिस बालकृष्णन के द्वारा दी गई नसीहतों पर अमल करें। सुप्रीम कोर्ट के सीनियर एडवोकेट शारिक अब्बासी ने मुख्य अतिथि का विस्तार पूर्वक परिचय कराया और बताया कि उनहोंने किस प्रकार अपने निर्णयों के द्वारा देश सेवा की है। इस अवसर पर प्रो. जफर महफूज नौमानी द्वारा लिखी गई पुस्तक ‘‘इंटेलेक्चुअल प्रोपर्टी राइट एण्ड पब्लिक पोलिसी’’ का विमोचन भी मुख्य अतिथि द्वारा किया गया। इस पुस्तक का प्राक्कथन पूर्व मुख्य न्यायधीश न्यायमूर्ति केजी वाला कृष्णन ने लिखा है। कार्यक्रम का संचालन अदनान जैदी ने किया तथा धन्यवाद प्रस्ताव विधि विभाग के अध्यक्ष प्रो. जावेद तालिब ने किया। इस अवसर पर बड़ी संख्या में शिक्षक एवं छात्र व छात्राऐं उपस्थित थे। मुख्य अतिथि एवं शारिक अब्बासी का स्मृति चिन्ह और शाल ओढ़ाकर सम्मान किया गया। इस अवसर पर बड़ी संख्या में छात्र व छात्राऐं एवं शिक्षक मौजूद थे। न्यायमूर्ति श्री बालकृष्णन के व्याख्यान के पश्चात आयोजित परिचर्चा में छात्रों ने उनसे अनेक प्रश्न पूछे।

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