#Aligarh: एक साल से लगातर शिकायत, लेकिन कब्ज़ा मुक्त नहीं हो सका चकमार्ग

Chanchal Varma

अलीगढ मीडिया डिजिटल, अलीगढ़ : जिलाधिकारी अलीगढ को एक साल से लगातार शिकायती पत्र देकर एक किसान सरकारी चकमार्ग को कब्ज़ा मुक्त करने की गुहार लगा रहा है लेकिन अभी तक चकमार्ग कब्ज़ा मुक्त नहीं हो सका है | शिकायती पत्रों ने निस्तारण में जिलाधिकारी को राजस्व टीम द्वारा फर्जी आख्या लगाकर उसे कब्ज़ा मुक्त और चालू बताया जा रहा है | निस्तारण गुणवत्ता जांचने के लिए जिलाधिकारी कार्यालयत से शिकायतकर्ता किसान को फोन करके पूंछा गया तो हकीकत सामने आ गयी | अब शिकायतकर्ता किसान ने जिलाधिकारी को  ईमेल भेजकर कागजी निस्तारण में आपत्ति दर्ज कराई है |  

मामला जनपद अलीगढ के कोल तहसील के बरौठा गांव का है | हरदुआगंज इलाके के सफ़ेदपुरा के रहने वाले किसान प्रेमदेव सिंह पुत्र स्व0 गजराज सिंह ने दिनांक 23/06/2026 को जिलाधिकारी के समक्ष जनता दर्शन में सरकारी चकमार्ग गाटा संख्या-02 अधीन ग्राम पंचायत बरौठा परगना मोरथल को कब्ज़ा मुक्त करा कर आवागमन शुरू कराने विषयक प्रत्यावेदन उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता-2006 की धारा 26 के अधीन  दिया था | 



पीड़ित किसान प्रेमदेव ने बताया कि चकमार्ग को कब्ज़ा मुक्त कराकर आवागमन युक्त बनाये जाने हेतु उन्होंने 21मई 2025 अर्थात एक वर्ष से ज्यादा समय से लगातार कई प्रार्थना पत्र उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता की धारा-21(2) , 22 के तहत दिए है| लेकिन प्रेषित आख्या में  धारा-67 के सुसंगत प्राविधानों के तहत आवश्यक कार्रवाई नहीं की गयी है|  शिकायत संख्या 20014326013101 के निस्तारण आख्या में चकमार्ग कब्ज़ा मुक्त और चालू बताया गया है जबकि चकमार्ग के कुछ भाग को छोड़कर शेष भाग में पर  किसानों ने नाली बना रखी है/फसल/तारकसी करके अवैधरूप से कब्जारखी रही जिससे आवागमन बाधित है |  निस्तारण आख्या के साथ दर्शाये गए फोटो पीड़ित किसान की शिकायत निस्तारण के नहीं है अपितु अन्य शिकायतकर्ता/अवैध कब्ज़ा कारित करने वाले पंकज पुत्र ब्रज किशोर गुप्ता , निवासी महावीर पार्क अलीगढ के शिकायती पत्र  दिनांक-13/06/2026 बनाम सुनीता कुमारी पत्नी स्व0 संजीव कुमार निवासी सफ़ेदपुरा के शिकायती पत्र दिनांक-03/07/206 के निस्तारण की है|


 इस  शिकायत निस्तारण में भी राजस्व टीम ने नियमविरुद्ध , व्यक्ति विशेष (गाटा संख्या-19 के हितधारकों ) को लाभ पहुंचने की नीयत से चकमार्ग पर अवैध कब्ज़ा कराया है, क्योकि राजस्व अभिलेखों-नजरि नक्शा  में चकमार्ग रामघाट रोड से (जो उखलाना और बरोठा ग्राम पंचायत का सीमा बिंदु है) 120अंश की त्रिज्या में टेड़ा है जबकि राजस्व टीम ने चौकोर मोड़ देते हुए गाटा संख्या-19 के चिन्हांकन करते हुए तारकशी कराई है| जिससे चकमार्ग पर अवैध कब्ज़ा की स्थिति बनी  हुयी है |

पीड़ित किसान प्रेमदेव सिंह की मांग है कि चूंकि प्रकरण चकमार्ग गाटा संख्या-1 (लगभग 1किमी लम्बे)  , बरोठा और उखलाना ग्राम पंचायत की सीमा पर केंद्रित है इसलिए उक्त की पैमाइश और निशानदेही पर गंभीरता से विचार किया जाना आवश्यक है| चकमार्ग कब्ज़ा ग्रस्त / नाली स्वरुप प्रयोग होने से भविष्य में किसानो के बीच आपसी विवाद बढ़ सकते है इसलिए बरोठा ग्राम पंचायत अधीन इस चकमार्ग का धारा-67 के अधीन चिन्हांकन कराते हुए विकासखंड अधिकारी, धनीपुर को  VB-G RAM G  योजना से मिटटी समतलीकरण कार्य कराये जाने के निर्देश करे जिससे किसानो का आवागमन सुचारु हो सके |

....जानिए, क्या हैं धारा-67

सरकारी चकरोड़ ग्राम समाज की सम्पत्ति है और इस पर कब्ज़ा करना उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता 2006 की धारा 67 के तहत अवैध है। अगर जिलाधिकारी सीधे सुनवाई नहीं कर रहे हैं तो आपको सिस्टम से ही उन पर दबाव बनाना पड़ेगा, DM को बाईपास नहीं करना है, बल्कि उनके ऊपर के और समानांतर कानूनी रास्ते अपनाने हैं।

1. नीचे से मजबूत फाइल तैयार करें

DM बिना रिपोर्ट के काम नहीं करता। सबसे पहले नीचे की कार्यवाही का लिखित सबूत बनायें:


a) लेखपाल और कानूनगो से रिपोर्ट: तहसील में जाकर चकरोड़ का गाटा संख्या लिखकर प्रार्थना पत्र दें कि मौका मुआयना कर कब्जे की रिपोर्ट दें। 

b) SDM / तहसीलदार को प्रार्थना पत्र धारा 26 और 67 के तहत: इसमें लिखें कि चकरोड़ सार्वजनिक उपयोग का रास्ता है, कब्जे से आवागमन बाधित है। SDM को ही धारा 67 में बेदखली का अधिकार है। इस पर प्राप्ति रसीद जरूर लें।


साथ में लगायें:

• खसरा-खतौनी, नक्शा - 41 और 45 की नकल • कब्जे की फोटो / वीडियो, GPS लोकेशन • 2-4 ग्रामीणों के हस्ताक्षर वाला सामूहिक प्रार्थना पत्र 2. DM को बाईपास करके ऑनलाइन शिकायत - इससे रिकॉर्ड बनता है

जब ऑफलाइन सुनवाई नहीं हो रही तो ऑनलाइन पोर्टल पर शिकायत सबसे असरदार है क्योंकि हर शिकायत का जवाब शासन को देना होता है।


1. जनसुनवाई पोर्टल - IGRS UP: jansunwai.up.nic.in पर "अतिक्रमण" श्रेणी में शिकायत करें। विभाग - राजस्व विभाग, सब कैटेगरी - सरकारी भूमि पर अवैध कब्जा। इसमें SDM की रिपोर्ट न देने का भी उल्लेख करें।

2. एंटी भू-माफिया पोर्टल: antibhumafia.up.gov.in - यहाँ चकरोड़ के अतिक्रमण की शिकायत सीधे दर्ज होती है और इसकी समीक्षा मुख्य सचिव स्तर पर होती है।

3. मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 1076: पर कॉल करके भी वही जनसुनवाई शिकायत दर्ज करा सकते हैं।


शिकायत में ये जरूर लिखें - "प्रार्थी द्वारा SDM को दिनांक... को प्रार्थना पत्र दिया गया, लेखपाल द्वारा मौका जांच... पर कोई कार्यवाही नहीं हुई, अतः जिलाधिकारी महोदय से अनुरोध है।"

3. DM के ऊपर के अधिकारी को लिखें

DM रुचि न ले तो उसका उच्च अधिकारी मंडलायुक्त होता है।

• मंडलायुक्त, बरेली मंडल को शिकायती पत्र: बरेली में आप सीधे जनसुनवाई में मिल सकते हैं। मंडलायुक्त के आदेश पर DM को कार्यवाही करनी ही पड़ती है। • मुख्य राजस्व आयुक्त को पत्र: लखनऊ को रजिस्टर्ड डाक से भेजें। 4. कानूनी रास्ता - सबसे तेज़ असर

a) लोकायुक्त / तहसील दिवस: हर महीने के पहले और तीसरे शनिवार को तहसील दिवस होता है। वहाँ DM या ADM मौजूद रहते हैं, वहाँ दी गई शिकायत का निस्तारण 15 दिन में दिखाना अनिवार्य है।


b) हाईकोर्ट में रिट - अनुच्छेद 226: ये चकरोड़ के मामलों में सबसे सफल तरीका है। आप इलाहाबाद हाईकोर्ट में "जनहित याचिका / परमादेश रिट" दायर कर सकते हैं। कोर्ट सीधे DM को आदेश देता है कि सरकारी रास्ते को 2-3 महीने में कब्जा मुक्त कर रिपोर्ट पेश करें। इसमें आपका जनसुनवाई वाला शिकायत नंबर और SDM को दिया प्रार्थना पत्र सबूत के तौर पर बहुत काम आता है।