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हरदुआगंज मे अवैध मिट्टी खनन माफियाओ पर राजस्वटीम की छापेमारी, पांच ट्रैक्टर-ट्राली सीज

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अलीगढ मीडिया डॉट कॉम,हरदुआगंज/अलीगढ |पर्यावरण संरक्षण के लिए सरकार भले ही लाख प्रयास कर रही हो, मगर पर्यावरण के दुश्मन जमीन का सीना चीरने में तनिक भी गुरेज नहीं कर रहे। ताजा मामला तहसील कोल क्षेत्र का है, जहां मिट्टी माफिया अवैध तरीके से अवैध मिट्टी खनन कर प्रकृति से छेड़छाड़ करने में जुटे थे, मामले की जानकारी पाकर सोमवार को एसडीएम के नेतृत्व मे लेखपाल और पुलिसटीम ने हरदुआगंज के बरौठा के पास छापामार कार्यवाही की और पांच ट्रेक्टर ट्राली को कब्जे में ले लिया, प्रशासन ने की इस कार्रवाई से मिट्टी माफियाओं में हड़कंप है।

जानकारी के मुताबिक देहात क्षेत्र में अवैध मिट्टी खनन की सूचना मिली, जिस पर राजस्व विभाग एवं खनन अधिकारी की टीम बनाकर छापामार कार्रवाई कराई है। छापामार कार्रवाई के दौरान खेत से मिट्टी से खुदाई करती हुई जेसीबी मशीन को मिट्टी माफिया लेकर फरार हो गए| वही राजस्व की टीम ने पांच ट्रेक्टर ट्रालियो को मौक़े से जब्त कर पुलिस थाने हरदुआगंज मे सीज करा दिया है| थाना प्रभारी हरदुआगंज ने बताया के राजस्व अधिकारियो की शिकायत कर पांच ट्रेक्टर-ट्राली अवैध मिट्टी खनन मे जब्त कर सीज कर दिये गए है|


एक खेत की परमीशन की आड़ मे दर्जनों खेतों में हो रहा अवैध मिट्टी का खनन

हरदुआगंज थाने के बरौठा क्षेत्र में विगत कई दिनों से रातों रात मिट्टी का अवैध खनन कृषि योग्य जमीन पर हो रहा है। पूर्व में ग्रामीणों की सूचना पर राजस्व विभाग की टीम ने मौके पर पहुंच जांच पड़ताल की लेकिन इसके बावजूद भी पुलिस की सह पर खनन नहीं रुका| सोमवार को राजस्व टीम ने बरौठा नहर के पास खनन माफियाओ ने एक किसान के खेत से मिट्टी उठाने का लाइसेंस लिया और उसी की आड़ मे आसपास के दर्जनों खेतो से बिना अनुमति के ही मिट्टी खनन कर डाला| फिलहाल राजस्व विभाग की टीम से किसानों को चिन्हित कर उन पर जुर्माना लगाने की तैयारी कर ली है|एसडीएम कोल ने बताया कि बिना अनुमति के मिट्टी खनन करने वाले और अनुमति से ज्यादा मिट्टी खनन की रिपोर्ट के आधार पर पेलेंटी किसानों से बसूली जाएगी |


यह है मिट्टी खनन का लाइसेंस की प्रक्रिया 

सरकार ने साधारण मिट्टी के खनन के लिए चल रही दोहरी व्यवस्था को खत्म कर दिया है। इसके तहत अब 100 घन मीटर तक मिट्टी खनन व परिवहन के लिए भी आनलाइन आवेदन कर लाइसेंस लेना होगा। अभी तक केवल विभागीय वेबसाइट पर आनलाइन पंजीकरण को ही परिवहन परमिट मान लिया जाता था, जबकि 100 घन मीटर से अधिक के खनन व परिवहन के लिए आनलाइन आवेदन कर लाइसेंस जारी किए जाते थे। भूतत्व एवं खनिकर्म विभाग की सचिव व निदेशक ने बताया कि 100 घन मीटर तक और इससे अधिक साधारण मिट्टी के खनन/परिवहन के लिए अब तक अलग-अलग प्रक्रिया थी। 100 घन मीटर से कम मिट्टी के खनन की प्रक्रिया आसान होने के कारण इसका दुरुपयोग हो रहा था। इसे रोकने तथा एकरूपता लाने के लिए साधारण मिट्टी के परिवहन के लिए अब लाइसेंस लेना होगा। उन्होंने बताया कि आनलाइन आवेदन के साथ आवेदक का नाम व पता, मोबाइल नंबर, ई-मेल आइडी, पहचान पत्र, आवेदित भूमि की खतौनी, आवेदित क्षेत्र को प्रदर्शित करते हुए खसरा मानचित्र, आवेदन शुल्क, काश्तकार का सहमति पत्र तथा अन्य आवश्यक अभिलेख अपलोड करने होंगे। आनलाइन आवेदन पत्र की जांच के बाद जिलाधिकारी उसे स्वीकृत या अस्वीकृत करेंगे। स्वीकृत आवेदन करने वालों को आनलाइन लाइसेंस जारी किए जाएंगे|


15 दिन के अंदर होगा स्वीकृत या अस्वीकृत, परिवहन परमिट भी लेना होगा 

आवेदन पत्र पूर्ण करने की तिथि से 15 दिन के अंदर इसे स्वीकृत या अस्वीकृत किया जाएगा। लाइसेंस जारी होने के बाद साधारण मिट्टी के परिवहन के लिए परमिट जारी करने की कार्यवाही निदेशक, भूतत्व एवं खनिकर्म आनलाइन पोर्टल के माध्यम से की जाएगी। खनन लाइसेंस की अवधि, स्वीकृत मात्रा एवं परिवहन के संसाधनों के आधार पर जिलाधिकारी तय करेंगे। स्थानीय स्थिति तथा परिवेश को ध्यान में रखते हुए जिलाधिकारी अतिरिक्त शर्तें भी लगा सकते हैं।

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