समान नागरिक संहिता को राज्य के नीति निर्देशक सिद्धांत के रूप में है किया स्वीकार

अलीगढ़ मीडिया डॉट कॉम,अलीगढ. 31 जुलाईः आसाम के अजमल लाॅ कालिज द्वारा समान नागरिक संहिता पर आयोजित राष्ट्रीय वेबिनार को संबोधित करते हुए ए0एम0यू0 के विधि संकाय के अधिष्ठाता एवं कार्यक्रम के मुख्यवक्ता प्रोफेसर शकील अहमद समदानी ने कहा कि हमारे संविधान में अनुच्छेद 44 में समान नागरिक संहिता को राज्य के नीति निर्देशक सिद्धांत के रूप में स्वीकार किया गया है। यह प्रावधान एक ऐसा प्रावधान है जिसे कानून विद्वों के अलावा सबसे ज्यादा राजनीतिज्ञों ने अपने स्वार्थ के लिए इस्तेमाल किया है। क्यों कि अधिकांश लोग इस प्रावधान के बारे में जानकारी नहीं रखते इस लिए आमतौर पर गलत जानकारी मीडिया में आती है।

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प्रोफेसर समदानी ने आगे कहा कि यदि अनुच्छेद 44 का टकराव अनुच्छेद 25 अर्थात धार्मिक स्वतंत्रता से होता है तो संविधान के अनुसार धार्मिक स्वतंत्रता को वर्चस्व दिया जाएगा क्योंकि धार्मिक स्वतंत्रता मूलभूत अधिकारों के तहत आती है जबकि समान नागरिक संहिता राज्य के नीति निर्धारक विधान्तों में आती है। उन्होंने अनुच्छेद 44 के लाभ और हानि दोनों का विस्तारपूर्वक वर्णन करते हुए कहा कि अभी तक किसी ने भी समान नागरिक संविधान का कोई माॅडल प्रस्तुत नहीं किया है। इसमें सबसे पहले सभी समुदायों के धार्मिक लोगों को विश्वास में लिए जाना चाहिए और आम सहमति के प्रयास किये जाने चाहिए। उन्होंने संविधान सभा में जो बहस हुई उसकी भी विस्तार से चर्चा की।प्रोफेसर समदानी ने कहा कि भारत का संविधान विश्व के संविधानों में से एक है जिसमें समाज के सभी वर्गो का पूरा ख्याल रखा गया है।

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