#अलीगढ आज VVIP का आगमन चौराहे पर 50 मीटर तक नोपार्किंग का नियम, जानिए.. ट्रेफिक रुट

अलीगढ

अलीगढ मीडिया डॉट कॉम, अलीगढ़: शहर के चौक-चौराहों को व्यवस्थित कर यातायात को नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने कार्ययोजना तो तमाम बना रखी हैं। लेकिन, खुद ही पालन नहीं करवा रही है। नियमों के मुताबिक, चौराहे के 50 मीटर के दायरे में कोई वाहन खड़ा नहीं हो सकता है, मगर यहां हर कदम पर अव्यवस्था है। प्रमुख चौराहों के आसपास ढकेल व दुकानों का कब्जा है। लोग यहां धड़ल्ले से वाहन खड़ा करते हैं। टेंपो व ई-रिक्शा वालों का जमावड़ा लगा रहता है। दूसरी तरफ पुलिस सिर्फ चालान काटने में मस्त रहती है।
…ये हैं प्रमुख चौराहे
शहर के प्रमुख चौराहों में शामिल क्वार्सी चौराहा, गांधीपार्क, रसलगंज, दुबे का पड़ाव, सासनीगेट, सारसौल व एटा चुंगी चौराहे पर अमूमन जाम लगा रहता है। इसकी सबसे बड़ी वजह चौराहे के इर्द-गिर्द अतिक्रमण है। ढकेल व दुकानों ने चौराहे पर ही अपनी सीमा से बाहर कब्जा कर रखा है, जिसके चलते लोग अपने वाहनों को यहां खड़ा कर देते हैं। पिछले दिनों ट्रैफिक पुलिस ने ऐसे वाहन चालकों को सबक सिखाने के लिए योजना बनाई, जिसके तहत कहा गया कि चौराहे के 50 मीटर के दायरे में वाहनों को खड़ा नहीं होने दिया जाएगा। फल, सब्जी की ढकेल भी इस दायरे के बाहर ही लगेंगी। इसे लेकर कुछ दिन पुलिस ने सख्ती दिखाई। फिर नतीजा ढाक के तीन पात है। सुबह आठ से 10 बजे तक जिस समय लोग कामकाज के लिए निकलते हैं, उसी वक्त आटो-टेंपो, ई-रिक्शा वाले चौराहों पर खड़े होकर यातायात व्यवस्था को ध्वस्त कर देते हैं। जहां पुलिस चेङ्क्षकग करती है, उसके बगल में ही ढकेल लगती हैं। ये पुलिस को नजर नहीं आती हैैं। कुछ चालक चौराहे के पास ही जगह देखकर वाहनों को खड़ा कर देते हैं, जो जाम का कारण बनते हैं।

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…नहीं बन रहा तालमेल
यातायात व्यवस्था को सुधारने के लिए पार्किंग को दुरुस्त करना जरूरी है। इसे लेकर पुलिस व नगर निगम के बीच ही तालमेल नहीं बन पा रहा है। नगर निगम का तर्क है कि पुलिस वाहनों को काबू नहीं कर पा रही है। पुलिस कहती है कि नगर निगम ने न तो वेंङ्क्षडग जोन उपलब्ध कराए न पार्किंग की जगह। ऐसे में कैसे पार्किंग व्यवस्था सुचारू बनेगी?

…फोर्स मिली, सख्ती नहीं आई
अक्सर फोर्स की कमी होने की बात कहकर पुलिस विभाग पल्ला झाड़ लेता है। पिछले दिनों करीब सौ पुलिसकर्मी यातायात विभाग को मिले हैं। फिर भी चालान काटने के अलावा चौराहों को साफ-सुथरा बनाने के क्रम में कोई सख्ती नहीं दिखाई जा रही है। अधिवक्ताअनूप कौशिक का कहना है नगर निगम, विकास प्राधिकरण, यातायात पुलिस पार्किंग को लेकर कागजों में नियम तो बनाते हैं, मगर पालन नहीं होता। चौराहों पर ढकेल, आटो-रिक्शा सड़कों को घेरकर यातायात को बाधित कर रहे हैं। इस तरफ ध्यान देने की जरूरत है।

सतीश गौड़ का कहना है क्वार्सी चौराहे का बुरा हाल है। यहां ढकेलों व दुकानों के अतिक्रमण की वजह से लोग आड़े-तिरछे वाहन खड़ा कर देते हैं, जो जाम का कारण बनते हैं। क्वार्सी ही नहीं, शहर में हर चौराहे पर 50 मीटर का दायरा वाहनों के कब्जे से मुक्त होना चाहिए। यश प्रताप सिंह के मुताविक शहर के एंट्री प्वाइंट सूतमिल चुंगी पर जब पुलिस तैनात रहती है, तब तक व्यवस्था ठीक रहती है। पुलिस के हटते ही सड़क किनारे वाहन खड़े होने लग जाते हैं। पुलिस चालान पर जितना ध्यान दे रही है, यहां भी उतनी ही सख्ती दिखानी चाहिए। नितिन वर्मा कहते है, शहर में कहीं भी पार्किंग की व्यवस्था नहीं है। चौराहों का हाल बुरा है। यहां तैनात पुलिसकर्मी सिर्फ चालान काटने में व्यस्त रहते हैं। जबकि उनकी ड्यूटी चौराहों को यातायात मुक्त बनाने की भी है। इसके लिए विशेष अभियान चलाया जाना चाहिए। जबकि एसपी ट्रैफिक सतीश चंद्र ने बताया की चौराहे के 50 मीटर के दायरे में वाहनों को बेतरतीब खड़े होने नहीं दिया जाएगा। आपरेशन नकेल के तहत कार्रवाई की जाएगी। ऐसे वाहनों को ट्रैफिक लाइन में खड़ा करवाया जाएगा। इसके अलावा ढकेल आदि पर भी कार्रवाई तय की जाएगी।

 

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