नवाब इब्ने सईद खान एएमयू की परंपराओं और मूल्यों के प्रतिनिधि थे: कुलपति

अलीगढ़ मीडिया डॉट कॉम, अलीगढ: अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के प्रो-चांसलर और एएमयू के सबसे वृद्ध पूर्व छात्र नवाब इब्ने सईद खान आफ छतारी का मंगलवार शाम अलीगढ़ में उनके आवास पर निधन हो गया। वह 98 वर्ष के थे। छतारी मस्जिद, मैरिस रोड, अलीगढ़ में उनकी नमाजे जनाजा अदा की गई और बुलंदशहर में उनके गृहनगर छतारी में दफनाया गया। एएमयू के कुलपति प्रो तारिक मंसूर ने शोकाकुल परिवार और एएमयू समुदाय के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए कहा नवाब इब्ने सईद खान एएमयू की परंपराओं और मूल्यों के प्रतिनिधि थे। समाज के सभी वर्गों के लिए शैक्षिक और आर्थिक अवसर पैदा करने के लिए उन्हें सदैव याद किया जाएगा। समाज के लिए उनकी अमूल्य सेवाओं को और बेहतर भविष्य बनाने का उनका जुनून कभी भुलाया नहीं जायेगा।

कुलपति ने कहा, मैं नवाब साहिब के परिवार और एएमयू समुदाय के प्रति संवेदना व्यक्त करता हू और शोक संतप्त परिवार के लिए धैर्य और शांति की प्रार्थना करता हूं। वह एक निस्वार्थ व्यक्ति और एएमयू के एक सच्चे प्रेमी और मार्गदर्शक थे, समाज के हर वर्ग के लोगों में उनका आदर और सम्मान था। उनके निधन ने एक गहरा शून्य छोड़ दिया है, जिससे पूरा एएमयू समुदाय दुखी है।” कुलपति प्रोफेसर तारिक मंसूर और रजिस्ट्रार श्री अब्दुल हमीद आईपीएस उनके आवास पर भी गए और उनके शरीर पर पुष्पांजलि अर्पित की।

नवाब इब्न सईद खान का जीवन एएमयू को समर्पित था। वह एएमयू कोर्ट और कार्यकारी परिषद के सदस्य तथा एएमयू के मानद कोषाध्यक्ष भी रहे। 2018 में उन्हें लगातार दूसरी बार प्रो चांसलर चुना गया था। वह एक उदार उपकारी परिवार से सम्बन्ध रखते थे। उनके परदादा नवाब लुत्फ अली खान, मुहम्मदन एंग्लो-ओरिएंटल (एमएओ) कॉलेज फाउंडेशन कमेटी के संयोजक थे और 8 जनवरी, 1877 को सर सैयद अहमद खान के साथ उस समारोह में उपस्थित थे, जिसमें भारत के तत्कालीन वायसराय लॉर्ड लिटन ने एमएओ कॉलेज की आधारशिला रखी थी। नवाब लुत्फ अली खान ने सोने, चांदी और तांबे के सिक्के भी दान किए थे, जिन्हें शिलान्यास स्मारक के रूप में कैप्सूल में भूमिगत रखा गया था। एएमयू में छतारी टेनिस पवेलियन का नाम नवाब इब्ने सईद खान के पिता नवाब अहमद सईद खान के नाम पर रखा गया है। उनके परिवार में दो बेटे श्री जावेद सईद और श्री हुमायूं सईद, एक बेटी और पोते-पोतियां हैं। इस दौरान कोविड प्रोटोकोल के साथ आयोजित एक बैठक में कुलपति प्रोफेसर तारिक मंसूर, रजिस्ट्रार श्री अब्दुल हमीद आईपीएस और विश्वविद्यालय के अन्य अधिकारियों ने नवाब इब्ने सईद खान के निधन पर दुख व्यक्त किया। विश्वविद्यालय ने उनके शोक में बुधवार को आधे दिन की छुट्टी की भी घोषणा की।

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…म्यूकर्मिकोसिस पर पैनल चर्चा
अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के डा० ज़ियाउद्दीन अहमद डेंटल कालेज के ओरल एंड मैक्सिलोफेशियल सर्जरी विभाग तथा एसोसिएशन ऑफ ओरल एंड मैक्सिलोफेशियल सर्जन ऑफ इंडिया, यूपी चैप्टर के संयुक्त तत्वाधान में ”म्यूकर्मिकोसिसः अ पोस्ट कोविड सिक्वेला” विषय पर पर एक आनलाइन अन्तर्राष्ट्रीय पैनल चर्चा का आयोजन किया गया।

अपने अध्यक्षीय भाषण में अमुवि कुलपति प्रोफेसर तारिक मंसूर ने कहा कि यह चिकित्सा बिरादरी के लिए स्टेरॉयड नए नहीं हैं, इनका उपयोग कई वर्षों से आथ््र्रााइटिस के इलाज के लिए किया जाता रहा है, लेकिन हमने कभी म्यूकोर्मिकोसिस का मामला नहीं देखा। ऐसा अधिक उपचार वाले अथवा स्व-उपचार वाले कोविड रोगियों या अयोग्य कर्मचारियों द्वारा कई दवाओं का उपयोग करने वाले रोगियों या थ्रोमबोसिस के कारण हो सकता है।

प्रोफेसर मंसूर ने कहा कि ब्लैक फंगस के सटीक कारणों के लिए और अधिक शोध और अध्ययन की आवश्यकता है। एएमयू का जवाहरलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज भी म्यूकर्मिकोसिस का केंद्र है और हम इस प्रकार के कई मामलों का इलाज कर रहे हैं। जेएनएमसी के डॉक्टर आगे आने वाली चुनौतियों के लिए तैयार हैं और हम म्यूकर्मिकोसिस प्रबंधन के लिए प्राथमिक दवा एम्फोटेरिसिन बी अधिक मात्रा में खरीदने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने ब्लैक फंगस के प्रबंधन के लिए मानक संचालन प्रक्रियाओं की आवश्यकता पर भी बल दिया। पैनल चर्चा में दुनिया भर के कुशल विशेषज्ञों ने म्यूकर्मिकोसिस या ब्लैक फंगस की संभावित गंभीर स्थिति, धुंधली या दोहरी दृष्टि, सीने में दर्द और सांस लेने में कठिनाई और इसके उपचार के तरीकों पर अपने विचार व्यक्त किये।

प्रोफेसर मोहम्मद शाहिद (माईक्रोबायोलोजी विभाग, अरेबियन गल्फ यूनिवर्सिटी, बहरीन ) ने ब्लैक फंगस के मार्गों और इसके नैदानिक प्रकारों को चित्रित किया। उन्होंने सूक्ष्मजीवविज्ञानी और हिस्टोपैथोलॉजिकल प्रयोगशाला परीक्षणों पर भी विस्तार से चर्चा की।

प्रोफेसर मोहम्मद शमीम (पलमोनरी चिकित्सा विभाग, जेएनएमसी) ने म्यूकर्मिकोसिस के मामलों में अचानक वृद्धि पर चर्चा करते हुए कहा कि लंबे समय तक स्टेरॉयड लेने वाले तथा मधुमेह से पीड़ित रोगी और ह्यूमिडिफायर में दूषित पानी के माध्यम से ऑक्सीजन के बढ़ते प्रवाह वाले रोगी अधिक ख़तरे में हैं। प्रोफेसर विजय कुमार गिरहे (ओरल एंड मैक्सिलोफेशियल सर्जरी विभाग, ज़ियाउद्दीन अहमद डेंटल कालेज) ने भागीदारी के आधार पर विभिन्न प्रकार के म्यूकर्मिकोसिस वाले रोगियों के नैदानिक लक्षणों के बारे में बात की।

प्रोफेसर आदित्य मिश्रा (रेडियोडायग्नोसिस विभाग, रामा मेडिकल कॉलेज और अस्पताल, कानपुर) ने कंट्रास्ट सीटी के स्तर को निर्धारित करने के लिए परानासल साइनस और बेस स्कल के कंट्रास्ट एमआरआई के उपयोग की सलाह दी। डा० आशीष चंद्रा (आरएमएल, लखनऊ) ने नेजल एंडोस्कोपी के बारे में बताया। प्रोफेसर सैयद जिया-उर-रहमान (जेएन मेडिकल कालेज) ने ऐंटिफंगल दवाओं के उपयोग और उपचार पर चर्चा की, जबकि प्रोफेसर हिमांशु रेड्डी (केजीएमयू, लखनऊ) ने एम्फोटेरिसिन बी के औषधीय पहलुओं पर चर्चा की।

डा० आशीष अग्रवाल (ईएनटी सर्जन, आरएमएल, लखनऊ) और प्रोफेसर मुहम्मद कैफ (आरएमएल, लखनऊ) ने म्यूकर्मिकोसिस के विभिन्न पहलुओं पर अपने विचार साझा किए।

प्रोफेसर संदीप साहू (एसजीपीजीआई, लखनऊ) ने पोस्ट-कोविड म्यूकर्मिकोसिस में संभावित जटिलताओं पर प्रकाश डाला, जबकि प्रोफेसर नरेश के शर्मा (बनारस हिंदू विश्वविद्यालय) ने पोस्ट-कोविड ब्लैक फंगस के बेहतर उपचार के लिए मानकों पर बात की। इस के साथ ही ईएनटी सर्जन, मैक्सिलोफेशियल सर्जन, नेत्र सर्जन, चिकित्सा विशेषज्ञ, छाती विशेषज्ञ और न्यूरोसर्जन को एक टीम के रूप में काम करने का आग्रह किया गया।

प्रोफेसर आर.के. तिवारी (प्राचार्य, डा० जेडए डेंटल कॉलेज) ने स्वागत भाषण दिया, जबकि प्रोफेसर गौरव सिंह (अध्यक्ष, एसोसिएशन ऑफ ओरल एंड मैक्सिलोफेशियल सर्जन ऑफ इंडिया, यूपी चैप्टर) ने प्रतिभागियों का स्वागत किया। प्रोफेसर जी.एस. हाशमी (सचिव, एसोसिएशन ऑफ ओरल एंड मैक्सिलोफेशियल सर्जन ऑफ इंडिया, यूपी चैप्टर) ने आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम का संचालन डॉ. तबीश-उर-रहमान ने किया।

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…विश्व तंबाकू निषेध दिवस
विश्व तंबाकू निषेध दिवस के अवसर पर डा. जेड ए डेंटल कॉलेज, अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय में ओरल सबम्यूकस फाइब्रोसिस (ओएसएफ) विषय पर एक वेबिनार का आयोजन किया गया। अतिथि वक्ता प्रो. अभय एन. दत्तारकर (ओरल एण्ड मैक्सिलोफेशियल सर्जरी विभाग, गवर्नमेंट डेंटल कॉलेज, नागपुर) ने कहा कि विश्व तंबाकू निषेध दिवस वास्तव में धूम्रपान के हानिकारक प्रभावों के बारे में जागरूकता बढ़ाने और मौखिक स्वास्थ्य पर जोर देने के लिए आयोजित किया जाता है।

उन्होंने कहा कि सुपारी, गुटखा और तंबाकू चबाने से यह रोग होता है। जैसे-जैसे बीमारी बढ़ती है, व्यक्ति को अपना मुंह खोलने, अपनी जीभ घुमाने और भोजन निगलने में गंभीर कठिनाई होती है और फिर इन क्षमताओं को वह खो देता है। प्रो. दातारकर ने इसके उपचार के आधुनिक तरीकों पर प्रकाश डाला और कहा कि यह रोग विशेष रूप से भारत और दक्षिण पूर्व एशियाई देशों में अधिक पाया जाता है। उन्होंने कहा कि चूंकि इस बीमारी से मरने वालों की संख्या अधिक है, इसलिए इलाज के आधुनिक तरीकों पर शोध और जागरूकता की जरूरत है।

प्रतिभागियों ने धूम्रपान न करने और दूसरों को इसके प्रति सजग करने की शपथ ली।इस अवसर पर स्लोगन लेखन और पोस्टर मेकिंग प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। इसके अतिरिक्त धूम्रपान से दूर रहने का संदेश देने के लिए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर एक छोटा वीडियो भी प्रसारित किया गया।अंत में ओरल एंड मैक्सिलोफेशियल सर्जरी विभाग के अध्यक्ष प्रो. एस.एस. अहमद ने आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम का संचालन डा. नेहा अग्रवाल और डा. मुहम्मद दानिश ने किया।कार्यक्रम का आयोजन संयुक्त रूप से ओरल एण्ड मैक्सिलोफेशियल सर्जरी विभाग तथा पीरियोडॉन्टिक्स और सामुदायिक दंत चिकित्सा विभाग ने किया।

 

 

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