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डॉक्टरों ने पांच साल के बच्चे में ‘पॉपलाइटल आर्टरी ब्लॉक‘ को ठीक करने के लिए की दुर्लभ सर्जरी| JNMC


अलीगढ मीडिया डॉट कॉम, अलीगढ| अलीगढ मुस्लिम विश्वविद्यालय के जवाहरलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज (जेएनएमसी) के कार्डियोथोरेसिक सर्जरी विभागके डाक्टरों ने पांच वर्षीय मोहम्मद के पैर में दुर्लभ समस्या  ‘पापलाइटल आर्टरी ब्लॉक‘ का सर्जरी द्वारा समाधान कर बच्चे को असहनीय पीड़ा से निजात दिलाने में कामयाबी हासिल की है।

कार्डियोथोरेसिक सर्जरी विभाग के अध्यक्ष, प्रोफेसर मोहम्मद आजम हसीन, जिन्होंने डा शमायल रब्बानी और डा सैफ अलीम की टीम के साथ यह सर्जरी अंजाम दी, ने कहा कि इतने छोटे बच्चों के लिए पोपलीटल आर्टरी ब्लॉक विकसित होना बहुत दुर्लभ है। सर्जरी और भी जटिल है क्योंकि किसी भी विफलता के परिणामस्वरूप पैर को नुकसान हो सकता है। लेकिन, अच्छी बात यह है कि जेएनएमसी में बहु-विषयक टीमें अपनी व्यापक विशेषज्ञता के साथ इन प्रक्रियाओं को सफलतापूर्वक करने में सक्षम हैं। डाक्टर नदीम रजा ने रोगी को एनेस्थीसिया दिया।

प्रोफेसर आज़म हसीन ने बताया कि इस प्रक्रिया में एक चीरा लगाकर एंजियोग्राम और कैमरे का उपयोग करके उस क्षेत्र का पता लगाना शामिल था जहाँ धमनी संकुचित हो रही थी। फिर हमने पोपलीटल धमनी को अलग कर मांसपेशियों, कण्डरा या बैंड को संपीड़न से मुक्त किया।

सर्जनों की टीम को बधाई देते हुए, अमुवि कुलपति, प्रोफेसर तारिक मंसूर ने कहा कि उत्तर प्रदेश और देश के अन्य हिस्सों के मरीज अपने उन्नत चिकित्सा बुनियादी ढांचे, बेहतर संचार और सुविधाजनक फालो-अप के लिए जेएनएमसी को पसंद करते हैं।

फैकल्टी ऑफ मेडिसिन के डीन, प्रोफेसर एम.यू रब्बानी ने कहा कि डाक्टरों और सर्जनों की हमारी टीम जटिल प्रक्रियाओं के लिए एक व्यापक योजना के साथ प्रत्येक मरीज के मामले की समीक्षा करती है। जेएनएमसी देश के शीर्ष पायदान के अस्पतालों में से एक है, जहां ये सर्जरी सफलतापूर्वक की जाती है।

जेएनएमसी के प्रिंसिपल, प्रोफेसर राकेश भार्गव ने जोर देकर कहा कि जेएनएमसी आशा का प्रतीक है क्योंकि निचले आर्थिक तबके के मरीज यहां बहुत मामूली लागत पर अपना इलाज करवा सकते हैं।

मोहम्मद, जिसे अब ठीक होने के बाद बिहार में उसके मूलस्थान सासाराम लौटने की छुट्टी दे दी गई है, पैर में भारीपन, पैर के निचले हिस्से में ऐंठन और सूजन के बाद स्थानीय चिकित्सकों और बिहार और उत्तर प्रदेश के कई अस्पतालों में ले जाया गया। परन्तु कहीं और उसकी समस्या का समाधान संभव न होने के बाद उसे जेएनएमसी लाया गया था।  

रेडियोलॉजी विभाग में डॉ महताब अहमद द्वारा की गई सीटी एंजियोग्राफी के बाद उसके पैर में पॉप्लिटियल आर्टरी ब्लॉक का पता चला, जिसके लिए तत्काल सर्जिकल प्रक्रिया की आवश्यकता थी।

जिसके बाद चिकित्सकों की टीम द्वारा आपरेशन को सफलतापूर्वक अंजाम दिया गया।

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एएमयू के मकैनिकल इंजीनियरिंग विभाग में हाई ऐश कोल् पर वेबिनार का आयोजन

अलीगढ़, नवंबर 15ः अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के ज़ाकिर हुसैन कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी के मैकेनिकल इंजीनियरिंग विभाग के तत्वाधान में ‘फ्लूडाइज्ड बेड गैसीफिकेशन ऑफ हाई-ऐश कोल‘ पर एक वेबिनार का आयोजन किया गया।

भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी), कानपुर के मैकेनिकल इंजीनियरिंग विभाग के डा शांतनु डे अपने मुख्य भाषण में उच्च दक्षता के साथ स्वच्छ कोयला प्रौद्योगिकियों को विकसित करने और ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन को कम करने की आवश्यकता पर जोर दिया और बताया कि कई देशों में बिजली उत्पादन के चालक क रूप में आज भी कोयला प्राथमिक क्यों बना हुआ है।

उनके और उनके सहकर्मियों द्वारा विकसित एक स्वदेशी रूप से डिजाइन की गई गैसीफायर इकाई के कार्य पर बोलते हुए डा शांतनु ने कहा कि गैसीकरण तापमान में महत्वपूर्ण कमी के साथ नाइट्रोजन के आक्साइड का उत्पादन कैसे कम किया जा सकता है और गैसीफायर से उत्पादित गैस का विभिन्न अनुप्रयोगों में उपयोग किया जा सकता है पर विस्तार से प्रकाश डाला।

डा शांतनु ने ओपनफोम का उपयोग करते हुए एक विस्तृत संख्यात्मक विश्लेषण प्रस्तुत किया और अशांत दहन माडलिंग के लिए तकनीकों का प्रदर्शन करते हुए कहा कि इसका उद्देश्य एक स्थिर और लगातार गैसीकरण संचालन प्राप्त करना है और तुल्यता अनुपात और भाप एवं कोयला अनुपात के विभिन्न मूल्यों के लिए प्रदर्शन का अनुकूलन करना है।

बाद में उन्होंने छात्रों और शिक्षकों के साथ एक संवादात्मक सत्र में सवालों के जवाब दिए। मैकेनिकल इंजीनियरिंग विभाग के अध्यक्ष, प्रोफेसर एम मुज़म्मिल ने स्वागत भाषण में निम्न-कार्बन प्राकृतिक गैस की आवश्यकता और इसके महत्वपूर्ण प्रभाव पर चर्चा की।

प्रोफेसर शाह शाहूद आलम ने धन्यवाद ज्ञापित किया और डॉ सनाउर  रहमान ने कार्यक्रम का संचालन किया। कार्यक्रम में देश और दुनिया भर से शिक्षकों और छात्रों ने भाग लिया।

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