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Aligarh Media Desk


 जनविरोधी नीतियों के खिलाफ किसानों-मज़दूरों का विशाल ट्रैक्टर जन मार्च

 स्मार्ट मीटर, बिजली विधेयक-2025, बीज विधेयक व चारों लेबर कोड का कड़ा विरोध

 

अलीगढ़ मीडिया डिजिटल, अलीगढ़, 26 जनवरी। संयुक्त किसान मोर्चा के आह्वान पर 77 वें गणतंत्र दिवस के अवसर पर किसानों, मज़दूरों और बिजली उपभोक्ताओं ने जनविरोधी नीतियों के खिलाफ विशाल ट्रैक्टर जन मार्च निकाला। यह ट्रैक्टर मार्च लाल डिग्गी बिजली घर से प्रारंभ होकर कलेक्ट्रेट तक शांतिपूर्ण ढंग से निकाला गया, जिसमें सैकड़ों ट्रैक्टरों एवं अन्य वाहनों ने भाग लिया।

    क्रांतिकारी किसान यूनियन, भाकियू एवं किसान सभा के इस संयुक्त मार्च में सैकड़ों ट्रेक्टरों के साथ मोटर साइकिल, साइकिल एवं अन्य वाहनों के साथ किसान एवं खेतिहर मजदूर शामिल रहे।

  करीब 12 बजे से लाल डिग्गी बिजली घर पर चल रहे महापड़ाव पर ट्रेक्टर गांवों से एकजुट होने लगे। ट्रेक्टर गांवों से तीन दलों में मार्च में शामिल हुए। इब्राहीमाबाद, दारापुर, सुख रावली, महुआखेड़ा, एटा चुंगी, रेलवे स्टेशन, घंटाघर होते हुए पहला पहुंचा, दूसरा दल अटलपुर, जिरौली डोर, सारसौल चौराहा, बरोला बाइपास पुल होते हुए एवं तीसरा दल जमालपुर से शामिल हुआ।

  मार्च करीब 2 बजे शुरू होकर एएमयू सर्किल, टेलीफोन एक्सचेंज चौराहा, घंटाघर चौराहा, दीवानी कोर्ट से कलेक्ट्रेट पहुंचा। मार्च के समय किसानों ने जोरदार नारेबाजी की। 'स्मार्ट मीटर नहीं चलेंगें', 'बिजली विधेयक 2025 रद्द करो!' ' किसान विरोधी बीज विधेयक वापस करो!', चारों लेबर कोड वापस करो!' 'किसान-मजदूर एकता जिंदाबाद!'

ट्रैक्टर मार्च में शामिल किसानों और मज़दूरों ने जनविरोधी स्मार्ट मीटर, बिजली विधेयक-2025, बीज विधेयक तथा चारों लेबर कोड को तुरंत वापस लेने की मांग की। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि केंद्र सरकार की ये नीतियाँ देश के किसानों, मज़दूरों और आम बिजली उपभोक्ताओं के हितों के खिलाफ हैं और इनका उद्देश्य कॉरपोरेट कंपनियों को लाभ पहुंचाना है।

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मार्च में वक्ताओं ने कहा कि स्मार्ट मीटर के नाम पर जनता से जबरन वसूली की जा रही है और बिजली व्यवस्था को निजी कंपनियों के हवाले करने की साज़िश की जा रही है। स्मार्ट मीटर लगने से आम उपभोक्ताओं का बिजली बिल कई गुना बढ़ेगा, जिससे गरीब और मध्यम वर्ग पर भारी आर्थिक बोझ पड़ेगा।

वक्ताओं ने बिजली विधेयक-2025 को जनविरोधी बताते हुए कहा कि यह विधेयक बिजली के निजीकरण को बढ़ावा देगा और सस्ती बिजली की अवधारणा को समाप्त कर देगा। वहीं बीज विधेयक के ज़रिए किसानों को बहुराष्ट्रीय कंपनियों पर निर्भर बनाने की कोशिश की जा रही है, जिससे किसानों की स्वायत्तता और पारंपरिक बीज प्रणाली समाप्त हो जाएगी।

चारों लेबर कोड पर बोलते हुए वक्ताओं ने कहा कि ये मज़दूरों के वर्षों से अर्जित अधिकारों को खत्म करने वाले हैं। इन कोडों से स्थायी रोज़गार, न्यूनतम मज़दूरी, सामाजिक सुरक्षा और ट्रेड यूनियन अधिकारों पर गंभीर खतरा पैदा हो गया है।

ट्रेक्टर जन मार्च के समापन पर संयुक्त किसान मोर्चा और बिजली उपभोक्ताओं के साझा मंच के नेताओं ने स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि सरकार ने इन जनविरोधी नीतियों को वापस नहीं लिया, तो आंदोलन को और व्यापक तथा तेज़ किया जाएगा। साथ ही कड़ी चेतावनी दी कि यदि केन्द्र सरकार संसद में बजट सत्र के दौरान बिजली विधेयक लाएगी, तो आंदोलन सड़कों पर होगा, जब तक सरकार पीछे नहीं हटेगी, तब तक लाल डिग्गी बिजली घर पर चल रहा महापड़ाव जारी रहेगा।

  जन मार्च के दौरान क्रांतिकारी किसान यूनियन के राष्ट्रीय महासचिव शशिकांत, प्रदेश उपाध्यक्ष नगेन्द्र चौधरी, शकुन्तला गांधी, बैंक इंप्लायज यूनियन के नेता प्रदीप चौहान, किसान सभा के जिलाध्यक्ष सूरजपाल उपाध्याय, इदरीश मोहम्मद भाकियू हरपाल के प्रदेश अध्यक्ष हरेन्द्र चौधरी, मानव सेवा दल अध्यक्ष के.बी. मौर्य के अलावा अशोक नगोला, सर्वेश सिंह, सत्यवीर चौधरी, कृष्णकांत सिंह, पुष्पेन्द्र सिंह, रूपेश कुमार, राजेश कुमार, पप्पू सिंह, नेतराम, नसीम राजा, गोकुल करन, रामवीर सिंह, हेम सिंह सुरजीत चौधरी, शिव कुमार सिंह, अवतार सिंह, प्रमोद कुमार वर्मा, उदयवीर सिंह, पूरनमल लोधी, निहाल सिंह आदि प्रमुख किसान नेता शामिल रहे।