क्षय रोग के प्रति व्याप्त सामाजिक भ्रांतियों को दूर कर इलाज करायें: डॉ0 भास्कर

अलीगढ मीडिया डॉट कॉम,अलीगढ: केन्द्र एवं प्रदेश सरकार द्वारा वर्ष 2025 तक देश एवं प्रदेश को टीबी रोग से मुक्त करने का बीड़ा उठाया गया है। केन्द्र सरकार द्वारा टीबी रोग से पीड़ित व्यक्तियों के लिये निःशुल्क ईलाज, पोषण भत्ता से लेकर देख-रेख करने वालों को भी धनराशि प्रदान की जा रही है। उक्त जानकारी देते हुए मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डा0 रामकिशन एवं जिला क्षय रोग अधिकारी अनुपम भास्कर ने बताया कि जनपद में टीबी उन्मूलन कार्यक्रम के तहत 17 फरवरी से 29 फरवरी तक एक्टिव केस फाइंडिंग अभियान विशेष चिकित्सकों की निगरानी में संचालित किया जा रहा है। टीबी रोग जड़ से समाप्त हो, इसके लिये केन्द्र एवं प्रदेश सरकार द्वारा पूर्व में ही ठोस रणनीती तैयार कर ली गयी है, जिसके तहत 29 फरवरी तक घर-घर जाकर टीबी के मरीजों को खोजा जा रहा है। इस खोजी अभियान में टीबी से सम्भावित मरीजों के बलगम के दो नमूने लेकर नजदीक के बलगम जांच केन्द्र पर जांच कराई जाती है और फिर टीबी की पुष्टि होने पर रोगी को दवा उपलब्ध कराई जा रही हैं। डा0 रामकिशन ने अभियान के उद््देश्य के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि 17 फरवरी से 29 फरवरी तक संचालित एक्टिव केस फाइंडिंग अभियान में टीबी के मरीजों की जांच एवं पहचान कर 48 घण्टे के अन्दर चिन्हित मरीज का उपचार शुरू करना है।

जिला क्षय रोग अधिकारी ने मीडिया के माध्यम से जनसहयोग की अपेक्षा करते हुए कहा कि जन जागरूकता की कमी के अभाव में टीबी रोग को लेकर हमारे समाज में अभी भी बहुत सारी भ्रांतियां व्याप्त हैं। हम सभी का दायित्व है कि इन भ्रांतियां को दूर कर एक स्वस्थ समाज की स्थापना की जाए। टीबी रोग से ग्रसित व्यक्ति अपने 06 फीट के दायरे में छींक, खांस-खंखार कर टीबी के वैक्टीरिया को फैलाता है। आंकड़े गवाह हैं कि एक टीबी संक्रमित व्यक्ति एक वर्ष में अपने आस-पास के 15 स्वस्थ व्यक्तियों को संक्रमित कर देता है। एक्टिव केस फाइंडिंग अभियान के तहत जनपद में घर-घर जाकर ऐसे लोग जिन्हें 15 दिनों से लगातार खांसी आ रही है, 02 हफ्ते से ज्यादा बुखार आ रहा है, बलगम में खून आ रहा है, 06 माह में कभी भी सीने में दर्द या चुभन की शिकायत है, घर में किसी को टीबी हुई है, लगातार वजन कम हो रहा है आदि लक्षणों के व्यक्तियों को चिन्हित कर उनकी जांच कराई जा रही है। टीबी के मरीजों के लिये सभी निदान और उपचार सेवाएं सरकारी स्वास्थ्य केन्द्रों पर निःशुल्क उपलब्ध हैं। जनपद के विभिन्न क्षेत्रों में 211 टीम, 43 सुपरवाइजर, 19 चिकित्साधिकारी लगाये गये हैं। फील्ड टीम में तीन सदस्य शामिल हैं जो प्रत्येक दिन 50 घर के हिसाब से 10 दिन के राउण्ड में 50 घरों का भ्रमण करेंगे, प्रत्येक 05 टीम पर 01 सुपरवाइजर एवं 03 सुपरवाइजर की मानीटरिंग हेतु 01 चिकित्साधिकारी की तैनाती की गयी है। खोजी दल के द्वारा टीबी रोगी सम्भावित क्षेत्रों में सभी भ्रमण किये गये घरों को सफेद व रंगीन चॉक से चिन्हित किया जा रहा है।

डॉ0 भास्कर ने आंकडों के माध्यम से टीबी की बीमारी को उजागर करते हुए बताया कि विश्व स्तर पर 100 टीबी ग्रसित मरीजों में 27 मरीज भारत में मौजूद हैं। दूसरे देशों की अपेक्षा हमारे देश में समुचित जानकारी के अभाव में एमडीआर रेट सबसे ज्यादा है। आज के समय में टीबी रोग पूर्णतः ठीक होने वाला रोग है, बशर्ते चिकित्सीय परामर्श के उपरान्त टीबी कोर्स पूरा किया जाए। उन्होंने बताया कि अब तक 652 चिन्हित व्यक्तियों के बलगम की जांच कराई गयी है जिसमें 19 व्यक्ति टीबी रोग से ग्रसित पाए गये, 02 मरीज क्लीनीकली घोषित किये गये हैं, इस प्रकार से अभियान में अब तक 21 मरीजों का इलाज शुरू किया गया है।

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