उर्दू साहित्य के आलोचक और विद्वान प्रोफेसर ज़फर अहमद सिद्दकी का बीमारी के बाद निधन

अलीगढ मीडिया डॉट कॉम, अलीगढ: अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के उर्दू विभाग से हाल ही में सेवानिवृत वरिष्ठ शिक्षक एवं उर्दू साहित्य के आलोचक और विद्वान प्रोफेसर ज़फर अहमद सिद्दकी का आज संक्षिप्त बीमारी के बाद निधन हो गया। उनके निधन पर शोक व्यक्त करते हुए अमुवि कुलपति, प्रोफेसर तारिक मंसूर ने कहा कि प्रोफेसर सिद्दीकी उर्दू और अरबी के बड़े विद्वान तथा आलोचक थे और उन्होंने उर्दू में साहित्यिक ज्ञान के विभिन्न आयामों पर गहरी नज़र के साथ अनुसंधान कौशल और क्लासीकल उर्दू साहित्य की विरासत को आगे बढ़ाया। उन्होंने नौकरी के साथ-साथ साहित्यिक और सांस्कृतिक भूमिकाओं के परिदृश्य में अध्ययन के कई संदर्भों का प्रदर्शन किया।

कला संकाय की पूर्व डीन तथा फारसी विभाग की पूर्व अध्यक्ष प्रोफेसर आजरमी दुख्त सफवी ने कहा कि प्रोफेसर सिद्दकी के साहित्यिक प्रभाव के एक पहलू को दूसरे पर प्राथमिकता देना कठिन है, परन्तु उन्होंने अपने विपुल करियर में इस तथ्य को प्रमाणित किया कि वह एक साहित्यिक बहुआयामी व्यक्तित्व के मालिक थे और उन को उर्दू के अतिरिक्त अरबी तथा फारसी पर भी दक्षता प्राप्त थी।

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मास कम्यूनिकेशन विभाग के अध्यक्ष प्रोफेसर शाफे किदवाई ने कहा कि प्रोफेसर जफर अहमद सिद्दीकी ने उर्दू के क्लासिकी तथा फारसी के महत्वपूर्ण साहित्य पर खूब लिखा तथा शिबली, मोमिन, गालिब तथा उर्दू कसीदा पर उनका काम उनकी विशेष विद्वत्ता का परिचायक है। उन्होंने कहा कि अपने चालीस वर्षीय शिक्षण काल में अनगिनत छात्रों ने उनसे लाभ उठाया तथा उनके निधन से उर्दू अध्ययन के क्षेत्र में एक रिक्ति उत्पन्न हो गई है जिसको भर पाना असंभव है। उर्दू विभाग के अध्यक्ष प्रोफेसर मोहम्मद अली जौहर ने उनके निधन पर शोक व्यक्त करते हुए कहा कि प्रोफेसर सिद्दीकी के बिना उर्दू साहित्य में शोध एवं आलोचना की परम्परा कमजोर पड़ सकती है। उर्दू विभाग के प्रोफेसर सैयद सिराजुद्दीन अजमली ने कहा कि अरबी तथा उर्दू साहित्य के छात्र के रूप में प्रोफेसर जफर के प्रशिक्षण ने उन्हें दोनों भाषाओं की सर्वश्रेष्ठ विद्वत्ता से परिचित कराया।

कला संकाय के पूर्व डीन प्रोफेसर काजी अफजाल हुसैन ने कहा कि प्रोफेसर जफर ने उर्दू में व्यक्तित्व वादी मूल्यांकन के बजाय आलोचनात्मक शोध पर जोर दिया तथा उनकी विद्वत्ता का आधार शोध के कठोर मापदंडों पर केन्द्रित था। अरबी विभाग के प्रोफेसर अनवर मसूद अल्वी ने कहा कि प्रोफेसर जफर को देश-विदेश में उनके लेखों तथा साहित्यिक योगदान के लिए याद किया जाएगा। प्रो जफर ने गालिब तथा मोमिन की रचनाओं का आलोचनात्मक विश्लेषण प्रस्तुत किया तथा उन पर शोधात्मक टिप्पणियां लिखीं। उन्होंने अपने शैक्षणिक काल में 17 से अधिक पुस्तकें प्रकाशित कीं तथा 150 से अधिक शोध पत्र का योगदान दिया।प्रो जफर ने 1997 में एएमयू ज्वाइन करने से पहले 18 साल तक बनारस हिंदू विश्वविद्यालय में शिक्षण कार्य किया। उन्होंने बीएचयू से उर्दू में एमए तथा पीएचडी और अरबी में बीए के साथ ही एएमयू से अरबी में एमए की डिग्रि प्राप्त की थी।

 

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