बिहार में बाढ़ पीडि़तों का दर्द समेट लाए हैं मनोज अलीगढ़ी

अलीगढ मीडिया डॉट कॉम, अलीगढ/बिहार। बिहार के कई शहरों सहित राजधानी पटना में बाढ़ का कहर जारी है। बाढ़ के कारण मौत का आंकड़ा लगातार बढ़ता जा रहा है। अनुमान के मुताबिक राज्य में बाढ़ से अब तक सैकड़ों से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है। बिहार में बारिश के कारण काफी नुकसान हुआ है। बाढ़ की स्थिति को करीब से जानने के लिए उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ से वरिष्ठ फोटो जर्नलिस्ट मनोज अलीगढ़ी पहुंचे और वहां की व्यवस्थाओं का आंकलन अपनी फोटो पत्रकारिता के माध्यम से करने का प्रयास किया। इस दौरान उन्हें कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ा, उन्हें पुलिस-प्रशासन द्वारा कवरेज करने से रोकने का प्रयास भी किया गया लेकिन उन्होंने अपनी काबिलियत से बाढ़ग्रस्त इलाकों में पहुंचे और बाढ़ के विहंगम दृश्यों को कैमरे में कैद कर बाढ़ग्रस्त क्षेत्रों में पीडि़त लोगों की मदद का आह्वान किया है।
फोटो जर्नलिस्ट मनोज अलीगढ़ी ने बताया कि सबसे पहले हम बिहार की राजधानी पटना में उपमुख्यमंत्री सुशील मोदी के आवासीय क्षेत्र में पहुंचे, वहां आजकल चारों तरफ पानी ही पानी है। चार से छह फीट तक पानी भरा होने की वजह से व्यवस्थायें ध्वस्त हैं, चारों तरफ बदबू और सडांध का माहौल है। एनडीआरएफ की टीम राहत सामग्री पहुंचाने वाले समाजसेवियों को साथ मिलकर अधिक से अधिक पीडि़तों तक पहुंचाने का प्रयास कर रही है, तो बावजूद इसके पुलिस-प्रशासन मीडिया और एनजीओ से बचती नजर आ रही है। इसके बाद उसी दिन सिद्धार्थनगर पहुंचे, जहां बाढ़ का कहर लोगों को घरों में कैद किए हुए था। यहां के लोग खुद को असहाय महसूस कर रहे थे। उन्होंने बताया कि अगले दिन आशियाना रोड़ राजेंद्र नगर पहुंचे, जहां चारों तरफ पानी का कहर था। उन्होंने बताया कि एक बहुमंजिला इमारत से जब चारों तरफ नजर दौड़ाई तो पानी ही पानी नजर आ रहा था।

इसके बाद पटना और सोनपुर को जोड़ने वाले दीघा सोनपुर रेल सड़क पुल (दीधा घाट) पर पहुंचे, यहां गंधक नदी, गंगा नदी और सोन नदी अपने खतरे के निशान से ऊपर चल रही हैं, वहीं गांधी सेतु से लगी कोसी नदी भी पीछे नहीं है। इनके नदियों के पास यादवों का गढ़ है, यहां सरकार द्वारा मदद के नाम पर खानापूर्ति की जा रही है।
फोटो जर्नलिस्ट मनोज अलीगढ़ी ने बताया कि बाढ़ग्रस्त इलाकों में मूसर, पासवान, कहार, जाटव समाज की स्थिति दयनीय बनी हुई है, यहां जातिवाद का बोलबाला अधिक होने की वजह से भी मुश्किलों का सामना लोगों को करना पड़ रहा है। उन्होंने बताया कि स्थानीय लोगों ने बताया कि गरीबों की यहां कोई सुनने वाला नहीं है। मदद के नाम पर सिर्फ ढि़ंढोरा पीटा जा रहा है। उन्होंने बताया कि पानी की वजह से भयंकर बीमारियां फैलने का खतरा बना हुआ है, कारण है कि क्लोरीन और ब्लीचिंग पाउडर अच्छी मात्रा में नहीं डाला जा रहा है। सरकार द्वारा प्रिंट व इलैक्ट्रॉनिक मीडिया को कवरेज करने से रोका जा रहा है। कारण पूछने पर बताया कि इससे बिहार सरकार की छवि खराब होगी। फोटो जर्नलिस्ट मनोज अलीगढ़ी इससे पहले भी कई आपदाग्रस्त राज्यों में कवरेज करने पहुंचे हैं, जिनमें बिहार में कोसी का कहर 2008, उत्तराखण्ड़ की त्रासदी और नेपाल का भूकंप प्रमुख रहे।
बता दें कि बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने बिहार के कई जिलों में आई बाढ़ और बारिश को जलवायु परिवर्तन का कारण माना है। उन्होंने कहा कि राज्य में कभी सूखा और कभी भारी बारिश जलवायु परिवर्तन के कारण है।

 

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