EPFO पेंशन पर सरकार का बड़ा फैसला, 15000 से बढ़ाकर 25000 हुई, वेतन सीमा।

गजेंद्र कुमार, (न्यूज़ ब्यूरो, यूपी)

अलीगढ़ मीडिया डिजिटल (यूपी) - केंद्रीय कैबिनेट ने नौकरीपेशा कर्मचारियों को विश्वकर्मा पूजा के दिन बड़ा तोहफा दे दिया है. केंद्रीय कैबिनेट की आज अहम बैठक में EPF और एम्‍प्‍लाई पेंशन स्कीम (EPS) के तहत अनिवार्य कवरेज के लिए सैलरी लिमिट को ₹15,000 से बढ़ाकर ₹25,000 प्रति माह कर दिया गया है, जो 17 सितंबर यानि आज से लागू हो जाएगा. जिसका सीधा फायदा देश के 51 लाख निचले व मध्यम वर्ग के कर्मचारियों को मिलेगा।


अब ₹15,000 नहीं, ₹25,000 हुई वेतन सीमा !

एक तरफ जहां ऊपर दिए गए नियम कर्मचारियों के हकों की रक्षा करते हैं, वहीं आज केंद्र सरकार ने नौकरीपेशा लोगों को एक और बड़ी सौगात दी है। केंद्रीय मंत्रिमंडल ने EPFO के तहत अनिवार्य कवरेज के लिए 'वेतन सीमा' (Wage Limit) को ₹15,000 से बढ़ाकर ₹25,000 प्रति माह करने के प्रस्ताव को आधिकारिक तौर पर मंजूरी दे दी है। इसका मतलब है कि अब Basic + DA मिलाकर जिन प्राइवेट सेक्‍टर के कर्मचारियों को 25 हजार रुपये की सैलरी मिलती है, उन्‍हें अब अनिवार्य तौर पर PF के साथ ही EPS यानी पीएफ पेंशन में भी योगदान देना होगा. पहले यह लिमिट 15000 रुपये थी

सरकार के इस ऐतिहासिक फैसले का सीधा असर देश के निचले और मध्यम आय वर्ग के कर्मचारियों पर पड़ेगा। वेतन सीमा ₹25,000 होने से अब देश के 51 लाख से ज्यादा अतिरिक्त कर्मचारी अनिवार्य रूप से EPFO कवरेज के दायरे में आ जाएंगे। इसका सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि इन लाखों नए कर्मचारियों को अब सीधे तौर पर रिटायरमेंट के लिए प्रोविडेंट फंड (PF), बुढ़ापे के लिए पेंशन (EPS) और मुफ्त जीवन बीमा (EDLI) जैसी शानदार सामाजिक सुरक्षा योजनाओं का लाभ मिलने लगेगा।

अब सवाल आता है कि क्या कर्मचारी अपनी मर्जी से 12% से ज्यादा PF कटवा सकता है?

EPFO के नियम कहते हैं हां। अगर कोई कर्मचारी अपने रिटायरमेंट के लिए ज्यादा पैसा जोड़ना चाहता है, तो वह 12% की वैधानिक दर से ज्यादा का योगदान दे सकता है (इसे Voluntary Provident Fund या VPF कहा जाता है)। हालांकि, इसमें एक पेंच है। अगर आप अपना हिस्सा बढ़ाते हैं, तो भी कंपनी (Employer) अपना हिस्सा वैधानिक दर तक ही सीमित रख सकती है (यानी कंपनी के लिए 12% से ज्यादा देना जरूरी नहीं है)।

इसके अलावा, स्कीम के पैरा-26 (6) के प्रावधानों के तहत APFC/RPFC से अनुमति लेने के बाद, कर्मचारी अपनी वास्तविक बेसिक सैलरी (अगर वह तय लिमिट से ज्यादा है) पर भी पीएफ कटवा सकता है।