प्रोफेसर शकील समदानी की आखिरी पुस्तक का हुआ विमोचन , जानिए उनकी आखिरी किताब का नाम

अलीगढ मीडिया डॉट कॉम, अलीगढ| प्रोफेसर शकील समदानी की आखिरी पुस्तक का विमोचन कार्यक्रम ऑनलाइन रखा गया था. यह पुस्तक प्रोफेसर शकील समदानी और अब्दुल्ला समदानी ने मिलकर लिखी है. इस कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए प्रोफेसर तारीख मंदसौर वाइस चांसलर अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी ने कहा कि प्रोफेसर शकील समदानी न केवल एक बहुत अच्छे अध्यापक थे बल्कि वह एक बहुत अच्छे सर्वजनिक वक्ता भी थे. उन्होंने कहा कि जब प्रोफेसर समदानी का निधन हुआ तब उनकी पास पूरे देश से बहुत सारे शोक संदेश आए तब उनको पता चला कि प्रोफेसर समदानी को पूरे देश में बहुत लोग जानते थे.

प्रोफेसर मनसूर ने यह कहा कि उन्होंने पूर्व सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस केजी बालाकृष्णन के साथ इस बुक में प्रस्तावना लिखा है. उन्होंने यह जानकारी दी कि इस पुस्तक में 20 बहुत अच्छे लेख लिखे हुए हैं जिनको बहुत सारे विशेषज्ञ शोधकर्ताओं न्यायाधीशों और छात्रों ने लिखा है. उन्होंने बताया कि यह पुस्तक कानून के छात्रों और शोधकर्ताओं को मानव अधिकारों के बारे में बहुत अच्छे से बताएगी.

इस प्रोग्राम में प्रोफेसर फैजान मुस्तफा वाइस चांसलर नालसर यूनिवर्सिटी हैदराबाद ने कहा कि वह प्रोफेसर शकील समदानी के बहुत अच्छे दोस्त थे. उन्होंने अपने और प्रोफेसर समदानी के कई घटनाक्रमों के बारे में बताया. उन्होंने कहा कि प्रोफेसर समदानी अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी में बहुत ज्यादा प्रसिद्ध थे. पुस्तक का विश्लेषण करते हुए फैजान मुस्तफा साहब ने यह कहा कि यह पुस्तक मानव अधिकारों के बारे में बहुत अच्छे से बताती है. इसी के साथ साथ उन्होंने यह भी कहा कि अगर लोग सच में मानव अधिकारों के प्रति ध्यान दें तो समाज बहुत सुधर सकता है.

प्रोफेसर नोमानी ने इस अवसर पर प्रोफेसर समदानी के परिवार के सदस्य का शुक्र अदा किया कि उन्होंने एक बहुत अच्छा कार्यक्रम किया. उन्होंने कहा कि प्रोफेसर संदानी की मृत्यु पूरी अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के लिए बहुत दुखद है और उनकी जैसा प्रसिद्ध अध्यापक पूरी यूनिवर्सिटी में कोई नहीं था. उन्होंने लोगों को यह बताया कि प्रोफेसर समदानी ने पुस्तक में एक जगह लिखा है कि एक अध्यापक को सिर्फ मानव अधिकारों को समझना ही नहीं चाहिए बल्कि उसको अपना यह कर्तव्य समझना चाहिए कि मानव अधिकारों का समाज में पालन हो.

इस अवसर पर सऊदी अरब की एक मशहूर संस्था इंडियन फोरम फॉर एजुकेशन के अध्यक्ष डॉक्टर दिलशाद अहमद ने कहा कि प्रोफेसर शकील समदानी एक बहुत ही अच्छे व्यक्ति थे जो हमेशा समाज मैं हो रही बुराइयों के खिलाफ आवाज उठाते थे. डॉक्टर दिलशाद ने कहा कि प्रोफेसर समदानी ने एक बार अपने भाषण में सऊदी अरब में रहने वाले NRI छात्रों को कानून की पढ़ाई पर जोड़ देने का काम किया था.

इस अवसर पर इंग्लिश विभाग के अध्यक्ष प्रोफेसर आसिम सिद्दीकी ने कहा कि इस पुस्तक का विमोचन प्रोफेसर समदानी के जीवन में ही होना था परंतु कुछ कारणों की वजह से यह संभव ना हो पाया. उन्होंने कहा कि यह पुस्तक बहुत अच्छी तरह से लिखी गई है और इससे मानव अधिकारों को समझने में बहुत आसानी होगी.

इस अवसर पर डॉ अनुज कयूम, न्यू होम हॉस्पिटल लंदन में डॉक्टर हैं उन्होंने कहा कि प्रोफेसर संदानी के रूप में हमने एक महान व्यक्ति को खो दिया है. उन्होंने बताया कि प्रोफेसर संदानी सर सैयद अहमद खान से बहुत ज्यादा प्रभावित थे. उन्होंने कहा कि इस पुस्तक में मानव अधिकारों को बहुत सरल भाषा में समझाया गया है.

इस अवसर पर सुप्रीम कोर्ट के मशहूर एडवोकेट शारिक अब्बासी ने कहा कि वह प्रोफेसर समदानी के विद्यार्थी रहे हैं. उन्होंने कहा कि प्रोफेसर संदानी बहुत बड़े-बड़े कार्यों को बहुत आसानी और जल्दी कर लेते थे. उन्होंने बताया कि इस पुस्तक में मानव अधिकारों के 7 क्षेत्रों को बहुत अच्छे से अध्ययन करने के बाद लिखा गया है.

डॉक्टर शाद अहमद खान ओमान ने कहा कि वह इस अवसर पर बहुत खुश और बहुत दुखी भी हैं. उन्होंने कहा कि वह प्रोफेसर समदानी को बहुत याद कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि वह ईश्वर से प्रार्थना करते हैं कि प्रोफेसर समदानी के कार्यों को अब हम सब लोगों को आगे बढ़ाना है.

इस कार्यक्रम का संचालन अब्दुल्लाह समदानी और आशा समदानी ने मिलकर करा इस कार्यक्रम मैं मेहमानों का स्वागत सारा समदानी ने करा. इस कार्यक्रम को सफल बनाने में प्रोफ़ेसर मोहित उल हक श्रीमती अंजुम तस्लीम एडवोकेट शोएब अली सलमान फरहान दानिश और हुनैन का विशेष योगदान रहा.

 

...हमारी खबरों को अपने फेसबुक पेज, ट्यूटर & WhatsAap Gruop के जरिये दोस्तों को शेयर जरूर करें
error: Content is protected !!