ALIGARH| तीन घण्टे चली मैराथन बैठक में डीएम ने प्रदेश सरकार की मंशा से अधिकारियों को कराया रूबरू

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चंचल वर्मा, अलीगढ मीडिया डॉट कॉम न्यूज़ ब्यूरो, अलीगढ|  जनशिकायतों का त्वरित एवं गुणवत्तापूर्ण निराकरण सरकार की सर्वाेच्च प्राथमिकता है। प्रदेश सरकार द्वारा शिकायतों, समस्याओं के स्थाई समाधान के लिए मुख्यमंत्री हेल्पलाइन पोर्टल विकसित किया गया है। पोर्टल पर विभिन्न प्रकार की जनसमस्याओं को अलग-अलग माध्यम से दर्ज कर संबंधित अधिकारियों को निराकरण के लिए भेजा जाता है। आवेदक मुख्यमंत्री हेल्पलाइन नंबर 1076 पर अपनी बात कह सकता है, जोकि 24 घंटे जनता की सेवा के लिए संचालित है। इसके अलावा विभिन्न प्रकार से शिकायतों, समस्याओं को ऑनलाइन ऑफलाइन स्थाई समाधान की मंशा से भी दर्ज किया जाता है। शिकायतों के निस्तारण के लिए विभाग द्वारा मानक प्रक्रिया भी निर्धारित कर शिकायत की प्रकृति के अनुसार विभिन्न श्रेणियों में बांटा गया है। गुणवत्तापूर्ण एवं स्थाई समाधान के लिए समय भी निर्धारित किया गया है। दर्ज शिकायतों के त्वरित एवं गुणवत्तापूर्ण निराकरण के मूल्यांकन की व्यवस्था के तहत पोर्टल पर मासिक रैंकिंग प्रदर्शित होती है।


 उक्त जानकारी जिला अधिकारी इंद्र विक्रम सिंह ने सभी जनपद स्तरीय अधिकारियों को कलेक्ट्रेट में आहूत बैठक में दी। वैसे तो प्रायः जिलाधिकारी बैठकों के माध्यम से विभागीय प्रगति की समीक्षा करते हुये आवश्यक दिशा निर्देश देते ही हैं, परंतु शुक्रवार को जिलाधिकारी की अध्यक्षता में तीन घंटे चली बैठक, बैठक कम  प्रशिक्षण ज्यादा प्रतीत हुई। दरअसल जनशिकायत निस्तारण शासन ही नहीं अपितु जिलाधिकारी की भी सर्वोच्च प्राथमिकता है। प्रातः जनता दर्शन में वह प्रत्येक व्यक्ति का शिकायती पत्र अपने हाथ में लेकर गंभीरतापूर्वक स्वयं निस्तारण करते हैं। जनशिकायत पोर्टल पर मई, जून माह की रैंकिंग ने जिलाधिकारी को परेशान ही नहीं, व्यथित और दुखी भी कर दिया। इतना बड़ा प्रशासनिक अमला, बड़े-बड़े विभाग, मोटी तनख्वाह, आने जाने के लिए गाड़ियां रहने के लिए शासकीय भवन के बाद भी शासन की शीर्ष प्राथमिकता के बिंदु जनशिकायत निस्तारण में जनपद की रैंकिंग पोर्टल पर खराब 10 जिलों में प्रदर्शित हो रही है। माननीय मुख्यमंत्री जी, माननीय मुख्य सचिव उत्तर प्रदेश शासन द्वारा साप्ताहिक, पाक्षिक, मासिक वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से निरंतर निगरानी करते हुए आवश्यक दिशा निर्देश भी दिए जा रहे हैं। इसके बाद भी अधिकारियों द्वारा निर्धारित अवधि में गुणवत्तापूर्ण निराकरण नहीं करने पर जिलाधिकारी ने शुक्रवार को जनपद के सभी विभागीय अधिकारियों को सख्त तेवर दिखाते हुए स्पष्ट कर दिया कि यदि शिकायत डिफाल्टर की श्रेणी में आती है या फिर शिकायतकर्ता असंतुष्ट है तो वह कठोरतम कार्रवाई करेंगे। 


इस लापरवाही भरे कृृत्य से शासन को भी अवगत कराते हुए विभागीय कार्यवाही के लिए लिखा जयेगा। उन्होंने कहा कि इस संबंध में यह उनकी अंतिम चेतावनी है। वह बार-बार नहीं कहेंगे, बल्कि शासनादेश की अवेहलना करने पर दंडित किया जाएगा। उन्होंने साफ किया कि 15 दिनों में स्थिति सुधारें। अगले माह की रैंकिंग में सुधार नहीं आता है तो लापरवाह दोषी अधिकारियों के विरुद्ध कार्रवाई को तय माना जाए।

उन्होंने अपर जिलाधिकारी नगर राकेश कुमार पटेल को निर्देशित किया कि वह सभी अधिकारियों को शासनादेश से अच्छी तरह से भिज्ञ करा दें। सभी अधिकारी शिकायतों समस्याओं के निस्तारण के दौरान सुस्पष्ट आख्या दें, यदि समाधान होना है तो करें, यदि नहीं हो सकता तो अभिलेखों के रोशनी में आख्या दें। मौके पर जाना आवश्यक है तो शिकायतकर्ता को सूचित कर मौके पर जाएं। यदि शिकायतकर्ता मौके पर नहीं आता है तो निष्पक्ष रूप से दो लोगों के बयान एवं हस्ताक्षर दर्ज करें। उन्होंने कहा कि जनता का भरोसा सिस्टम पर होना चाहिए। ऐसा न होने से सरकार की छवि पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। सभी अधिकारी शिकायत निस्तारण के लिए एसओपी तैयार करें। उच्च स्तर के अधिकारी द्वारा अधीनस्थ को शिकायत मार्क कर देना निस्तारण नहीं माना जाएगा। निस्तरण के नाम पर टालामटोली कर शिकायतकर्ता को बहलाया न जाये। उन्होंने निर्देश दिए कि आख्या सुस्पष्ट टंकित होनी चाहिए, हस्त लिखित नहीं, इससे रैंकिंग पर विपरीत प्रभाव पड़ता है। उन्होंने यह भी कहा कि समस्याओं का निस्तारण मा.मुख्यमंत्री जी की शीर्ष प्राथमिकता है, इसको ध्यान में रखकर कार्य किया जाये। दो अधिकारियों को परिनिन्दा प्रविष्टि प्रदान करते हुए नगर स्वास्थ्य अधिकारी की सम्बद्धता समाप्त कीजिलाधिकारी ने बैठक में नगर स्वास्थ्य अधिकारी एवं उपनिदेशक कृषि को जनशिकायत निराकरण में घोर लापरवाही बरतने, शिकायतकर्ताओं को सन्तुष्ट न कर सकने पर परिनिन्दा प्रविष्टि निर्गत करने के निर्देश दिए। 


उन्होंनं मुख्य चिकित्सा अधिकारी को निर्देशित किया गया कि नगर स्वास्थ्य अधिकारी की सम्बद्धता को तत्काल समाप्त करते हुए उन्हें चिकित्सालय में योगदान कराते हुए उनसे चिकित्सकीय सेवायें ली जायें। इस अवसर पर मुख्य विकास अधिकारी अंकित खंडेलवाल समेत समस्त जिलास्तरीय अधिकारी उपस्थित रहे।

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