कुम्हार सशक्तीकरण योजना ने यूँ बदली किस्मत, एक लाख 45 हजार रुपये हुई सालाना कमाई

Chanchal Verma, अलीगढ मीडिया डॉट कॉम,अलीगढ: घर में पूजा हो या फिर शादी-बारात या फिर दीपावाली-छठ का त्योहार कुम्हार के यहां बनने वाली मिट्टी के उत्पाद सभी शुभ कार्यों के लिए अहम होता है।मा0 प्रधानमत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी का सपना है कि देश की प्राचीन कला सशक्त हो और प्रत्येक व्यक्ति अपने हुनर से भारत को आत्म निर्भर बनाने में योगदान दे, इसी दिशा में सरकार ने अति महत्वपूर्ण ‘‘कुम्हार सशक्तीकरण योजना’’ की शुरूआत कर कुम्हार समुदाय को सशक्त बनाने की दिशा में सार्थक कदम बढ़ाया है।
केन्द्र सरकार ने खादी ग्रामोद्योग आयोग के माध्यम से कुम्हार सशक्तीकरण योजना को नई रफ्तार दी है ताकि कुम्हार समुदाय की आत्मनिर्भर भारत अभियान में उसे अलग पहचान मिल सके। सरकार की स्पष्ट मंशा है कि हमारी प्राचीन संस्कृति को पनुर्जीवित रखा जाए। परंपरागत उद्योगों को बढ़ावा देकर कुटीर उद्योग स्थापित किए जाएं। सरकार का मानना है कि कुम्हार समुदाय भारतीय शिल्पकला के वाहक हैं, उन्हें नवीन तकनीकी से जोडकर उनके जीवन को सुगम बनाते हुए उनके उत्पादों की उत्पादन क्षमता को बढा सकते हैं। कुम्हार मिट्टी के बर्तनों की परम्पारिक कला को जिन्दा रखे हुए हैं। वर्तमान सरकार द्वारा कुम्हार समुदाय को मजबूत बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कार्य किए जा रहे हैं। सरकार द्वारा कुम्हारों के हित मे उठाये गए प्रभावी कदम कुम्हार समुदाय को सशक्त बनाने की दिशा में बडा कदम साबित होगा।

गोपीचन्द्र पुत्र किशोरीलाल ग्राम भोपतपुर ने बताया कि मिट्टी के बर्तन बनाना उनका पैतृक कार्य हैै। प्रदेश सरकार द्वारा कार्यालयों में प्लास्टिक पर जब से प्रतिबन्ध लगाया है और मिट््टी कुल्लड़ का प्रयोग अनिवार्य किया है, तब से कुल्लड़ों की मांग बढ़ी है। आम जनमानस में भी प्लास्टिक एवं एलुमिनियम से होने वाले दुष्प्रभावों के बारे में जागरूकता आने से मिट्टी के बर्तनों का प्रयोग बढ़ा है। पहले वह हाथ का चाक चलाते थे, परन्तु जब से विद्युत चलित चाक प्राप्त हुआ है, मिट्टी के उत्पाद बढने के साथ ही आमदनी में काफी इजाफा हुआ है। वह योगी सरकार को धन्यवाद देते हैं कि उनकी योजनाओं से परिवार की आय में वृद्धि हुई है।

खादी ग्रामोद्योग आयोग के अनुसार देश में करीब चार करोड़ कुम्हार समुदाय के लोग हैं। सरकार द्वारा हजारों की संख्या में विद्युत चाक प्रदान कर एवं प्रशिक्षित करते हुए ‘‘ कुम्हार सशक्तीकरण योजना ’’ का सीधा लाभ पहुँचाया जा रहा है। खादी ग्रामोद्योग आयोग की कुम्हार सशक्तीरण योजना के तहत कुम्हारों की औसत आय 3 हजार रूपए प्रति माह से बढ़ाकर 12 हजार रूपये प्रतिमाह की गयी है। इस योजना का लक्ष्य भारत की परम्परा को सशक्त बनाना और कुम्हार समुदाय को विकास की मुख्य धारा में वापस लाना है।
प्रदेश के यशस्वी मुख्यमंत्री श्री योगी आदित्यनाथ जी ने कुम्हार समुदाय को विशेष सुविधाएं सुलभ कराने एवं कारीगरों को सुविधाजनक रूप से मिट्टी के उत्पादों को बाजार उपलब्ध कराने के लिये ष्उत्तर प्रदेश माटी कला बोर्डष् का गठन किया है। बोर्ड द्वारा खादी नीति योजनान्तर्गत माटीकला कारीगरों को विद्युत चलित चाक, पगमिल एवं भट्टियों का वितरण किया जा रहा है। खादी ग्रामोद्योग अधिकारी अशोक कुमार सिंह ने बताया कि बोर्ड द्वारा वर्ष 2019-20 के लक्ष्य के सापेक्ष शिल्पकार समुदाय के 10 लाभार्थियों अमृत सिंह, भिक्खी सिंह, गजेन्द्र सिंह, मनवीर सिंह, सतीश, मुकेश कुमार, मूल चन्द्र, जितेन्द्र कुमार, गोपी चन्द्र एवं श्रीमती कमलेश को अध्यक्ष माटीकला बोर्ड श्री धर्मवीर प्रजापति द्वारा विद्युत चलित चाक का वितरण किया गया। उन्होंने बताया कि शिल्पकार समुदाय को कुम्हारी कला पट्टों के आवंटन के लिये भी बोर्ड द्वारा प्रयास किये जा रहे हैं। कुछ प्रस्ताव पाइप लाइन में हैं, जिन पर शीघ्र ही जिला प्रशासन से स्वीकृति प्राप्त के लाभार्थियों को लाभान्वित किया जाएगा।

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प्रेम चंद्र पुत्र नत्थी सिंह पैतृक निवासी गाँव सब्बिपुर ब्लॉक गंगीरी जोकि वर्तमान में क्वार्सी में रहते हैं। मिट्टी के बर्तन, कुल्हड़, गुल्लक, दिवलियाँ बनाना उनका पैतृक कार्य है। उन्होंने बताया कि मिट्टी के बर्तन बनाने का कार्य पहले दादा- दादी द्वारा किया जाता था। उनके बाद पिताजी के कुशल निर्देशन में उनके द्वारा किया जा रहा है। परिवार में पत्नी बुलबुल और 2 बच्चे हैं, जोकि बहुत छोटे हैं। सवालों का जवाब देते हुए प्रेमचन्द्र ने बताया कि उनकी पत्नी के यहाँ भी मिट्टी के बर्तन बनाने का काम होता है। शादी के बाद अब वह हमारे साथ मिट्टी के बर्तन, कुल्हड़, सकोरा बनाने के काम मे हाथ बटातीं हैं। यदि मैं झूठ न बोलूं तो उनके द्वारा एक समय मे हम से अच्छे और ज्यादा बर्तन बना दिये जाते हैं। पूंछने पर उन्होंने बताया कि उन्होंने समाचार पत्रों के माध्यम से सुना है कि प्रदेश सरकार द्वारा शिल्पकारों की आर्थिक व सामाजिक उन्नति के लिए मांटी कला बोर्ड का गठन किया है। उन्हें भी सरकार से बहुत उम्मीदें हैं। उन्होंने बताया कि वह और उनकी पत्नी 6 घंटे चाक पर बर्तन बनाने और उनको नियमित बाजार में बेचकर 8000 से 9000 रुपये कमा लेते हैं। परिवार का गुजारा अच्छे से हो जाता है। उन्होंने बताया कि उनको मालूम हुआ है कि सरकार द्वारा विद्दयुत चाक और कुछ मिट्टी के बर्तन बनाने के उपकरण दिए जा रहे हैं, यदि हाथ से चलित चाक की जगह विद्युत चलित चाक मिल जाये तो उतने समय में अधिक बर्तन बनाएगा और विश्वास के साथ कहता हूं कि वह मा0 प्रधानमंत्री जी के सपने को साकार करते हुए प्रतिमाह 12000 रुपये से अधिक की कमाई कर सकता है।

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