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प्रोफेसर शाफे किदवई सर सैयद अकादमी के निदेशक नियुक्त| एएमयू न्यूज़

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अलीगढ मीडिया डॉट कॉम, अलीगढ़| प्रसिद्ध विद्वान, साहित्य अकादमी पुरस्कार विजेता और अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के जनसंचार विभाग में वरिस्ठ शिक्षक प्रोफेसर शाफे किदवई को तीन साल की अवधि के लिए या अगले आदेश तक, सर सैयद अकादमी का निदेशक नियुक्त किया गया है। सर सैयद पर उनके द्वारा किये गये महत्वपूर्ण शोध कार्यों, जिसमें 2020 में रूटलेज द्वारा प्रकाशित उनकी बेस्टसेलर पुस्तक, ‘सर सैयद अहमद खानः रीजन, रिलिजन एंड नेशन‘ भी शामिल है, ने उन्हें एक प्रतिष्ठित सर सैयद विद्वान का दर्जा प्रदान किया है। उनकी पुस्तक भारत के सामूहिक जीवन में सर सैयद के योगदान पर स्पष्ट रूप से प्रकाश डालती है, जो केवल विश्वविद्यालय के संस्थापक से कहीं अधिक थे।


एक प्रसिद्ध संचार विशेषज्ञ, द्विभाषी आलोचक, अनुवादक और स्तंभकार, प्रोफेसर किदवई को उर्दू में सर सैयद पर उनके महत्वपूर्ण कार्य ‘सवाना-ए-सर सैयद‘ के लिए देश का सर्वोच्च साहित्यिक पुरस्कार, साहित्य अकादमी पुरस्कार मिला है। वर्ष 2019 में साहित्य के लिए मध्य प्रदेश सरकार का प्रतिष्ठित पुरस्कार, 2017 में इकबाल सम्मान और 2018 में साहित्यिक उपलब्धि के लिए उत्तर प्रदेश उर्दू अकादमी का सर्वोच्च पुरस्कार अमीर खुसरो पुरस्कार प्रदान किया गया। उनकी एक अन्य पुस्तक, ‘उर्दू साहित्य और पत्रकारिताः क्रिटिकल पर्सपेक्टिव‘ (कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी प्रेस, भारत, 2014) में उर्दू पत्रकारिता और साहित्य विदेशी शासन का विरोध और देशवासियों से पराधीनता के खिलाफ अथक संघर्ष करने के आग्रह को दर्शाती है।


उन्होंने अंग्रेजी और उर्दू में 12 पुस्तकें प्रकाशित लिखीं हैं, जिनमें ‘सवाना-ए-सर सैयद‘, ‘अलीगढ़ इंस्टीट्यूट गजटः एक तज्जियाती मुताला‘, ‘फिक्शन मुतालेअत‘, ‘मिराजी‘, ‘खबर निगारी‘, माइकल मधुसूदन दत्त‘ व ‘आर.के. नारायण‘, आदि शामिल हैं। उन्होंने उर्दू में जनसंचार के अक्सर उपयोग किए जाने वाले शब्दों का संकलन और अनुवाद भी किया और ईटीवी उर्दू, हैदराबाद के लिए एक स्टाइल बुक भी तैयार की।


उनकी पुस्तक समीक्षाएं और कॉलम नियमित रूप से द हिंदुस्तान टाइम्स, द इंडियन एक्सप्रेस, द हिंदू, द आउटलुक, द फ्रंटलाइन, द बुक रिव्यू और द सियासत में प्रकाशित होते रहते हैं। द हिंदू के फ्राइडे रिव्यू के लिए उनके पाक्षिक कॉलम ‘गोइंग नेटिव‘ को भारत और विदेशों में विद्वानों से व्यापक सराहना मिली है।


उन्होंने दो बार साहित्य अकादमी की सामान्य परिषद के सदस्य के रूप में सेवा की और तीन बार उर्दू सलाहकार बोर्ड, साहित्य अकादमी के सदस्य रहे। वह सरस्वती सम्मान और ज्ञानपीठ पुरस्कार के लिए भाषा समिति (उर्दू) के संयोजक भी थे। वह नेशनल काउंसिल फॉर प्रमोशन ऑफ उर्दू के जनरल काउंसिल सदस्य भी थे। वह प्रतिष्ठित पत्रिका, रोजान-ए-रेख्ता और अन्य के संपादकीय बोर्ड के सदस्य हैं, और उर्दू और अंग्रेजी की साहित्यिक पत्रिकाओं में नियमित रूप से योगदान देते हैं। वह 1985 से संचार सिद्धांत, सांस्कृतिक अध्ययन, प्रसारण पत्रकारिता, फिल्म अध्ययन पढ़ा रहे हैं। उन्हें 2005 में प्रोफेसर नियुक्त हुए किया गया और चार बार जन संचार विभाग के अध्यक्ष भी रह चुके हैं।

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