उत्तर भारत के इस इस विश्वविद्यालय में ही सिर्फ जिन्दा है मलयालम भाषा

अलीगढ़ मीडिया ब्यूरो, अलीगढ़ 16 मईः हाल ही में केरल से मलयालम भाषा में प्रकाशित ‘‘अलीगढ़ मलयालम’’ पुस्तक पर अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के समाजिक विज्ञान के सभागार में एक संगोष्ठी का आयोजन किया जिसका उद्घाटन मद्रास विश्वविद्यालय में मलयालम विभाग के पूर्व अध्ययक्ष एवं मलयालम फिल्म क्षेत्र के विख्यात पटकथाकार प्रो. सीजी राजेन्द्र बाबू द्वारा किया गया। उन्होंने कहा ‘‘अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय जैसे देश के प्रतिष्ठित विश्वविद्यालय में मलयालम पढ़ाई जाती है यह भाषा के लिए गोरव की बात है। उत्तर भारत में सिर्फ इस विश्वविद्यालय में ही अब मलयालम भाषा जीवित है। पॉच दशकों से अधिक का इतिहास को रेखांकित करने का यह प्रयास सराहनीय है। मलयालम अध्ययन के साथ विश्वविद्यालय के बारे में भी इस पुस्तक से ज्ञान प्राप्त हुआ है। अन्य विभागों को इस तरह की पुस्तक उपलब्ध कराने में यह प्रेरणा देते हैं। प्रो. राजेन्द्र बाबू को भाषा विज्ञान के अध्यक्ष प्रो. इम्तियाज हसनैन ने स्मृति चिन्ह प्रदान किया और मलयालम भाषा के बारे में अपना विचार व्यक्त किया। प्रो. राजेन्द्र बाबू ने पुस्तक का संपादक एवं अमुवि तीस साल से मलयालम भाषा के अध्यापक प्रो. टीएन सतीशन को सम्मानित किया।
प्रो. टीएन सतीशन ने 1961 से लेकर अमुवि में मलयालम अध्ययन का इतिहास पर विस्तृत से प्रकाश डाला। पद्मश्री डॉ. वेल्लायनी अर्जुनन, डॉ. केएन कोशी जैसे अध्यापकों का योगदान को स्मरण किया। प्रो. पीएम नोशाद अली, डॉ. मुनीर, डॉ. अब्दुल असीर रंजीत, रफसल बाबू ने चर्चा में भाग लिया। सफरूल हक ने कार्यक्रम का संचालन किया।

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