जामिया उर्दू अलीगढ़ की सर्वथा महत्वपूर्ण उपलब्धि उर्दू भाषा को रोज़गार से जोड़ना है

अलीगढ़ मीडिया न्यूज़,अलीगढ: जामिया उर्दू अलीगढ़ ने अपना 80वाँ स्थापना दिवस मनाया। यह कोई मामूली समारोह नहीं है। इसमे कोई शक नहीं है कि जामिया उर्दू अलीगढ़ ने देश के स्वात्रन्ता आन्दोलन और राष्ट्र के नव-निर्माण मे महत्वपूर्ण और एतिहासिक भूमिका अदा की है। उक्त कथन जामिया उर्दू अलीगढ़ द्वारा अपने 80वें स्थापना दिवस समारोह के अवसर पर आयोजित एक राष्ट्रीय सेमीनार उर्दू भाषा को रोज़गार से जोड़ने को सम्बोधित करते हुए मुख्य अतिथि और यूजीसी के पूर्व सदस्य प्रोफेसर एम0एम0 अन्सारी ने कहे। उन्होंने कहा कि आज जामिया उर्दू अलीगढ़ देश का एक सर्वोच्च शोक्षिक संस्थान है अब भारत सरकार को संसद के कानून के द्वारा जामिया उर्दू अलीगढ़ को राष्ट्रीय महत्व का संस्थान घोषित करना चाहिए।
मुख्य उदबोधन प्रस्तुत करते हुए मौलाना आज़ाद नेशनल उर्दू यूनीवर्सिटी (मानू) के कुलाधिपति फिरोज़ बख्त अहमद ने कहा कि जामिया उर्दू अलीगढ़ का योगदान भूलाया नहीं जा सकता है। जामिया उर्दू अलीगढ़ का सबसे महत्वपूर्ण योगदान यह है कि उसने उर्दू भाषा को रोज़गार से जोड़ने का सकारात्मक कार्य किया है। जिसके फलस्वरूप जामिया उर्दू अलीगढ़ के छात्रों को सम्मानजनक रोज़गार के अवसर मिलेगें।मानद अतिथि और राष्ट्रीय रोजनामा सहारा के ग्रुप एडिटर डाॅ0 मुशरर्फ आलम जौकी ने कहा कि जामिया उर्दू अलीगढ़ और मदरसो के छात्रों को मीडिया तथा पत्रकारिता में आना चाहिए क्योंकि वर्तमान समय में मीडिया समाज तथा देश मे महत्पूर्ण भूमिका अदा कर रहा है।
मानद अतिथि और एन0आई0ओ0एस0 के पूर्व निदेशक (शैक्षिक) डाॅ0 कुलदीप अग्रवाल ने कहा कि चूकि जामिया उर्दू अलीगढ़ अपने छात्रों को एन0सी0आर0टी0 की पाठ्य पुस्तको के माध्यम से शिक्षा दे रहा है इसलिए वे किसी भी प्रतियोगिता में सफलता प्राप्त कर सकते है। उन्होंने कहा कि जामिया उर्दू अलीगढ़ के पाठ्यक्रमों को एन0आई0ओ0एस0 की समकक्षता प्रदान की जानी चाहिए जो छात्रों के लिए उच्च शिक्षा के दरवाज़े खोलेगी।
कार्यक्रम के संयोजक एवं जामिया उर्दू अलीगढ़ के निदेशक डाॅ0 जसीम मोहम्मद ने कहा कि जामिया उर्दू अलीगढ़ सकारात्मक रूप से उर्दू भाषा को रोज़गार से जोड़ने के लिए कटिबद्ध है।एएमयू के पूर्व कंट्रोलर एवं एएमयू कोर्ट सदस्य प्रो हुमायूँ मुराद ने कहा कि जामिया उर्दू अलीगढ़ देश और समाज की लगातार सेवा कर रहा है। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार भारत सरकार ने जामिया उर्दू अलीगढ़ के पाठ्यक्रम को रोज़गार के लिए मान्यता दी है उसी प्रकार राज्यों के बोर्ड से भी समकक्षता प्रदान की जानी चाहिए।
इससे पूर्व अतिथियों का स्वागत करते हुए नोबल एजुकेशन फाउन्डेशन के निदेशक फहद अली खान ने कहा कि आज हम वैश्वीकरण के युग मे जी रहे हैं जिसमें प्रतियोगिता के जरिए ही विकास हो सकता है अतः जामिया उर्दू अलीगढ़ को इस तथ्य को ध्यान मे रखकर छात्र-छात्राओं के व्यक्तित्व को विकसित करना होगा। उन्होंने कहा कि हम केवल उर्दू भाषा को रोज़गार से ही नहीं जोड़ रहे है बल्कि यह भी कोशिश कर रहे है कि मदरसों के छात्रों को व्यवसायिक और कम्प्युटर पाठ्यक्रमों में प्रवेश दिया जाए।रजिस्ट्रार शामून रज़ा नक्वी ने जामिया उर्दू अलीगढ़ की वार्षिक रिर्पोट प्रस्तुत करते हुए कहा कि जामिया उर्दू अलीगढ़ ने लगातार शिक्षा के माध्यम से देश के उत्थान में योगदान दिया है और हम इस के लिए कटिबद्ध है।अध्यक्षता करते हुए प्रोफेसर रज़ाउल्लाह खान ने कहा कि जामिया उर्दू अलीगढ़ ने न केवल उर्दू भाषा का सशक्तिकरण किया है बल्कि देश के नव-निर्माण में भी महत्वपूर्ण भूमिका अदा की है। उन्होंने कहा कि शिक्षाविदों को जामिया उर्दू अलीगढ़ के पाठ्यक्रमों को विकसित करने मे मदद करनी चाहिए।
इस अवसर पे डॉक्टर ख़लील चैधरी, वीसी मुसाईद किदवई, डॉक्टर आफ़ताब आलम नजमी ने भी अपने विचार रखे। सेमीनार का संचालन डॉक्टर फुरकान सम्भली ने किया। अफ़नान अली खान ने धन्यवाद प्रस्तुत किया।स्थापना दिवस के इस अवसर पर जामिया उर्दू की मुख्य पत्र ‘अदीब’ पत्रिका, काॅफी टेबल ‘एक सफर उर्दू के लिए’ तथा फरहत अली खान द्वारा सम्पादित पुस्तक ‘मज़ामिने सर सय्यद’ का विमोचन भी किया गया। इस अवसर पे डॉक्टर वर्षा रानी, हमैरा, नसरीन, नेसार, नासिर, इरफ़ान, फ़रीद खान, इक़बाल, महमूद, नदीम ज़ैदी, हनीफ़ खान मुखरूप से क्रायकर्म में सहयोग किया।

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