देखिये, प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) की हकीकत, अलीगढ में बनाते है बिना छत वाला मकान …Exclusive

चंचल वर्मा, अलीगढ मीडिया डॉट कॉम,अलीगढ: प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने गरीब और बेसहारा लोगों को पक्की छत मुहैया करने के लिए प्रधानमंत्री आवास योजना शुरू की. इस योजना के तहत शहरी इलाको में दो लाख पचास हजार रुपये से ज्यादा जबकि ग्रामीण इलाको में लगभग एक लाख बीस हजार रुपये आवास बनाने के लिए दिए जा रहे है. ग्रामीण इलाको में योजना में पात्र लोगों के चयन करने की जिम्मेदारी ग्राम पंचायत स्तरीय अधिकारियो की है. लेकिन अधिकारी अपनी जिम्मेदारी कितना निभाते है इसकी एक झलक देखनी है तो जिला मुख्यालय से करीब ७२ किमी दूर गंगीरी विकास खंड के शाहजापुर बैजना ग्राम पंचायत में चले आईये. यहाँ भवानीपुर गांव के माजरा ऊसर नगला में हर तीसरे व्यक्ति के पास कच्चा मकान ही है. लोगों की आजीविका का एक मात्र साधन गांव में फेरी लगाना है. लेकिन प्रधानमंत्री आवास योजना से महज दो मकान बनाये गए है.

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अब जरा प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के तहत बनाये गए इन मकानों की हकीकत भी देख लीजिये. गांव मदन पाल पुत्र हाकिम सिंह नाम के एक व्यक्ति को इस योजना के तहत वर्ष २०१७-१८ में आवास बनाने के लिए एक लाख बीस हजार रुपये सरकार से आवंटित हुए. सरकार से लाखो की मदद मिली तो मदन पाल को लगा की उन्हें पक्की छत नसीब हो जाएगी. लेकिन ग्राम पंचायत के अधिकारियो ने उस रकम में से बंदरबांट कर लिया. मकान तो बन गया लेकिन आधा-अधूरा ही रह गया. इस मकान पर आज तक छत नहीं बन पायी है. दो साल से अधबने पड़े मकान पर ब्लॉक स्तरीय अधिकारिओ ने भी बिना किसी सत्यापन के उस पर प्रधानमंत्री आवास योजना(ग्रामीण) की पट्टी पुतवा दी. बात अधूरे मकान तक नहीं सिमटी. मकान बना है तो बिजली विभाग ने भी मुफ्त बिजली कनेक्शन का मीटर भी दीबार पर लटका दिया. हालाँकि इस मीटर में न तो पिछले दो सालो में बिजली जुडी है और न ही मदनपाल इस प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के तहत बने मकान में आज तक रह पाया है.

पिछले दो साल से न परिवार पर अधबने मकान की छत बनाने के लिए पैसे इकठ्ठे हो पाए है और न ही किसी अधिकारी ने इस ओर लौटकर दुबारा देखा है. लाभार्थी के पिता विजय सिंह ने अलीगढ मीडिया को बताया कि उन्हें जो पैसा मिला उससे जो बन सका उन्होंने बना दिया, अब उनके पास छत पटाने के लिए पैसे नहीं बचे है. एक लाख २० हजार में से उन्हें मात्र ९० हजार रुपये ही मिल पाए है. इस गांव के रहने वाले हाकिम सिंह का कहना है कि कुछ पैसे ग्राम पंचायत के अधिकारियो ने खा लिए जो उन्हें मिले थे उससे मकान की छत नहीं बन पायी, पिछले दो साल से ज्यादा बीत गयी लेकिन किसी से कोई सुध आज तक नहीं ली है.

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