अलीगढ़#वृक्षारोपण के दौरान 2 लाख 75 हजार से अधिक सहजन के पौधे हुए रोपित

अलीगढ़ मीडिया डॉट कॉम, अलीगढ: सामान्य व्यक्ति एवं बढती उम्र की किशोरियों के साथ-साथ गर्भवती महिलाओं एवं 300 से अधिक बीमारियों के इलाज में सहजन अत्यधिक लाभदायक होता है। इसमें खनिज तत्वों के साथ ही विटमिन प्रचुर मात्रा में पाया जाता है। हाल ही में पोषण माह का शुभारम्भ करते हुये प्रदेश के मा. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी ने प्रत्येक विद्यालय में पोषण वाटिका की स्थापना करते हुये आॅवला, नीबू, करौंदा, गिलोय के साथ सहजन का एक पौधा अनिवार्य रूप से रोपित करने के निर्देश दिये हैं। आयुर्वेद में बताया गया है कि कुपोषण को भगाने में सहजन की अहम भूमिका होती है। सहजन खाने से गर्भवती महिलाओं का स्वास्थ्य बेहतर होने के साथ ही नवजात शिशु भी कुपोषण से मुक्त रहते हैं।

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जिलाधिकारी चन्द्र भूषण सिंह ने उद्यान एवं वन विभाग को पोषण वाटिका की स्थापना में एक-एक सहजन का पौधा अवश्य रोपित कराने के सख्त निर्देश दिये हुये हैं। सहजन में कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन, कैल्शिलयम, आयरन, मैग्नीशियम, विटमिन ए, बी,सी और बी काम्पलैक्स प्रचुर मात्रा में पाया जाता है। यह 300 से अधिक प्रकार की परेशानियों के निदान के लिये उपयोगी पाया गया है। उन्होंने सहजन खेती को आय का एक बेहतर जरिया बताते हुए कहा कि इससे न केवल खेती किसानी उन्नत होती है बल्कि पशुपालन भी बढता है। सहजन से जैविक खाद गुणों युक्त होने के साथ ही इसको जानवरों द्वारा चारे के तौर पर खाने से दुधारू पशुओं का दूध 30 फीसद तक बढ़ जाता है। सहजन के फूल, फली एवं टहनियों को अनेक प्रकार से उपयोग में लाया जा सकता है। यह भोजन के रूप में अत्यंत ही पौष्टिक होता है। सहजन के बीजों का तेल भी निकाला जाता है और छाल, पत्ती, गोंद एवं जड़ से विभिन्न प्रकार की औषधियां बनाई जाती हैं।

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मुख्य विकास अधिकारी ने डीपीओ श्रेयस कुमार, जिला पंचायतीराज अधिकारी पारूल सिसोंदिया एवं जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी को निर्देशित किया है कि प्रत्येक विद्यालय में तैयार की जा रही पोषण वाटिकों समेत सभी ग्राम पंचायतों में स्थापित पंचायत भवनों में सहजन के पौधे जरूर रोपित किये जायें। उन्होंने कहा कि सहजन का पौधा मात्र रोपित करके इतश्री न कर ली जाये, बल्कि इसी विधिवत देखभाल भी की जाये। यदि आप सहजन के गुणों के बारे में अच्छे से जानेंगे तो आप उसे चमत्कारिक औषधीय गुणों से भरपूर वृक्ष की संज्ञा दिये बिना नहीं रह सकते हैं। उन्होंने बताया कि सहजन वृक्ष का प्रत्येक भाग व्यक्ति के उपयोग में आता है। सहजन की फलियों एवं फूलों की न सिर्फ स्वादिष्ट सब्जी बनाई जाती है बल्कि इसको अचार के तौर पर भी प्रयोग किया जाता है। इसके औषधीय चमत्कारिक गुण होते हैं। यह घुटनों के दर्द को कम करने एवं सर्दी जुकाम के समय काढ़ा बनाकर भी प्रयोग में लाया जाता है। इसकी पत्तियों का रस सियाटिका, गठिया एवं पक्षघात में लाभ पहुॅचाती हैं। विटमिन-ए प्रचुर मात्रा में होने के कारण आखों की रोशनी को बढाने में फायदेमंद होता है। रक्त शोधक होने के कारण पिंपल्स की समस्या को जड से समाप्त करता है। रक्तचाप को नियंत्रित करता है। एंटी बैक्टीरियल तत्व होने के साथ ही अस्थमा को भी भगाता है।

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