भरण-पोषण की राशि न देने पर पति 30 दिन के लिए जेल भेजा गया

Chanchal Varma

 


अलीगढ़ ए.एफ.सी. कोर्ट का सख्त रुख, 1.78 लाख की रिकवरी आदेशित

तीन वर्षीय पुत्री के भरण-पोषण मामले में अदालत ने पति को जेल भेजा

अलीगढ़ मीडिया डिजिटल, अलीगढ़: ए.एफ.सी. कोर्ट संख्या-4 अलीगढ़ में भरण-पोषण की वसूली संबंधी एक मामले में न्यायालय ने सख्त रुख अपनाते हुए आदेश पारित किया। वादिया, जिसकी शादी वर्ष 2013 में हुई थी और जिसकी एक 3 वर्षीय पुत्री है, ने भरण-पोषण की वसूली हेतु वाद दायर किया था।

विपक्षी पति न तो भरण-पोषण की फाइल पर और न ही वसूली की फाइल पर उपस्थित हुआ। इस पर न्यायालय ने विपक्षी पति के विरुद्ध 1,78,500 की रिकवरी जारी की, जो 5000 प्रतिमाह के हिसाब से 36 माह की धनराशि है। साथ ही गिरफ्तारी वारंट जारी कर अतरौली पुलिस को कार्रवाई के लिए निर्देशित किया गया।

पुलिस द्वारा विपक्षी पति को गिरफ्तार कर न्यायालय में प्रस्तुत किया गया। भरण-पोषण की धनराशि जमा न करने पर न्यायालय ने विपक्षी पति को जिला कारागार अलीगढ़ में 30 दिनों के लिए भेजने का आदेश दिया। इस प्रकरण में काउंसलर एडवोकेट योगेश सारस्वत ने जानकारी दी।

राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन 13 सितम्बर को

अलीगढ़ मीडिया डिजिटल, अलीगढ़: जिला न्यायाधीश, अध्यक्ष जिला विधिक सेवा प्राधिकरण अनुपम कुमार के आदेशानुसार 13 सितम्बर को राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन जिला न्यायालय, अलीगढ़, बाह्य स्थित न्यायालयों में एवं तहसील स्तर पर किया जाना है। राष्ट्रीय लोक अदालत में न्यायालयों व विभागों में लम्बित विभिन्न प्रकृक्ति के मामलों जैसे- फौजदारी के शमनीय वाद, धारा 138 एनआईएक्ट, धान वसूली वाद, मोटर दुर्घटना प्रतिकर वाद, श्रम वाद, विद्युत अधिनियम एवं जलकर से सम्बन्धित वाद, पारिवारिक एवं वैवाहिक वाद, भूमि अर्जन वाद, सेवा सम्बन्धित्त वाद अन्य दीवानी वाद, अन्य प्रकृति के वाद जो न्यायालयों में छोटे-छोटें प्रकृति के मामलें के अतिरिक्त पारिवारिक, वैवाहिक विवादों के प्रीलिटिगेशन मामलों तथा प्रीलिटिगेशन स्तर पर विभिन्न बैंको, वित्तीय संस्थाओं एवं विभागों में लम्बित, प्रीलिटिगेशन स्तर के मामलों का भी निस्तारण आपसी सुलह समझौता के आधार पर किया जाना है।

अपर जिला जज, पूर्णकालीन सचिव, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण नितिन श्रीवास्तव उक्त जानकारी देते हुए वादकारीगण से अपेक्षा की है कि वे अपने मामले का निस्तारण राष्ट्रीय लोक अदालत में कराने के इच्छुक हो तो वह अपना प्रार्थना पत्र सम्बन्धित न्यायालय व कार्यालय को नियत तिथि से पूर्व प्रेषित कर दें। 

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