स्वामी विवेकानंद जी की प्रतिमा स्थापना हेतु छात्र नेताओं ने सौंपा ज्ञापन, प्रशासन के 'ठंडे रुख' के बीच आंदोलन की रणनीति तैयार

Aligarh Media Desk

अलीगढ़ मीडिया डिजिटल, अलीगढ़|भारतीय संस्कृति के संवाहक और युवाओं के प्रेरणास्रोत स्वामी विवेकानंद जी की स्मृतियों को संजोने हेतु छात्र नेता हिमांक अरोरा एवं दुष्यंत गौतम ने एक महत्वपूर्ण पहल की है। शनिवार को छात्र नेताओं ने अलीगढ़ शहर के 'दुबे का पड़ाव' अथवा 'रेलवे रोड तिराहा' पर स्वामी विवेकानंद की भव्य प्रतिमा स्थापित करने और उस स्थल का नामकरण 'स्वामी विवेकानंद चौक' करने के संबंध में एक विस्तृत ज्ञापन प्रशासन को सौंपा।


प्रशासनिक अधिकारियों की प्रतिक्रिया और छात्र असंतोष

​ज्ञापन सौंपने के दौरान छात्र नेताओं ने नगर आयुक्त की अनुपस्थिति में अपर नगर आयुक्त राकेश यादव से भेंट की। उन्होंने ज्ञापन स्वीकार कर इसे संबंधित विभाग को अग्रसारित तो कर दिया, लेकिन अपनी प्रतिक्रिया में कहा कि— "यदि 4-5 प्रमुख छात्र नेता या किसी बड़े संगठन के कार्यकर्ता सामूहिक रूप से यह माँग करते हैं, तो इस पर गंभीरता से विचार किया जा सकता है।"


​तत्पश्चात, छात्र नेताओं ने ज्ञापन की प्रतिलिपि जिलाधिकारी अलीगढ़, संजीव रंजन को सौंपी। जिलाधिकारी ने ज्ञापन पर लिखित रिमार्क तो दे दिया, लेकिन उनकी मौखिक प्रतिक्रिया से छात्र नेताओं में गहरा असंतोष देखा गया। जिलाधिकारी ने टिप्पणी करते हुए कहा कि— "शहर में हर किसी की प्रतिमा स्थापित करना व्यावहारिक नहीं है और भविष्य में अन्य लोग भी इसी तरह की माँगें लेकर आएंगे।"


​शहर विधायक का समर्थन और आगामी योजना

​प्रशासन के इस ठंडे रुख के बावजूद छात्र नेताओं का प्रयास जारी रहा। उन्होंने शहर विधायक मुक्ता राजा से भी इस विषय पर चर्चा की, जिन्होंने इस माँग की सराहना की। विधायक जी ने सुझाव दिया कि यदि विद्यार्थी परिषद इस मुद्दे को पूरे जोर-शोर से उठाए, तो शासन स्तर से अनुमति दिलाने में वह पूर्ण सहयोग करेंगी। छात्र नेताओं ने बताया कि आगामी सोमवार को वे इस माँग की प्रतिलिपि माननीय सांसद अलीगढ़ सतीश गौतम एवं भाजपा महानगर अध्यक्ष राजीव शर्मा को व्यक्तिगत रूप से सौंपेंगे।


महापौर ने दिया सकारात्मक आश्वासन

इससे पूर्व, शुक्रवार को इस विषय की एक प्रतिलिपि महापौर प्रशांत सिंघल को सौंपी गई थी। ज्ञापन का संज्ञान लेते हुए महापौर ने उत्साहजनक प्रतिक्रिया दी और बताया कि नगर निगम की योजना में यह विषय पहले से ही विचाराधीन है। उन्होंने आश्वस्त किया कि:

​"यदि इस कार्य हेतु शासन से अनुमति की आवश्यकता नहीं पड़ी और स्थानीय प्रशासन के स्तर पर ही प्रक्रिया पूर्ण हो गई, तो बहुत जल्द शहर के मुख्य स्थल पर स्वामी विवेकानंद जी की प्रतिमा स्थापित करवाई जाएगी।"

छात्र नेताओं के वक्तव्य

​छात्र नेता हिमांक अरोरा ने कहा:

​"स्वामी विवेकानंद जी केवल एक महापुरुष नहीं, बल्कि आधुनिक भारत के निर्माण की ऊर्जा हैं। अलीगढ़ जैसे शिक्षा के केंद्र में उनकी प्रतिमा का न होना एक शून्यता की तरह है। प्रशासन का यह कहना कि 'हर किसी की प्रतिमा नहीं लग सकती', स्वामी जी जैसे राष्ट्रनायक का अपमान है। हम यह मुहिम किसी पद के लिए नहीं, बल्कि सांस्कृतिक जड़ों के लिए शुरू कर रहे हैं। यदि प्रशासनिक शिथिलता रही, तो हम इसे बड़ा जन-आंदोलन बनाएंगे।"

​छात्र नेता दुष्यंत गौतम ने कहा:

"प्रशासन का नकारात्मक रवैया हमारे संकल्प को और मजबूत करता है। हम सभी छात्र संगठनों अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी), राष्ट्रवादी छात्र संगठन (आरसीएस), आदि का आह्वान करते हैं जिनके लिए 'राष्ट्र प्रथम' सर्वोपरि है। यह समय दलगत राजनीति से ऊपर उठने का है। हमारी कार्ययोजना स्पष्ट है—हम संवाद में विश्वास रखते हैं, परंतु अपने वैचारिक सम्मान हेतु संघर्ष करने की भी पूरी तैयारी रखते हैं।"


आगामी 90 दिनों की कार्ययोजना (अल्टीमेटम)

प्रशासनिक सहयोग की अपेक्षा रखते हुए व प्रशासन के रुख को देखते हुए छात्र नेताओं ने स्पष्ट रणनीति तैयार की है: हिमांक एवं दुष्यंत ने अपनी रणनीतिक रूपरेखा भी स्पष्ट कर दी है:

1. ​30 दिन बाद: प्रशासनिक प्रगति हेतु प्रथम अनुस्मारक।

2. ​45 दिन बाद: अधिकारियों से व्यक्तिगत भेंट एवं वार्ता।

3. ​60-75 दिन बाद: 66वें दिन एक अंतिम अनुस्मारक व 75वें दिन एक सांकेतिक धरना प्रदर्शन।

4. ​90 दिन: मांग पूरी न होने की स्थिति में अनिश्चितकालीन धरना व भूख हड़ताल।


छात्र शक्ति का आह्वान एवं भावी कार्ययोजना

​छात्र नेताओं ने अलीगढ़ के हर छात्र संगठन जैसे एबीवीपी, राष्ट्रवादी छात्र संगठन, विश्वविद्यालय एवं कॉलेज के सभी विद्यार्थियों को आमंत्रित करते हुए कहा कि जिनके जमीर जिंदा होंगे और जिन्हें नेतृत्व के अर्थ का संज्ञान होगा, वे स्वयं इस मुहिम में साथ आएंगे व हम उन सभी का स्वागत करते है। ​इस अवसर पर छात्र नेताओं ने संकल्प लिया कि वे प्रशासन के नकारात्मक रवैये के बावजूद जनहित और सांस्कृतिक पहचान की इस लड़ाई को निर्णायक मोड़ तक लेकर जाएंगे।