खादी, ग्रामोद्योग और माटीकला की खुशबू के बीच सजा अदबी महफ़िल
अलीगढ मीडिया डिजिटल,अलीगढ़। मण्डल स्तरीय खादी ग्रामोद्योग एवं माटीकला प्रदर्शनी में सांस्कृतिक सरोकारों को सशक्त स्वर देते हुए भव्य मुशायरे का आयोजन किया गया। प्रदर्शनी परिसर में सजी इस अदबी महफ़िल ने श्रोताओं को शायरी की दुनिया में ऐसा बांधा कि देर रात तक तालियों और वाह-वाह की गूंज सुनाई देती रही।
मुशायरे में गुन्नौर से डॉ. इलियास नावेद गुन्नौरी, अलीगढ़ से जावेद वारसी, बुलन्दशहर से संभव, अतरौली से शाकिर अली, कायमगंज से यासिर, आगरा से ज़ाहिद खान, अलीगढ़ से अतीक सहर, इरफान अंसारी, मोहसिन खान सहित अनेक शायरों ने अपने बेहतरीन कलाम पेश कर श्रोताओं का दिल जीत लिया।
शायरी के हर रंग में डूबे इस आयोजन में अतीक सहर की पंक्तियाँ—
“मुझको ऐसा कमाल दे मौला,
जिसकी दुनिया मिसाल दे मौला।”
ने आध्यात्मिक भावनाओं को गहराई से छुआ। वहीं आमिर रज़ा की पंक्तियाँ—
“सांचे में आज वक्त के ढलना पड़ा मुझे,
मजबूर होकर खुद को बदलना पड़ा मुझे।”
ने समय की सच्चाइयों और संघर्षों को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया।
मुशायरे में तमाम शायरों ने बड़े ही सधे, आदबी और संजीदा लहजे में अपने कलाम पेश किए, जिससे माहौल साहित्यिक गरिमा और सांस्कृतिक सौहार्द से सराबोर हो उठा।
इस अवसर पर परिक्षेत्रीय खादी ग्रामोद्योग अधिकारी संजीदा बेगम, सहायक निदेशक संदीप कुमार, ज़ुल्फ़िकार अली, मोहसिन चौधरी, डॉ. सिदरा, सन्तोष शर्मा, अनिल कुमार सहित बड़ी संख्या में श्रोतागण उपस्थित रहे और देर रात तक मुशायरे का भरपूर आनंद लिया। खादी, ग्रामोद्योग और माटीकला के साथ साहित्य और संस्कृति का यह संगम प्रदर्शनी को नई पहचान देने वाला सिद्ध हुआ, जिसने न सिर्फ लोककलाओं को मंच दिया बल्कि अदबी विरासत को भी जनमानस से जोड़ा।

