#Aligarh: मीडिया से क्यों डर गये हैं CMO डॉ. रामनाथ सिंह? कार्यालय से सूचना लीक करने पर पाबंदी

Aligarh Media Desk


 CMO का तुगलकी फरमान - दफ्तर में मीडिया की एंट्री बैन, केबिन में मिलने पर कार्रवाई के निर्देश, पीटने तक की धमकी का आरोप

अलीगढ़ मीडिया डिजिटल, अलीगढ़ । उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ में स्वास्थ्य विभाग के मुखिया मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) डॉ. रामनाथ सिंह का एक कथित तुगलकी फरमान सामने आया है, जिसने पूरे जिले में हड़कंप मचा दिया है। CMO ने अपने कार्यालय में मीडियाकर्मियों और बाहरी लोगों के प्रवेश पर पूरी तरह से रोक लगा दी है। इस संबंध में जारी किया गया एक नोटिस सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसके बाद CMO की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।


सूत्रों के मुताबिक CMO डॉ. रामनाथ सिंह ने अपने पूरे स्टाफ को अपने केबिन में बुलाकर सख्त हिदायत दी है कि कार्यालय परिसर में कोई भी मीडियाकर्मी या बाहरी व्यक्ति नजर नहीं आना चाहिए। आदेश में यहां तक कहा गया है कि अगर कोई स्टाफ अपने केबिन में किसी मीडियाकर्मी से मिलता हुआ पाया गया तो उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। 


इससे भी ज्यादा चौंकाने वाली बात सूत्रों के हवाले से सामने आ रही है। बताया जा रहा है कि CMO कार्यालय में अगर कोई मीडियाकर्मी या बाहरी व्यक्ति पाया जाता है तो उसे पीटने तक की बात कही जा रही है। इस तरह की भाषा एक जिम्मेदार सरकारी अधिकारी के मुंह से सामने आना बेहद निंदनीय और लोकतंत्र के चौथे स्तंभ पर सीधा हमला माना जा रहा है।


वायरल नोटिस ने खोली पोल


जो नोटिस वायरल हो रहा है, उसमें साफ-साफ लिखा है कि CMO कार्यालय में बिना अनुमति किसी भी बाहरी व्यक्ति का प्रवेश वर्जित है। मीडियाकर्मियों के लिए भी यही नियम लागू किया गया है। यह आदेश ऐसे समय में आया है जब पिछले काफी समय से CMO कार्यालय पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लग रहे हैं।


भ्रष्टाचार की खबरों से बौखलाए CMO?

जानकारों का मानना है कि लगातार हो रही खबरों से बौखलाकर यह तुगलकी फरमान जारी किया गया है। पिछले कई महीनों से अलीगढ़ के CMO कार्यालय पर रिश्वत लेकर अवैध रूप से निजी अस्पतालों, नर्सिंग होम और पैथोलॉजी लैब को लाइसेंस देने के आरोप लगते रहे हैं। 


मीडिया में कई ऐसी खबरें प्रकाशित हुई थीं जिनमें दावा किया गया था कि मानकों को ताक पर रखकर, मोटी रकम लेकर शहर में धड़ल्ले से अवैध अस्पताल संचालित कराए जा रहे हैं। इन अस्पतालों में न तो पर्याप्त डॉक्टर हैं, न स्टाफ और न ही जरूरी सुविधाएं, जिससे मरीजों की जान से खिलवाड़ हो रहा है। जब इन खबरों ने तूल पकड़ा तो CMO कार्यालय सवालों के घेरे में आ गया।


सूत्र बताते हैं कि इन खबरों को दबाने और सच्चाई को सामने आने से रोकने के लिए ही मीडिया की एंट्री पर बैन लगाया गया है ताकि भ्रष्टाचार का खेल पर्दे के पीछे चलता रहे और कोई सवाल पूछने वाला न हो।


लोकतंत्र पर हमला, पत्रकारों में आक्रोश

CMO के इस आदेश के बाद अलीगढ़ के पत्रकारों में भारी आक्रोश है। पत्रकार संगठनों ने इसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का हनन बताया है। उनका कहना है कि एक सरकारी कार्यालय, जो जनता के पैसे से चलता है, वहां मीडिया को रोकना असंवैधानिक है। अगर सब कुछ पारदर्शी है तो मीडिया से कैसा डर?


एक वरिष्ठ पत्रकार ने नाम न छापने की शर्त पर कहा कि "CMO साहब को यह समझना चाहिए कि कार्यालय उनका निजी जागीर नहीं है। मीडिया का काम सच दिखाना है। अगर आप ईमानदार हैं तो कैमरे से क्यों डर रहे हैं? पीटने जैसी भाषा का इस्तेमाल करना गुंडागर्दी को दर्शाता है।"


बड़ा सवाल - क्या छिपाना चाहते हैं CMO?

इस पूरे मामले ने कई बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं:

1. आखिर CMO कार्यालय में ऐसा क्या हो रहा है जिसे मीडिया से छिपाने की कोशिश की जा रही है? 2. क्या अवैध अस्पतालों को संरक्षण देने के आरोपों में सच्चाई है, इसलिए मीडिया को दूर रखा जा रहा है? 3. क्या एक सरकारी अधिकारी को मीडिया को पीटने की धमकी देने का अधिकार है? 4. क्या जिला प्रशासन और शासन इस तानाशाही रवैये पर संज्ञान लेगा? 

फिलहाल इस मामले में CMO डॉ. रामनाथ सिंह की ओर से कोई आधिकारिक सफाई सामने नहीं आई है। वायरल नोटिस की पुष्टि के लिए जब संपर्क करने की कोशिश की गई तो संपर्क नहीं हो सका।


अब देखना यह होगा कि जिलाधिकारी अलीगढ़ और स्वास्थ्य विभाग के उच्च अधिकारी इस पूरे मामले पर क्या कार्रवाई करते हैं। क्या मीडिया को बैन करने वाले इस तुगलकी फरमान को वापस लिया जाएगा या फिर अलीगढ़ में स्वास्थ्य विभाग इसी तरह तानाशाही रवैये से चलता रहेगा? इस खबर पर सबकी नजरें टिकी हैं।