किसान कानूनों की वापसी का स्वागत करते हुए आंदोलन जारी रखने की घोषणा

अलीगढ मीडिया डॉट कॉम, अलीगढ: प्रधानमंत्री द्वारा तीन किसान कानूनों की वापसी की घोषणा पर संयुक्त किसान मोर्चा, उत्तरप्रदेश की अलीगढ़ इकाई के विभिन्न संगठनों के प्रतिनिधियों की बैठक आज पान दरीबा स्थित किसान-मजदूर एकता भवन में हुई। बैठक में किसान नेताओं ने जहाँ प्रधानमंत्री की कानून वापसी की घोषणा का स्वागत किया, वहीं इसे अपर्याप्त भी बताया।
अखिल भारतीय किसान सभा* के जिला उपाध्यक्ष इरफान अंसारी ने कहा कि किसान कानूनों की वापसी की घोषणा से सिद्ध होता है ये कानून किसानों के खिलाफ हैं। सरकार ने किसान कानून लाकर व्यर्थ में किसानों का अहित किया। बेरोजगार मजदूर किसान यूनियन* के संयोजक प्रो. अशोक प्रकाश का कहना था कि सुप्रीम कोर्ट ने पहले ही इन कानूनों को निलम्बित कर रखा था। प्रधानमंत्री जी यह समझ रहे थे कि तीन किसान विरोधी कानून अगर वापस नहीं लिए गए तो इसका भाजपा को बड़ा राजनीतिक नुकसान होगा। इसलिए दबाव में आकर पाँच राज्यों में होने वाले चुनावों की खातिर इन कानूनों की वापसी की घोषणा की गई है।

भारतीय किसान यूनियन (स्वराज) के जिलाध्यक्ष जितेन्द्र शर्मा ने कहा कि किसान विरोधी कानूनों की वापसी उन किसानों की शहादत को आज और महत्त्वपूर्ण बना रही है। सरकार के रवैये के कारण ही ये शहादतें हुई हैं। अभी भी किसानों को षड्यंत्रपूर्वक अपनी गाड़ी से कुचलवा देने के आरोपियों का संरक्षण करने वाले केंद्रीय मंत्री अजय मिश्र टेनी को उनके पद से नहीं हटाया गया जो अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है।

इस अवसर पर उपस्थित मजदूर एकजुटता मंच के सुरेशपाल सिंह ने कहा कि किसान विरोधी कानून सबसे अधिक खेतिहर मजदूरों के खिलाफ हैं। किसान की आमदनी खत्म होते जाने से अब मजदूरों को गाँव में भी काम मिलना मुश्किल हो रहा है। किसान कानूनों की तरह मजदूर विरोधी कानूनों को भी वापस लेना चाहिए। किसान नेता अशोक शर्मा ने कहा कि किसान कानूनों की वापसी से सिद्ध होता है कि कानून किसान विरोधी थे। मोदीजी ने इन्हें वापस लेकर सद्बुद्धि का परिचय दिया है। जलाली से आए किसान नेता राजपाल ने कहा कि किसान आंदोलन के दौरान शहीद हुए किसानों के प्रति प्रधानमंत्री जी द्वारा संवेदना में कभी एक शब्द भी नहीं कहा गया। इससे यही पता चलता है कि किसान विरोधी कानूनों की वापसी दबाव में कई गई है। किसान संगठनों के प्रतिनिधियों ने 22 नवम्बर को लखनऊ में होने वाली पंचायत में शामिल होने की घोषणा करते हुए अधिकाधिक संख्या में किसानों से लखनऊ-पंचायत में पहुँचने की अपील की!

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