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एएमयू में राही मासूम रज़ा की याद कार्यक्रम, सर सैयद दिवस पर नाटक का हुआ आयोजन


अलीगढ मीडिया डॉट कॉम, अलीगढ़| अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के कला संकाय की ओर से अपने पूर्व शोध छात्र, शिक्षक, विख्यात लेखक राही मासूम रज़ा की याद में एक कार्यक्रम का आयोजन आर्ट्स फैकल्टी लााउंज में किया गया। ‘याद-ए-राही मासूम रज़ा’ नामक इस कार्यक्रम में राही और उनके फ़िल्मी और साहित्यिक योगदान की चर्चा के साथ-साथ स्वर्गीय सीमा सग़ीर द्वारा हिन्दी-अनूदित राही के सद्य प्रकाशित शोध प्रबंध ‘भारतीयता की पहचान ‘दास्तान-ए-तिलिस्म होशरुबा’ का लोकार्पण भी किया गया।


कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए सुप्रसिद्ध कहानीकार डा. नमिता सिंह ने कहा कि जैसे जैसे समय बीत रहा है, समाज की स्थितियाँ बदल रही हैं, रिश्ते तनावपूर्ण हो रहे हैं, वैसे-वैसे राही के साहित्य की प्रासंगिकता बढ़ती जा रही है। राही से जुड़े अपने संस्मरणों को साझा करते हुए उन्होंने बताया कि राही अपने जीवन और लेखन में समाज में आ रही दरारों को पाटने का काम करते रहे। उनका शोध-प्रबंध हिन्दी के हर पाठक को पढ़ना चाहिए, क्योंकि यह संस्कृति के बारे में सही दृष्टिकोण को विकसित करने में सहायक है।


जनसंचार विभाग के प्रोफे़सर और लोकप्रिय स्तंभ लेखक शाफ़े किदवई ने कहा कि राही मासूम रज़ा ने इस शोध प्रबंध में तब तक उपलब्ध नई से नई साहित्यिक शोध-दृष्टि का इस्तेमाल किया है। दास्तान साहित्य का भारतीय संदर्भों में उनका अध्ययन अत्यंत महत्वपूर्ण है और पुरानी साहित्यिक-मौखिक परंपराओं के सारतत्त्व को प्रस्तुत करता है।


कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि जामिया मिल्लिया इस्लामिया के हिन्दी विभाग के प्रोफ़ेसर नीरज कुमार ने कहा कि उर्दू ने भाषा को दरबार (कोर्ट) से निकालकर व्यापक जनसमाज तक पहुँचाया। उन्होंने इस शोध के उद्देश्य को रेखांकित करते हुए राही को उद्धृत किया, जिसमें वे कहते हैं - ‘‘मैं इस दास्तान का अध्ययन करना चाहता हूँ। इन दास्तानों की धरती खींची जा रही है। दास्तानों में जो तिलिस्म है, उसके नीचे जो जीवन है, उसे हमारे लिए, हिन्दुस्तान के लिए और संस्कृति के लिए बचाने की ज़रूरत है’’। उन्होंने कहा कि उत्तर सत्य (पोस्ट ट्रुथ) के इस दौर में भावों के सहारे तर्क को अपदस्थ करने की कोशिश की जा रही है, किन्तु हमें ध्यान रखना होगा कि तर्क के सहारे भी भावों को सेक्यूलर बनाया जा सकता है’।


इसी क्रम में श्री अजय बिसारिया ने कहा कि भाषा और संस्कृति का सतत विकास होता है। संस्कृति किसी एक पुराने समय बिन्दु पर ठहरी हुई चीज़ नहीं होती। उन्होंने कहा कि जब हिटलर ने नस्लवाद के विचार को फैलाने का प्रयास किया तो हिन्दी के महान अध्येताओं और साहित्यकारों ने उसे तोड़ने का काम किया, जिनमें भगवतशरण उपाध्याय, वासुदेवशरण अग्रवाल, हजारीप्रसाद द्विवेदी आदि शामिल थे। उन्होंने बताया था कि मानव-सभ्यता का विकास सांस्कृतिक आदान-प्रदान से हुआ और संस्कृति अविमिश्र नहीं होती। बिसारिया ने कहा कि राही ने अपने इस शोध-प्रबंध में इस बात को तो आगे बढ़ाया ही, किंतु उन्होंने इस बात पर भी ध्यान आकर्षित किया कि संस्कृति का दायरा व्यापक होता है, उसे केवल धर्म तक सीमित नहीं किया जा सकता। संस्कृति का आधार भौगोलिक होता है। इन दास्तानों में अरब और ईरान नहीं, बल्कि रामायण, महाभारत से लेकर वाजिद अली शाह तक के सांस्कृतिक विकास को स्पष्टतः देखा जा सकता है। उन्होंने सीमा सग़ीर के अनुवाद की प्रशंसा करते हुए कहा कि ऐसा कम ही होता है कि शोध-प्रबंध रचनात्मकता का आभास दे।


अंग्रेज़ी के प्रोफेसर आसिम सिद्दीक़ी ने कहा कि इस पुस्तक में दास्तानगो किसी भी चीज़ को एक्सप्लेन नहीं करता, बल्कि पाठक और दास्तानगो साथ-साथ चलते हैं। उन्होंने कहा कि दास्तानों में आई कुश्ती को राही रुस्तम और सोहराब की परंपरा से नहीं, बल्कि बाली-सुग्रीव और भीम-जरासंघ से जोड़कर देखते हैं, इस दास्तान में वे दजला-फ़रात की भूमि नहीं, बल्कि गंगा-जमुना के दो आब के जीवन को तलाशते हैं। इस रूप में राही दास्तान के जीवन को हिन्दुस्तानी जीवन के रूप में चिह्नित करते हैं और यही भारतीयता की पहचान है।


प्रोफ़ेसर सग़ीर अफ़राहीम ने राही के शोध की बारीकियों को उजागर करते हुए प्रोफ़ेसर सीमा सगीर के नौ वर्षों के अनथक परिश्रम का जिक्र किया। उन्होंने बताया कि सीमा जी ने प्रोफे़सर के.पी. सिंह द्वारा उपलब्ध कराई गई काँटे की छपाई वाली टंकित प्रति, जिस पर लगभग समान परिमाण के राही के करेक्शन भी थे, को पढ़ने में अपनी आँखों की रोशनी गँवा दी। इसके अतिरिक्त मूल नामों और विवरणों की सत्यता को बचाये रखने के लिए पटना के पुस्तकालय में उपलब्ध दस हज़ार पृष्ठों वाली ‘दास्तान-ए-तिलिस्म होशरूबा’ को भी आद्यंत पढ़ा।


अपने स्वागत-भाषण में संकाय के अधिष्ठाता प्रो. इम्तियाज़ हसनैन ने राही की विरासत और सीमा सग़ीर के घोर परिश्रम का स्मरण किया। शिक्षकों एवं विद्यार्थियों से खचाखच भरे हाल में कार्यक्रम का सफल संचालन डा. शाहबाज़ अली खान ने किया। 

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अमुवि के पूर्व छात्र के अचानक निधन पर गहरा शोक

अलीगढ़ 18 अक्टूबरः अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय बिरादरी में विश्वविद्यालय के पूर्व छात्र, 1979 बैच के इंजीनियरिंग स्नातक, टेबल टेनिस और जिमखाना क्लब के पूर्व कप्तान और विश्वविद्यालय के 1976 बैच के कलर होल्डर श्री हबीब उन नबी (64) का हृद्यघात से आकस्मिक निधन हो गया। वह 17 अक्टूबर को सर सैयद हॉल (नार्थ) में आयोजित सर सैयद दिवस समारोह के मानद अतिथि थे


उनके निधन पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए, एएमयू के कुलपति प्रोफेसर तारिक मंसूर ने कहा कि हबीब उन नबी  उनके परिवार और दोस्तों के लिए एक बड़ी क्षति है और मैं अपनी हार्दिक संवेदना व्यक्त करता हूं और ईश्वर से उन्हें इस आघात को सहन करने की शक्ति प्रदान करने की प्रार्थना करता हूं।


उन्होंने कहा कि इंजीनियर हबीबुन नबी इस विश्वविद्यालय के एक विशिष्ठ पूर्व छात्र थे जिन्होंने एक छात्र के रूप में एएमयू में रहने के दौरान खेल के मैदान में महत्वपूर्ण उपलब्धियां हासिल कीं। उनके निधन से एएमयू ने एक लोकप्रिय पूर्व छात्र को खो दिया है। वह हमेशा अपनी मातृ संस्था के लिए खड़े रहते थे।


इंजीनियर हबीबुन नबी ने कतर में अपना अधिकांश जीवन जल एवं बिजली मंत्रालय, कतर में परियोजना प्रबंधक के रूप में सेवा देते हुए बिताया, और विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए उन्हें कई सम्मान और पुरस्कार प्राप्त हुए, जिनमें भारत सरकार द्वारा प्रवासी भारतीय सम्मान पुरस्कार, ओमान की सल्तनत द्वारा सुल्तान काबूस पुरस्कार, उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा उर्दू साहित्य पुरस्कार, बिहार सरकार द्वारा उर्दू तहरीक के लिए अशरफ कादरी पुरस्कार, दिल्ली द्वारा भारत गौरव पुरस्कार और वन इंडिया एसोसिएशन द्वारा कतर का सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी का पुरस्कार शामिल है।


उन्होंने 2022 के लिए फीफा विश्व कप आयोजन समिति, कतर के सदस्य, भारतीय खेल केंद्र, (भारतीय दूतावास), कतर के महासचिव के रूप में भी कार्य किया और उन्हें भारतीय सांस्कृतिक केंद्र, भारतीय खेल केंद्र, भारतीय समुदाय बेनवॉलेंट फोरम (भारत का दूतावास), कतर की आजीवन सदस्यता से सम्मानित किया गया।


उनके परिवार में पत्नी, एक बेटा और एक बेटी हैं।


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सर सैयद दिवस पर नाटक व अन्य कार्यक्रमों का आयोजन

अलीगढ़, 18 अक्टूबरः यदि आप अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के छात्र, शिक्षक, पूर्व छात्र या पूर्व छात्रा हैं तो आप अवश्य ही ‘अलीगढ़ आंदोलन’ की कहानी से परिचित होंगे जिसमें मुहम्मडन एंग्लो-ओरिएंटल (एमएओ) कॉलेज की स्थापना सब से प्रमुख घटना है, जो बाद में अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय बन गया। लेकिन केवल इसलिए कि आप पहले से ही यह कहानी जानते हैं, इसका मतलब यह नहीं है कि इसे दोबारा नहीं बताया जाना चाहिए। और यही वह बिंदु है जिस पर ज़ोर देने के लिए अमुवि के ड्रामा क्लब द्वारा प्रोफेसर एफएस शीरानी (समन्वयक, सांस्कृतिक शिक्षा केंद्र) द्वारा लिखित और मुज़म्मिल हयात भवानी द्वारा निर्देशित नाटक ‘सर सैयद’ का मंचन किया गया जिसमें पहले से सुनी गई कहानी को दोहराया गया है ताकि दर्शकों को समाज में वांछित परिवर्तन के लिए प्रेरित किया जाये।


नाटक ‘सर सैयद’, जिसका मंचन कैनाडी हाल सभागार में 20 अक्टूबर तक प्रतिदिन किया जायेगा जो हमें याद दिलाता है कि कैसे 1857 कि क्रांति के बाद की प्रतिकूल परिस्थितियों ने सर सैयद अहमद खान के जीवन पर गहरा प्रभाव डाला, उन्हें एमएओ कॉलेज की स्थापना पर काम करने और निराशा के समय में भारतवासियों को आशा प्रदान करने के लिए प्रेरित किया।


प्रो एफ एस शीरानी, तल्हा ठाकुर, शाहजैब खान, जैद अहमद खान, अदनान खुर्रम, रिजवान खान, अनीजा अख्तर और मारिया अंसारी द्वारा प्रस्तुत यह नाटक मिर्जा गालिब से लेकर मोहसिनुल मुल्क तक के ऐतिहासिक व्यक्तित्वों को चित्रित करता है, जो कहानी के अभिन्न अंग हैं। यह गालिब के साथ सर सैयद की मुलाकात को भी दर्शाता है जो उनके लिए एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हुआ जब कवि ने उन्हें अतीत को भूलने और वर्तमान विकास पर ध्यान केंद्रित करने और पश्चिम की तेज प्रगति को ध्यान में रखने के लिए कहा, जिसने सर सैयद को सामाजिक सुधार कार्यों के लिए प्रेरित किया।


प्रो शीरानी ने कहा कि बड़ी संख्या में मंच के पीछे काम करने वाले क्रू के साथ मिलकर कलाकारों द्वारा 29 उपनाटक प्रस्तुत किये गए तथा तीन घंटे के लंबे नाटक में सर सैयद के व्यक्तित्व एवं उनके जीवन के कई महत्वपूर्ण पहलुओं पर प्रकाश डाला गया, जिसका उद्देश्य युवाओं को आधुनिक समय के अनुसार सर सैयद के कार्यों को दोहराने और उनके आंदोलन को जारी रखने के लिए प्रेरित करना है।


उन्होंने कहा कि ड्रामा क्लब इस नाटक के माध्यम से लगभग एक दशक से सर सैयद के जीवन के बारे में देश भर में प्रदर्शन के साथ जनता को शिक्षित कर रहा है।


इस बीच, एएमयू के विभिन्न विभागों, आवासीय हॉलों और स्कूलों ने भी सर सैयद अहमद खान की 205 वीं जयंती को मनाने करने के लिए सर सैयद दिवस पर विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किये।


राजनीति विज्ञान विभाग में ‘सर सैयद अहमद खानः जीवन और विरासत’ पर एक संगोष्ठी आयोजित की गई जिसमें शिक्षकों ने सर सैयद के विचारों, शिक्षाओं, दर्शन, कार्य और मिशन पर ध्यान देने की आवश्यकता पर बल दिया।


अध्यक्षीय भाषण में, प्रोफेसर इकबालुर रहमान (अध्यक्ष, राजनीति विज्ञान विभाग) ने देश और दुनिया भर में सर सैयद की तर्कसंगतता और आधुनिकता को फैलाने के लिए एएमयू समुदाय का आह्वान किया। प्रो अर्शी खान ने ‘सर सैयद के आधुनिक शिक्षा के मिशन और समकालीन समय में इसकी प्रासंगिकता’ पर बात की, प्रोफेसर मोहम्मद मुहिबुल हक ने ‘सर सैयद के राजनीतिक विचार और वर्त्तमान में उनकी प्रासंगिकता’ को चित्रित किया, डॉ नगमा फारूकी ने ‘अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय में महिला शिक्षाः ऐतिहासिक और समकालीन परिप्रेक्ष्य में’ पर बात की, डॉ फसीह राग़िब गौहर ने ‘सर सैयद और अल्लामा इकबालः एक तुलनात्मक विश्लेषण’ पर बात की, डॉ एम राहत हसन ने ‘सर सैयद और उनके सहयोगी’ पर एक वार्ता दी और डॉ इरफान उल हक ने ‘सर सैयद और भारतीय विद्रोह’ पर चर्चा की।


कार्यक्रम का संचालन डॉ मोसैब अहमद ने किया और परवेज आलम ने धन्यवाद ज्ञापित किया। आईपीएल क्रिकेटर इम्तियाज अहमद और आईएएस अधिकारी, अमित आसेरी (नगर आयुक्त, अलीगढ़) अनिवासी छात्र केंद्र (एनआरएससी) में सर सैयद दिवस समारोह के मुख्य अतिथि थे, जहां डॉ सिराज उद्दीन हाशमी (अध्यक्ष, हाशमी ग्रुप ऑफ एजुकेशन), आईएएस अधिकारी अतुल वत्स और मोहम्मद बिलाल (उप निदेशक, वायु सेना स्टेशन, फरीदाबाद) मानद अतिथि थे।


आवासीय छात्रावास सर शाह सुलेमान हॉल में आयोजित समारोह में मुख्य अतिथि, प्रो एम अल्तमश सिद्दीकी (डीन, इंजीनियरिंग तथा प्रौद्योगिकी संकाय) ने बताया कि कैसे सर सैयद ने अपनी बोधगम्य आँखों और दूरदर्शी दिमाग से, 1857 के बाद के भारत में जीवित रहने की रणनीति तैयार की और भारतीयों को आधुनिक शिक्षा को अपनाने में मदद की।


अब्दुल्ला हॉल में सर सैयद दिवस समारोह में भाग लेते हुए, मुख्य अतिथि, प्रो केवीएसएम कृष्णा (कुलपति, मंगलायतन विश्वविद्यालय) ने सर सैयद के परंपरा और आधुनिकता के बीच सामंजस्य के बारे में बात की।आफताब हॉल में, कार्यक्रम के मुख्य अतिथि प्रो एम यू रब्बानी (अध्यक्ष, कार्डियोलॉजी विभाग) ने सर सैयद के सुधारवादी आंदोलन और मिशनरी उत्साह पर चर्चा की।


अमित कुमार भट्ट (एडीएम-एफ/आर, अलीगढ़) ने वर्तमान परिदृश्य में सर सैयद के संदेश की स्थायी विरासत के बारे में बताया। वह बीआर अंबेडकर हॉल के सर सैयद दिवस समारोह में मुख्य अतिथि थे, जिसमें विशिष्ट अतिथि के रूप में न्यायमूर्ति समर विशाल (अतिरिक्त जिला न्यायाधीश) शामिल थे।


सर सैयद हॉल-नॉर्थ के कार्यक्रम में मुख्य अतिथि प्रोफेसर काजी मजहर अली (पूर्व डीन, विज्ञान संकाय) ने आधुनिक दुनिया में सहिष्णुता और विविधता पर सर सैयद के विचारों के महत्व पर चर्चा की।


सर सैयद हॉल-साउथ में समारोह के मुख्य अतिथि के रूप में बोलते हुए, इकरार हुसैन (उपाध्यक्ष, क्विप्पो ऑयल एंड गैस इंफ्रा लिमिटेड, नई दिल्ली) ने इस बारे में बात की कि कैसे सर सैयद ने पूरे भारतीय समाज की जरूरतों के बारे में बात की। डीपी पाल (पीसीएस अधिकारी और एडीएम-ई, अलीगढ़) ने सर सैयद को एक स्वतंत्र विचारक, प्रशासक, सुधारक और शिक्षाविद के रूप में याद किया। वह सर रॉस मसूद हॉल में सर सैयद दिवस समारोह के मुख्य अतिथि थे।


सरोजनी नायडू हॉल समारोह में, मुख्य अतिथि, डॉ बुशरा बानो (आईआरटीएस, आईपीएस और डिप्टी कलेक्टर, फिरोजाबाद) ने सर सैयद की पुस्तक ‘असबाब-ए-बगावत-ए-हिंद’ (1857 के भारतीय विद्रोह के कारण) पर प्रकाश डाला। प्रो शमीम जे रिज़वी (पूर्व डीन, मेडिसिन संकाय) और डॉ नगमा अब्बासी (संस्थापक और सीईओ नेक्स्टजेन लाइफ साइंसेज प्राइवेट लिमिटेड) मानद अतिथि थे।


हादी हसन हॉल कार्यक्रम के मुख्य अतिथि, श्री इंद्र विक्रम सिंह (जिला मजिस्ट्रेट, अलीगढ़) और मानद अतिथि डॉ शम्स तबरेज़ (संस्थापक और प्रबंध निदेशक, क्रॉसरोड्स समूह, दुबई) और डॉ शिवम शर्मा (आईआरटीएस सीनियर डीओएम, उत्तरी रेलवे) ने आधुनिक शिक्षा को अपनाने के लिए जनता को समझाने के लिए सर सैयद के प्रयासों पर चर्चा की।


प्रो शगुफ्ता अलीम (प्रिंसिपल, एके तिब्बिया कॉलेज) और इरम माजिद (निदेशक, इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ आर्बिट्रेशन एंड मेडिएशन) क्रमशः इंदिरा गांधी हॉल में मुख्य अतिथि और मानद अतिथि थीं। उन्होंने भारतीयों की सामाजिक और आर्थिक स्थिति के उत्थान के लिए सैयद अहमद खान के अथक प्रयासों पर विचार-विमर्श किया।


सर जियाउद्दीन हॉल समारोह के मुख्य अतिथि प्रो एम मोहसिन खान (वित्त अधिकारी); मानद अतिथि, श्री श्वेताभ पांडे (सीओ तृतीय, अलीगढ़) और विशेष अतिथि, कर्नल ताहिर मुस्तफा (प्रमुख, सीमा प्रकोष्ठ, विदेश मंत्रालय, नई दिल्ली) ने सर सैयद के शैक्षिक सुधारों की अमिट छाप का ज़िक्र किया।


प्रो एम मोहसिन खान ने बीबी फातिमा हॉल में भी समारोह में मुख्य अतिथि और अरुण कुमार गुप्ता (अतिरिक्त आयुक्त, नगर निगम) ने मानद अतिथि के रूप में भाग लिया।


बेगम अजीजुन निसा हॉल में मुख्य अतिथि एस हसन कमाल (सीईओ, ग्लोबल बिजनेस कॉर्पाेरेशन, अटलांटा, यूएसए) और मानद अतिथि, प्रोफेसर सैयदा नुज़हत ज़ेबा (पूर्व डीन, कला संकाय) ने कहा कि सर सैयद ने शिक्षा को हथियार के रूप में मान्यता दी जिसके माध्यम से भारतीय नुकसान की स्थिति से उभर सकते हैं और शेष विश्व के साथ प्रतिस्पर्धा कर सकते हैं।


दीपक कुमार (आईपीएस अधिकारी और डीआईजी, अलीगढ़) ने एएमयू के छात्रों से सर सैयद के शिक्षा सुधार के मिशन को देश के सभी कोनों में आगे बढ़ाने का आग्रह किया। वह मोहसिनुल मुल्क हॉल में सर सैयद दिवस समारोह के मुख्य अतिथि के रूप में बोल रहे थे।


विकारुल मुल्क हॉल में मुख्य अतिथि सैयद इकराम रिज़वी (संयुक्त सचिव-शिक्षा, भारत सरकार) ने कहा कि सर सैयद ने शैक्षिक और सामाजिक सुधारों पर जोर दिया और ओरिएंटल और पश्चिमी दुनिया के बीच की खाई को पाट दिया। मोहम्मद हबीब हॉल के सर सैयद दिवस समारोह में मुख्य अतिथि प्रोफेसर मोहम्मद अशरफ (डीन, विज्ञान संकाय) ने सर सैयद के धर्मनिरपेक्ष और समावेशी विचारों पर विचार-विमर्श किया।


बेगम सुल्तान जहां हॉल समारोह में मुख्य अतिथि, जहांजेब अख्तर (आईआरएस अधिकारी और प्रधान आयकर आयुक्त, वित्त मंत्रालय) ने अलीगढ़ आंदोलन को आम भारतीयों के सामाजिक, राजनीतिक और शैक्षिक पहलुओं में सुधार के उद्देश्य से एक व्यवस्थित आंदोलन के रूप में चर्चा की। इस अवसर पर प्रो वीना माहेश्वरी (पैथोलॉजी विभाग) और प्रो एम यू रब्बानी (कार्डियोलॉजी विभाग) मानद अतिथि के रूप में न्यायमूर्ति सिद्धार्थ सिंह (अतिरिक्त जिला न्यायाधीश, अलीगढ़) के साथ सम्मानित अतिथि थे।


डॉ आकिब जावेद (श्रम और रोजगार मंत्रालय) ने मुख्य अतिथि के रूप में नदीम तरीन हॉल में कार्यक्रम में भाग लिया और मोहम्मद नदीम (सीईओ, मार्क इम्पोर्ट एक्सपोर्ट्स) अल्लामा इकबाल बोर्डिंग हाउस में मुख्य अतिथि थे।


जुनैद अहमद (आईएएस अधिकारी और सीडीओ, झांसी) एसटीएस स्कूल में सर सैयद दिवस कार्यक्रम के मुख्य अतिथि थे। मुनव्वर हाज़िक (अमीरात एयरलाइंस) इस अवसर पर मानद अतिथि थे।


स्कूल की प्रिंसिपल डॉ नायला राशिद ने कहा कि अहमदी स्कूल में सर सैयद की जयंती मनाने के लिए सप्ताह भर चलने वाले कार्यक्रम में साहित्यिक, खेल और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किये गए।


इसी प्रकार, एबीके हाई स्कूल के छात्रों ने सर सैयद दिवस मनाने के लिए कई कार्यक्रमों में भाग लिया। मुख्य समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में सैयद मुहम्मद अमीन (अध्यक्ष, एबीईएस, अलीगढ़) और सैयद मुहम्मद अशरफ (उपाध्यक्ष, एबीईएस, अलीगढ़) और मानद अतिथि के रूप में प्रोफेसर नईमा खातून (प्रिंसिपल, वीमेन्स कॉलेज) शामिल हुईं।


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एएमयू में हैंड वाशिंग डे पर कार्यक्रम


अलीगढ़, 18 अक्टूबरः अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के जवाहरलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज के सामुदायिक चिकित्सा विभाग के ग्रामीण स्वास्थ्य प्रशिक्षण केंद्र (आरएचटीसी), जवां में ‘वैश्विक हाथ धुलाई दिवस’ मनाने के लिए एक स्वास्थ्य चर्चा और अन्य जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए गए। ।


हाथों को साफ करने की आवश्यकता पर बोलते हुए, प्रो सायरा मेहनाज़ (अध्यक्ष, सामुदायिक चिकित्सा विभाग) ने कहा कि रोगाणु एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में या लोगों में फैल सकते हैं जब वे बिना हाथ धोए आंख, नाक और मुंह को छूते हैं और हाथों को साफ किए बिना खाना बनाते या खाते हैं।


वह एसएमपी माध्यमिक विद्यालय, जवां, में जागरूकता कार्यक्रम में बोल रही थीं जो आरएचटीसी क्षेत्र अभ्यास क्षेत्र के अंतर्गत आता है।डॉ उज़मा इरम (सदस्य-प्रभारी, आरएचटीसी) ने ‘यूनिवर्सल हैंड हाइजीन के लिए एकजुट’ विषय पर बात की और बच्चों को हाथ की स्वच्छता के महत्व पर जागरूक किया। स्कूल के छात्रों को संबोधित करते हुए, डॉ असमा आफताब और डॉ अबसार अहमद ने बताया कि कैसे साबुन और पानी से हाथ धोना कीटाणुओं को दूर करने, बीमार होने से बचने और दूसरों को कीटाणुओं के प्रसार को रोकने का सबसे अच्छा तरीका है।


तबस्सुम नवाब ने जागरूकता पोस्टर बनाने के लिए प्रशिक्षुओं का मार्गदर्शन किया।


इसी प्रकार, अलीगढ़ के अमीर निशा स्थित ज्योति किरण फाउंडेशन एजुकेशनल सेंटर में गृह विज्ञान विभाग के शिक्षकों और छात्रों ने बच्चों के लिए जागरूकता कार्यक्रम के साथ इस अवसर का अवलोकन किया। प्रो फरजाना अलीम (अध्यक्ष, गृह विज्ञान विभाग) ने कहा कि स्नातक छात्रों ने हाथ धोने के तरीकों का प्रदर्शन किया और छात्रों को अपने आसपास के वातावरण को साफ रखने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने घर और समुदाय में हाथों की स्वच्छता को बढ़ावा देने की आवश्यकता के बारे में भी बताया।


 

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