देखिये, अतरौली नगर पालिका की दुकान आवंटन घोटाले में तत्कालीन SDM ललित कुमार का बड़ा कारनामा!

अलीगढ मीडिया न्यूज़,अतरौली/अलीगढ: सरकारी संपत्तियों के सरकारी सेवारत लोगों द्वारा बंदरबांट पर पर्दा डालने के लिए राजकीय शक्तियों का आपराधिक दुरुपयोग करने का मामला सामने आया है. उत्तर प्रदेश के अलीगढ जिले की नगर पालिका परिषद अतरौली की 40 से भी अधिक दुकानों के फर्जी आवंटन कर इससे प्राप्त धनराशि को सरकारी अधिकारियो ने गबन कर लिया। मामले की शिकायत पर जाँच में आरोप सही पाए जाने पर शिकायतकर्ता सामाजिक संगठन स्वराज्य समिति के पदाधिकारियों को तत्कालीन एसडीएम ललित कुमार ने शांतिभंग होने की आशंका मात्र पर जेल भिजवा दिया. इतना ही नहीं तत्कालीन एसडीएम ललितकुमार ने शांति भंग की धारा 151 में शिकायतकर्ताओं को जमानत देने के लिए ऐतिहासिक १५ लाख रुपये जमानत राशि जमा कराई. बिना किसी गिरफ्तारी प्रपत्र के शिकायतकर्ताओं को धारा 151 में जेल भेजने के मामले में सामाजिक संगठन न्याय ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाने का मन बनाया है.
जहां इस गबन पर पूरी सरकारी मशीनरीलंबी तानकर सोती रही वहीं जब समाज के जिम्मेदार नागरिकों ने सामाजिक संगठन स्वराज समिति के बैनर तले काम करते हुए सवा करोड़ रुपए के गबन का खुलासा किया तो, जिस कार्यपालक मजिस्ट्रेट एसडीएम अतरौली (वर्तमान तैनाती कासगंज) ललित कुमार के समक्ष खुलासा किया गया, वह स्वयं भी घोटाले में शामिल होकर गबन को अस्तित्वमान बनाए रखते हुए शिकायतकर्ता को धमकाने लगा. इस बाबत जेल से रिहा होने के बाद शिकायतकर्ताओ ने रविवार को पत्रकार वार्ता करते हुए स्वराज समिति के सचिव सौरव भरद्वाज ने बताया कि यद्यपि जांच में आरोप प्रमाणित हो चुके थे लेकिन बार-बार आरोपियों को ही जांच सौंप कर तत्कालीन एसडीएम अतरौली ललित कुमार लोकहित की सूचनाओं को छुपाते रहे, और लोक परिसंपत्तियों के गबन पर कर्तव्य पालन करते हुए कार्यवाही करने के बजाए गबन में शामिल होकर लोकहित प्रकटनकर्त्ताओं (whistleblowers) के प्रयासों को असफल बनाते रहे। आरोप है कि, तहसील दिवस में शिकायतकर्ता को धमकाकर मौके पर ही लिखवा लिया गया कि मैं निस्तारण से संतुष्ट हूं लेकिन कोई कार्यवाही नहीं की।

स्वराज समिति के सचिव सौरव भरद्वाज ने बताया कि व्यापक जनहित में जब सूचना उच्चाधिकारियों को दी गई तो गबन में शामिल एसडीएम ललित कुमार कुपित हो गया और उसने थाना अतरौली पर तैनात इंस्पेक्टर शत्रुघ्न एवं अन्य के साथ आपराधिक साजिश करके विसलब्लोअर को कानूनी कार्यवाही करने से रोकने के लिए फर्जीवाड़ा करके अवैध अभिरक्षा में रखा, और लोकहित प्रकट करने वाले अंशुल भारद्वाज से 1140 रुपए थाना पर लूट लिए, गिरफ्तारी की परिस्थितियों और इससे संबंधित तमाम सूचनाओं का प्रपत्र गिरफ्तारी मेमो बनाया ही नहीं और कूटकरण द्वारा गिरफ्तारी फर्जीवाड़ा करके इंस्पेक्टर शत्रुघ्न और एसडीएम ललित कुमार ने गवन करने वाले नानक चंद गिरीश चंद्र सागर अधिशासी अधिकारी गुलशन सूरी सी पी मिश्रा, आरोपी पूर्व नगरपालिका अध्यक्षा रेखा शर्मा शाजिदा बेगम आदि के साथ आपराधिक साजिश करके एक राय होकर और कानूनी कार्यवाही रोकने के सामान आशय को आगे बढ़ाते हुए लोकहित प्रकटनकर्त्ता (whistleblower) अंशुल भारद्वाज को फर्जी दस्तावेजों का फर्जी होना जानते हुए वास्तविक की तरह प्रयोग करके कानूनी न करने के लिए आतंकित और परेशान करते हुए अब तक की सर्वाधिक 5-5 लाख की 3 जमानतें मांगी। जो तुरंत उपलब्ध भी कराई गई लेकिन अंशुल भारद्वाज को कानूनी कार्यवाही न करने की चेतावनी देते हुए यह कह कर जेल भेज दिया कि सत्यापन तक जेल में रखूंगा।
सामाजिक संगठन न्याय के अध्यक्ष अधिवक्ता सरदार मुकेश सैनी ने बताया कि जहां सरकारी संपत्तियों की सुरक्षा का दायित्व लोक सेवकों पर है, वही इस प्रकार सरकारी संपत्तियों की खुली लूट से अवगत कराने वालों पर ही सरकारी सेवारत लोग टूट पड़े, यह विदेशी सरकार की भांति जनता के धन की लूट है और लोकतंत्र के स्वस्थ और वास्तविक होने पर सवाल खड़ा करता है। अब वह पूरे मामले को लेकर मा० उच्च न्यायलय लेकर जायेंगे. उन्होंने सवाल किया है कि अगर नगर पालिका अतरौली की ४० दुकानों के आवंटन प्रक्रिया में गड़बड़ी जाँच में साफ हो चुकी है तो दोषी अधिकारी और कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई क्यों नहीं की जा रही है? जाँच में शिकायत सही पाए जाने पर भी मामले में कार्रवाई करने के नाम पर जिला प्रशासन द्वारा शासन स्तर से कार्रवाई करने की दलील दी जा रही है जबकि शासन स्तर से जिला प्रशासन को कार्रवाई करने की बात कही जा रही है. दोषियों के खिलाफ कार्रवाई के बजाय शिकायतकरने वालो को १५१ में फर्जी तरीके से जेल भेजकर उन्हें परेशान और प्रताड़ित किया जा रहा है.

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महोदय, प्रस्तुत परिवाद का पूर्ण समर्थन करते हुए शपथ बयान करता हूं कि, नगर पालिका अतरौली कार्यालय के भूतल पर भारत सरकार के धन से बनी 39 दुकानों का कूट करण आधारित फर्जी आवंटन, इन पर नाजायज कब्जा दखल और गबन मेरी शिकायतों में प्रमाणित हुआ था, जिससे पहले से अवगत उप जिलाधिकारी, अतरौली ललित कुमार को मैंने कई बार तहसील दिवसों में साक्ष्यों सहित अवगत कराया किंतु ललित कुमार गबन में शामिल होकर उसे सुकर और सुनिश्चित बनाने के सामान आशय से तथ्यों और साक्ष्यों को छुपाने में लग गए और कोई कार्यवाही नहीं की, और फर्जी आवंटन से सरकारी दुकानों पर किए गए नाजायज कब्जे और दखल को बनाए रखा, लोकहित प्रकटन और गबन पर कार्यवाही की मांग वाली मेरी शिकायतों पर तहसील दिवस में कार्यवाही के बजाय कभी आरोपियों को जांच सौंपी, कभी जांच में आरोपों को जांचों में सत्य पाने वाले अधिकारी को पुनः जांच सौंपी, गबन में शामिल होकर गबन को सफल बनाने के समान आशय से तत्कालीन उप जिलाधिकारी अतरौली ललित कुमार शिकायतों पर कार्यवाही के बजाय मुझे मेरी वास्तविक और विधिपूर्ण ढंग की जा रही कार्यवाही न करने के लिए मजबूर करते हुए डांटते फटकारते थे, बेईज्ज़त करते थे और उसे जेल भेजने की धमकी देते थे, एक बार जब मैंने शिकायत की तो मुझे धमका कर उसी वक्त शिकायत पर ही लिखवा लिया कि निस्तारण से संतुष्ट हूं और स्वयं उप जिलाधिकारी ललित कुमार ने मेरे इस प्रार्थना पत्र पर लिखा कि 3 दिन में रिपोर्ट प्रेषित की जाएगी लेकिन न तो कोई रिपोर्ट प्रेषित की और न ही कोई कार्यवाही की इसके बाद एक तहसील दिवस से ठीक पहले प्रभारी अधिकारी तहसील दिवस अतरौली को लिखित पत्र प्रेषित करके 3 दिन में विस्तृत आख्या प्रस्तुत करने का झूठा विश्वास दिया और न तो कार्यवाही की और न ही कोई आख्या प्रस्तुत की, कोई कार्यवाही न होने पर प्रार्थी ने उपजिलाधिकारी ललित कुमार के वरिष्ठ अधिकारी अपर जिलाधिकारी, वित्त एवं राजस्व, अलीगढ को 8 अन्य पिछली शिकायतों एवं साक्ष्यों सहित मामले से अवगत कराया तो प्रकरण को अपने हाथ से निकलते देख कर बौखलाए ललित कुमार ने मुझसे स्पष्ट कहा कि तुझे जेल की हवा जरुर खिलाऊंगा| बाद में प्रार्थी की शिकायतों में सही पाए गए आरोपों को जिलाधिकारी महोदय, अलीगढ की जांच रिपोर्ट्स में भी सही पाया गया और नगर पालिका अतरौली की पूर्व अध्यक्षों रेखा शर्मा व साजिदा बेगम और दो पूर्व अधिशासी अधिकारियों गुलशन सूरी व सीपी मिश्रा सहित आवंटन पटल प्रभारी नानक चन्द्र, अवर अभियंता गिरीश कुमार सागर को दोषी पाया गया| इसके अतिरिक्त ज्वाइंट मजिस्ट्रेट/उपजिलाधिकारी अतरौली पुलकित खरे (आई०ए०एस०) द्वारा जिलाधिकारी, अलीगढ़ को प्रस्तुत की गई रिपोर्ट पत्र संख्या 807 दिनांक 19 जुलाई 2014 मैं फर्जी आवंटन दिखाकर ₹5000000 का गोलमाल और भ्रष्टाचार पाया गया इन दोनों प्रकरणों में न तो राजस्व हानि की वसूली की गई, न फर्जी आवंटन से लिए गए नाजायज कब्जे हटवाए गए, और न ही इन अपराधों के लिए कोई एफ०आई०आर० दर्ज की गई| मैंने गबन की इस प्रक्रिया को समझने के लिए दुकान संख्या 27 के अपने लिए विधि पूर्वक आवंटन की मांग की तो साजिशन सामान आशय से कूटकरण द्वारा मेरी मांग को छिपाकर इस दुकान को मेरी मांग से पहले ही किसी अन्य को आवंटित किए जाने की कूट रचित सूचना मुझे ने मुझे उपलब्ध करा दी, जब मैंने आवंटन से प्राप्त धन बैंक में जमा करने की पर्ची की प्रति सूचना अधिकार कानून के अंतर्गत मांगी तो मांगी गई सूचना से भिन्न दस्तावेज नगर पालिका परिषद की रसीद पर प्रविष्ठियां खुरच कर कूट प्रविष्टियां अंकित करके वास्तविक की भांति आवंटन पटल प्रभारी नानक चन्द्र और जन सूचना अधिकारी जो कार्यवाहक अधिशासी अधिकारी भी थे गिरीस कुमार सागर ने मुझे दिए| बाद में सूचना अधिकार कानून के अंतर्गत दुकानों के आवंटन और इससे संबंधित बैंक खाते में लोक वित्त जमा किए जाने के साक्ष्य मांगे तो सहायक जन सूचना अधिकारी और उनके सहायक नवीन जैन ने गबन की आपराधिक साजिश में सामान आशय से शामिल होकर उसे सुकर बनाते हुए समान आशय से सुबूत छुपाए और मांगी गई सूचनाएं नहीं दी| बाद में लेखा परीक्षा एवं निरीक्षण आख्या का अवलोकन करने से पता चला कि दुकान आवंटन की रकम से संबंधित जो रसीद नगर पालिका ने मुझे दी थी उस क्रमांक की कोई रसीद उस दुकान के आवंटन के लिए जारी ही नहीं की गई थी और उस दिनांक में भी कोई रसीद उस दुकान के संबंध में जारी नहीं की गई थी जो दिनांक मुझे सूचना अधिकार कानून के अंतर्गत दी गई रसीद पर अंकित था| उपरोक्त संपूर्ण प्रकरण से जुड़े साक्ष्यों व तथ्यों को छिपा रहे और गबन और कूटकरण व कूटकरण आधारित फर्जी नीलामी से बनी स्थितियों को बहाल रखे हुए अपराधी गण एक राय होकर फर्जीवाड़े और गबन के खुलासे के लिए लोकहित प्रकट में लगे होने के कारण मुझसे रंजिश मानने लगे| दिनांक 25 फरवरी 2017 को सुबह लगभग 10-11 बजे थाना अतरौली के इंस्पेक्टर शत्रुघ्न उपाध्याय और अन्य पुलिसकर्मियों ने कॉलेज रोड, अतरौली पर मंदिर के पास पहुंच कर मुझे थाने चलने को कहा जब मैंने इसकी वजह जाननी चाही तो कुछ नहीं बताया और लिखित सूचना मांगी तो वह भी नहीं दी और जबरजस्ती यह पुलिसकर्मी मुझे थाना अतरौली ले गए उस समय मौके पर वरुण कुमार पुत्र विजेंद्र सिंह निवासी मुखरियान, अतरौली एवं शिवम् राजपूत पुत्र श्री दिनेश चंद्र निवासी ब्रह्मनपुरी, टेढ़ा नीम, अतरौली, अलीगढ़ भी मौजूद थे. बहुत कहने पर भी मेरी अभिरक्षा की सूचना मेरे परिवार वालों को नहीं दी गई, और वकील साहब की मांग करने पर भी वकील साहब की सेवाएं नहीं लेने दी| थाना पर दिन भर खाने को कुछ नहीं दिया और रात भर भी भूखा प्यासा रखा, मारा पीटा और शत्रुघ्न उपाध्याय ने गंदी गंदी गालियां देते हुए कहा साले हमारे एसडीएम साहब से पंगा लेता है तेरा दिमाग ठीक कर देंगे साहब कह रहे थे पता नहीं साले पर कितना टाइम है दर्जनों शिकायतें कर डाली हैं पता नहीं क्या करता है साले की कमाई क्या है ऐसा कहते हुए मुझे मारपीट कर मेरी तलाशी ले कर मुझसे 1140 रुपये छीन लिए और hurt किया| इस फर्जीवाड़े गबन घोटाले के खिलाफ कानूनी कार्यवाही से रोकने के समान आशय से एसडीएम ललित कुमार व इंस्पेक्टर शत्रुघ्न उपाध्याय ने योजना बनाकर मुझे परेशान (hurt) और आतंकित करते हुए फर्जी रिपोर्ट बनाकर असली की तरह प्रयोग करके और नकली होना जानते हुए असली की तरह छद्म न्यायिक प्रक्रिया में प्रयोग और स्वीकार करके मुझे गिरफ्तार दर्शाते हुए रोजनामचा आम में कूट प्रविष्टि अंकित करके और कूट रचित चलानी रिपोर्ट को आधार बनाकर दिनांक 26 फरवरी 2017 को लगभग 2:00 बजे दोपहर में हथकड़ी में बांधकर सार्वजनिक रूप से अपमानित करते हुए उप जिलाधिकारी अतरौली ललित ने अपनी अदालत में पुलिस द्वारा प्रस्तुत कराया और गिरफ्तारी का समय, स्थान, तारीख, गिरफ्तार व्यक्ति से बरामद सामान की सूची, गिरफ्तारी के गवाहान, गिरफ्तारी की सूचना प्राप्त करने वाले संबंधी एवं गिरफ्तार व्यक्ति की हस्ताक्षर आदि अनेक महत्वपूर्ण जानकारियों वाले अभिलेख गिरफ्तारी मेमो के बिना ही मुझे गिरफ्तार दर्शा कर और गिरफ्तार मान कर कूट रचित आधारों पर बिना किसी साक्ष्य के मेरे द्वारा शांति भंग किए जाने की आशंका जताते एवं मानते हुए उप जिलाधिकारी अतरौली ने दो जमानतें प्रत्येक पांच लाख (₹500000) रुपये की, और इतने ही रुपए का मेरा व्यक्तिगत बांधपत्र अर्थात कुल ₹1500000 की जमानत की मांग अपने न्यायालय में घंटों खड़ा रख कर मुझसे शाम ०६:२७ बजे यकायक लिखित में मुझसे की इससे पूर्व अभिरक्षा का कोई कारण और आरोप मुझे नहीं बताया गया था कुछ ही दिन पहले मैंने विधायक प्रत्याशी के रूप में नामांकन करते हुए चुनाव लड़ा था और उप जिला अधिकारी अतरौली ललित कुमार रिटर्निंग ऑफिसर के रूप में इस तथ्य से भली-भांति अवगत हुए थे कि मेरे पास संपत्तियां नगण्य हैं किंतु इरादतन जेल भेजने की नीयत से इतनी अधिक जमात राशि की मांग की गई थी इससे पहले कभी उपजिलाधिकारी अतरौली के न्यायालय में इतनी बड़ी जमानतें कभी नहीं माँगी गई हैं, मेरी छवि ईमानदार और सामाजिक व्यक्ति की है इसी कारण तुरंत अनेक लोगों ने 500000 रुपये की जमानत मुझे रिहा कराने के लिए दी जिन्हें स्वीकार किया जाना बताते हुए जमानतों के सत्यापन होने तक इरादतन नगर पालिका परिषद के फर्जी दुकान आवंटन कांड में कानूनी कार्यवाही करने से मुझे रोकने के लिए परेशान और आतंकित करते हुए धमकाते हुए मुझे जेल भेज कर hurt किया और कई दिन जेल में रखा, जबकि आम तौर पर १५१दन्द प्रक्रिया की कार्यवाही में अभियुक्त की रिहाई के बाद जमानतों का सत्यापन किया जाता है| फर्जी ढंग से जेल में रखे जाने के सुबूतों की मेरी कानूनी मांग पर भी उप जिलाधिकारी, अतरौली कार्यालय और फौजदारी अभिलेखागार, कलेक्ट्रेट अलीगढ़ के प्रभारी अधिकारी ने गैर कानूनी ढंग से सुबूत छिपाए गए| शासकीय ऑडिट रिपोर्ट के अवलोकन से यह भी ज्ञात हुआ है कि मितव्ययता संबंधी शासनादेश की अवहेलना करके लगभग पौने चार लाख रुपये नगरपालिका के अधिकारियों ने व सफाई निरीक्षक नरेन्द्र ने भैंसा चारा भत्ता के कूट रचित मद में ₹36000 का गबन और लिपिक नविन जैन ने वर्षों से खराब पड़े जनरेटर के डीजल के कूट रचित दस्तावेजों पर आधारित मद में लगभग ₹100000 की निकासी करके गबन कर लिया है और सक्षम अधिकारियों द्वारा अधियाचन पर मांगे जाने पर भी इनके साक्ष्यों को आपराधिक साजिश करके समान आशय से छुपाया है| घटनाक्रम की सूचना थाना अतरौली पर लिखित में दी गई लेकिन कोई कार्यवाही न होने पर वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक महोदय अलीगढ़ को भी घटनाक्रम के लिखित सूचना पंजीकृत डाक से दिनांक ०९-०२-१९ को दी गई इसके साथ-साथ अन्य अनेक जांच एजेंसियों को घटनाक्रम से लिखित रूप में पंजीकृत डाक द्वारा अवगत कराया गया लिखित रूप में दी गई, किन्तु कोई कार्यवाही नहीं की गई| परिवाद का पूर्ण समर्थन करते हुए श्रीमान जी से विनती है कि, जनता के संसाधनों को हड़पने वाले मुलजिमान पर कड़ी कार्यवाही द्वारा दण्डित करें|

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