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तरल यूरिया के प्रयोग से नहीं होता है किसी प्रकार का प्रदूषण, प्रकृति के लिये वरदान

अलीगढ मीडिया डॉट कॉम,अलीगढ़ 05 नवम्बर 2022 (सू0वि0) नैनो तरल यूरिया अर्थात आधा लीटर की शीशी किसानों के लिये वरदान के समान है। यह एक बोरी यूरिया से कहीं ज्यादा प्रभावी ढ़ंग से काम करती है। नैनो तरल यूरिया से सिर्फ उत्पादन ही नहीं बढ़ता है बल्कि फसल की गुणवत्ता भी अच्छी होती है। यह दानेदार यूरिया से कहीं अधिक सस्ती भी है। नैनो यूरिया उपज बढ़ाने का एक बेहतर साधन है। यह उपज की गुणवत्ता को भी बढ़ाती है।

          उक्त उद्गार इफको के राज्य विपणन प्रबन्धक अभिमन्यु राय ने एक दिवसीय मंडलीय सहकारी संगोष्ठी में व्यक्त किये। उन्होंने कहा कि फसलों में नाइट्रोजन की कमी को पूरा करने के लिये किसान यूरिया का प्रयोग करते हैं। अभी तक यूरिया सफेद दाने के रूप में बोरी में उपलब्ध है, जिसके इस्तेमाल से आधे से कम हिस्सा पौधों को मिलता है। दानेदार यूरिया का बहुत बड़ा भाग मिट्टी और हवा में चला जाता है। नैनो तरल यूरिया विभिन्न प्रकार की फसलों पर अच्छे से परीक्षण करने के उपरान्त किसान भाईयों तक पहुॅचाया जा रहा है। आलू, धान, गेंहू, गन्ना विभिन्न प्रकार की सब्जियों, दलहन-तिलहन समेत सभी फसलों पर अच्छे परिणाम प्राप्त हुए हैं। आधा लीटर तरल यूरिया की शीशी पूरे एक एकड़ खेत के लिये काफी है। इसके प्रयोग से पर्यावरण, जल एवं मिट््टी का भी प्रदूषण नहीं होता है। अभिमन्यु राय बताते हैं कि नैनो यूरिया का अविष्कार दानेदार यूरिया की खामियों से जनमानस, फसल, मिट््टी एवं पर्यावरण को सुरक्षित रखने के लिये किया गया है।        


कैसे करें प्रयोग:

नैनो तरल यूरिया का प्रयोग फसल की पत्तियों पर छिड़काव कर करते हैं। इसके लिये एक लीटर पानी में 02-04 मिलीलीटर नैनो यूरिया को मिलाकर फसल पर दो बार छिड़काव करते हैं। सरल भाषा में 15 लीटर की टंकी में 30-60 मिलीलीटर नैनो तरल यूरिया मिलाकर एक फसल पर दो बार छिड़काव करते हैं। जब हम नैनो यूरिया का फसल पर छिड़काव करते हैं तो पत्तियों के माध्यम से यह पौधों में प्रवेश कर उत्पादन एवं उत्पादकता दोनों को बढ़ाती है।


ट्रांसपोटेशन एवं रखरखाव:

  दानेदार यूरिया के 10 बैग लाने ले जाने के लिये टैªक्टर या अन्य वाहन को लाना होता था। वहीं इसको रखने के लिये अधिक स्थान की आवश्यकता होती है। लेकिन तरल यूरिया की 10 शीशियों को किसान मोटर साइकिल, स्कूटर या साइकिल पर झोला लटकाकर आसानी से ले जा सकता है और इसे छोटी से अलमारी में रख आसानी से रख सकते हैं।


          गोष्ठी में उप महाप्रबन्धक विपणन लखनऊ जसवीर सिंह ने बताया कि इफको स्थापना दिवस 03 नवंबर के शुभ अवसर पर इफको नैनो यूरिया के बिक्री मूल्य 240 रूपये से घटाकर 225 रूपये कर दिया गया है। जनपद अलीगढ़ में प्राप्त होने वाली एनपीकेएस 20,20,00,13 की 50 किलो की बोरी को 1400 रूपये से घटाकर 1350 मूल्य कर दिया गया है यद्यपि बोरे पर 1400 मूल्य प्रिंट रहेगा।


          बीके निगम ने जनपद के आंकड़े प्रस्तुत करते हुए बताया गया कि अलीगढ़ जनपद में लक्ष्य के सापेक्ष 115 प्रतिशत आपूर्ति की गई है। उपायुक्त उपनिबंधक अरविंद दुबे ने बताया कि इफको एक 57 सदस्य संस्था से बढ़कर आज विश्व की सबसे बड़ी सहकारी संस्था है और इसके विपणन तंत्र द्वारा किसानों को ना सिर्फ अच्छी उर्वरक आपूर्ति किए जा रहे हैं बल्कि किसानों को उनकी लाभ देयता बढ़ाने के प्रति जागरूक भी किया जा रहा है। संयुक्त कृषि निदेशक राकेश बाबू ने आभार जताते हुए बताया कि इफको देश के किसानों के लिए गौरवशाली संस्था है। मण्डल की आपूर्ति में इफको आपूर्ति से किसानों को लाभ होता है।


          इस अवसर पर संगोष्ठी में उप महाप्रबंधक आगरा एस के सिंह, उपनिदेशक भूमि संरक्षण हरेंद्र मिश्रा, उप कृषि निदेशक यशराज सिंह, डा0 हसंराज सिंह, जिला कृृषि अधिकारी अभिनन्दन सिंह, आर0के0 सिंह, भूमि संरक्षण अधिकारी दिव्या मौर्या, जिला कृषि रक्षा अधिकारी अमित कुमार समेत मण्डल के सहायक आयुक्त एवं सहायक निबंधक सहकारिता, उप संभागीय कृषि अधिकारी, जिला सहकारी बैंकों के महाप्रबंधक, इफको के क्षेत्र अधिकारी एवं इफको की सहयोगी संस्थाओं के अधिकारी मौजूद रहे। कार्यक्रम का आयोजन एवं संचालन इफको के क्षेत्रीय प्रबंधक अलीगढ़ बी के निगम द्वारा किया गया। कार्यक्रम को सफल बनाने में उमेश कुमार शर्मा का अभूतपूर्व सहयोग रहा है। 

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