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पते की बात पढ़िए, अशोक चौधरी की कलम से: पानी का हाहाकार - तीनों इंजन लाचार

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अलीगढ़ में पेयजल को लेकर हाहाकार है। स्थिति बिल्कुल वही है, आहुति संगठन ने निरंतर वर्षों तक जिसकी आशंका व्यक्त की थी क्योंकि विगत 45 वर्षों से अलीगढ़ महाननगर में कोई शासकीय विभाग भूमिगत जल संवर्धन और संरक्षण हेतु काम ही नहीं कर रहा है और भूमिगत पेयजल आपूर्ति को ही पेयजल समस्या का समाधान माना जाता है, इसी कारण यह समस्या निरंतर दुसाध्य होती जा रही हैं। 


     आज से पचास वर्ष पूर्ण नगरपालिका दिन में दो बार जल आपूर्ति करती थी, उसी से काम चलता था, फिर टिल्लू आ गए, उसके बाद जेट पंप आएं। आबादी बढ़ती रही और पानी की मांग भी। इसके साथ ही पानी लेने के अनेक वैकल्पिक उपायों का अनुसरण होता रहा। 


     एक और विलक्षण काम हुआ अलीगढ़ महानगर में भूगर्भ जल स्तर सुधारने का एक मात्र माध्यम अलीगढ़ महानगर के चारों ओर फैले पोखर और तालाब थे, साथ ही हजारों घने विशाल वृक्ष भी। 1947 में अलीगढ़ में 46 विशाल पोखर/तालाब थे, इनमें से 25 कांग्रेसियों ने हजम कर लिए, शेष पोखर/तालाबों पर भाजपा नेताओं की कृपा दृष्टि हो गई और बची हुई उनके पेट में जा रही है। इस कारण जनता ना केवल पीने के पानी को साथ ही जल भराव की समस्या से भी जूझ रही है। आगे और भी विकट स्थिति होगी और यह सब काम नगर निगम के भ्रष्ट अधिकारियों और आपके द्वारा निर्वाचित महापौर और सभासदों के सहयोग से हो रहा है। 


     अब आप नगरनिगम के अधिकारियों की पेय जल समस्या को लेकर गंभीरता को समझिए कि नगरायुक्त अलीगढ़ 11 जून को पेय जल समस्या को लेकर बैठक कर रहे हैं, जब नगरविधायक @mukta sanjeev Raja इस विषय को उठाया है।


     केवल अलीगढ़ नगरनिगम अधिकारी ही नहीं ज्यादातर अधिकारियों की मानसिकता जन समस्याओं का समाधान करने की नहीं, समय काटने की रहती है।


     पानी की दृष्टि से अलीगढ़ महानगर में दो प्रकार का समाज है - एक वह वर्ग जो पूरी तरह नगर निगम की सप्लाई पर निर्भर है और दूसरा वर्ग जो समरसेविल द्वारा पेयजल शोधन करता हैं। समरसेविल द्वारा भूमिगत जल का अत्याधिक दोहन होता है। 


     नगर निगम का भ्रष्टाचार पेयजल समस्या को अत्यधिक दुष्कर बना रहा है, एक आंकड़े से समझिए कि अलीगढ़ में नगरनिगम के 128 नलकूप है और नगरायुक्त अलीगढ़ ने अप्रैल और मई में 140 नलकूपों की मरम्मत करवाई अर्थात जितने नलकूप हैं उनसे ज्यादा की तो मरम्मत करा दी। इतना ही नहीं नगरनिगम को महानगरों के हैंडपंप ठीक कराने की याद अप्रैल - मई में आई, जब गर्मी अपने शबाब पर थी। 


    एक और महत्वपूर्ण बात आपको बताता हूं, अलीगढ़ में जिन ओवरहेड टैंकों से पेयजल सप्लाई होती है, उनकी सफाई कब हुई यह माननीय नगरायुक्त को भी याद न होगा।


     आपको यह मालूम होना चाहिए कि पूरे महानगर की जनता गंदे पानी सप्लाई की शिकायत कर रही है किंतु नगर निगम अलीगढ़ को 15,438 स्थानों से लिए पानी के नमूनों कहीं भी गंदा पानी नहीं मिला। क्या इसे 2024 का सबसे बड़ा मजाक नहीं माना जाना चाहिए,

     यह भी समाचार है कि नगर निगम महानगर के पोखर/ तालाबों के गहरीकरण और सफाई का काम कर रहा है किंतु उसकी जानकारी भाजपा के माननीयों को भी नहीं है।

     एक और महत्वपूर्ण जानकारी आपको दे रहा हूं कि अलीगढ़ नगर निगम में महानगर में पुरानी पेयजल आपूर्ति लाइनों का कोई नक्शा नहीं है और यही पुरानी जर्जर लाइनें गंदे पानी की आपूर्ति कर रही हैं। 


      अलीगढ़ महानगर में उत्पन्न जल संकट के समाधान हेतु आहुति की मांग है कि पूरे महानगर में प्रत्येक प्राइवेट ट्यूबैल और समरसेबिल का ऑन लाइन पंजीयन होना चाहिए तथा नगर निगम द्वारा उपलब्ध तकनीकी के आधार पर उनके यहां जगह रैन वाटर हार्वेस्टिंग लगनी चाहिए । सभी समरसेविलों पर जल उपयोग मीटर लगने चाहिए।

     महानगर में गाड़ी धुलाई केंद्र तत्काल बंद होने चाहिए। आरओ वाटर से निकले वाले अपशिष्ट जल उपयोग होना चाहिए, वह नालियों में बह रहा है। 

      कम पेयजल के उपयोग करने को लेकर जागरूकता अभियान चलाना चाहिए, इस हेतु प्रत्येक स्तर पर जल संरक्षण समितियां बननी चाहिये जिनमें  क्षेत्रीय सभासद, पूर्व सभासद व अन्य गणमान्यजनों , सामाजिक संस्थाओं के पदाधिकारियों को शामिल कर पेयजल के अपव्यय को रोकना चाहिए।


      अलीगढ़ महानगर में सघन वृक्षारोपण होना चाहिए। महानगर में जल कलश वाले वृक्षों यथा पीपल पिलखुन वट गूलर सहजन आंवला नीम आदि का सघन रोपण करना चाहिए और इस हेतु अभियान चला कर अभी से स्थान चिन्हित करना चाहिए।

     महानगर में वर्षा ऋतु में सड़कों पर भरने वाले जल को नियंत्रित  करने हेतु स्ट्रॉम वाटर हार्वेस्टिंग प्रणाली से जल शुद्ध कर पुनः उपयोग योग्य बनाकर जल संकट और जल भराव संकट दोनो को दूर करने के उपाय खोजे जा सकते है।

      अलीगढ़ की जनता को आंखों देखी मूर्ख बनाने का प्रयास ना करें अलीगढ़ नगर निगम क्योंकि यह अलीगढ़ के औद्योगिक स्वरूप को बिगाड़ सकता है। हमारा निवेदन है @myogiaditynatha सरकार से पानी के मामले में लापरवाही या मजाक बहुत हानिकारक हो सकता हैं। यह खेल अब बंद होना चाहिए।

~अशोक चौधरी

   अध्यक्ष - आहुति, अलीगढ़

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