#बड़ी_ख़बर: अलीगढ़ में कोर्ट रूम से केस पत्रावली गायब, ADJ नें पक्षकारों को जारी किये नोटिस!

Aligarh Media Desk

अलीगढ़ मीडिया डिजिटल, अलीगढ़: अपराध पर नकेल लगाने के लिए अपराधियों को दंड देने का काम जिस न्याय पालिका का हैं उसके सिस्टम में भी अब गड़बड़ नजर आने लगी हैं| यह बड़े बड़े अपराध में सजा दिए जाने से पहले है पत्रावली गायब कर दीं जाती हैं, "न रहेगा बांस और न बजेगी बांसुरी"| यानि अपराध से संबधित पत्रावली है कोर्ट से गायब कर दीं जाये तो न्यायाधीश को केस में सुनवाई करने का मौका है नहीं दिया जायेगा इस तरह सजा मिलेंगे है नहीं, अपराधी ज़मानत के बाद मजे से आजाद घुमते रहेंगे| अलीगढ़ के सभी न्यायालयों में एक-दो पत्रावली गायब जरूर होंगी, ताज़ा मामले में ऐसी आशंका उत्पन्न कर दीं हैं| लेकिन बड़ा सवाल यह हैं कि खुद जज साहब के सामने से पूरी पत्रावली गायब कैसे हो गई, और किसने गायब करने है हिमाकत क़ी हैं| इसका जबाब तो न्यायिक जाँच में है सामने आ सकता हैं| 

अलीगढ़ मीडिया डिजिटल को मिले अपर जिला एवं न्यायाधीश कोर्ट संख्या-14 अलीगढ़ के न्यायालय से 30जनवरी 2026 को जारी एक नोटिस से यह साफ हो रहा हैं कि न्याय के मंदिरों में भी न्याय देने वाले भगवान रुपी न्यायाधीश क़ी आँखो में धूल झोंकने का काम फल-फूल रहा हैं| हालांकि इस काम में मोटी घूसखोरी और कोर्टरूम के जिम्मेदार कर्मियों क़ी मिलीभगत शामिल न हो ऐसा संभव नहीं हैं| 

     हालांकि कोर्ट परिसर कि इस जानकारी को प्रकाशित करने का मकसद न्यायालय क़ी गरिमा को ठेस पहुंचना और उसकी छवि को धूमिल करना बिलकुल नहीं हैं लेक़िन सच्चाई सामने लाना इसलिए जरूरी हैं कि जो लोग न्याय पाने के लिए सालों-साल न्यायालय क़ी लहलीज पर चप्पले घिसकर अपराधी के खिलाफ साबित और गवाह जुटाकर पेश करते हैं| वहीं सबूत पत्रावली न्यायालय से एक झटके में उस समय गायब हो जाये जबकि अपराधी को लगभग दोषी साबित करके सज़ा दिए जाने का बक्त हो, तो इंसाफ का इंतजार कर रहे व्यक्ति पर क्या बीतेगी? कल्पना करना सहज़ नहीं हैं|ADJ-14 अलीगढ़ क़ी कोर्ट में राज्य बनाम जगवीर सिंह अपराध धारा 498ए , 304बी,, 120बी, 316, 323 भारतीय दंड संहिता व धारा 3/4 दहेज़ प्रतिषेध अधिनियम, थाना पिसावा अलीगढ़ विचाराधीन हैं|    

विचरण में दंड प्रक्रिया संहिता सहिता क़ी धारा-313 के तहत आरोपी के बयान दर्ज किया जाना लंबित हैं लेकिन कोर्ट परिसर से पत्रावली में लगे साक्षीगण क़ी नथथी मय आरोप पत्र के ही गायब हो गई| जिसके चलते अब आरोपी के बयान दर्ज नहीं हो पा रहे हैं| बिना आरोपी के बयानों के मामले को अगले नतीजे पर तय करना विधि संगत नहीं हैं| इसलिए पत्रावली गायब होने से आरोपी बड़ा लाभ मिल रहा हैं| हालांकि अब देखना यह होगा कि नोटिस जारी होने के बाद पत्रावली मिलती हैं या हैं फिलहाल पत्रावली गायब कराने वालों को चिन्हित करके कार्रवाई करना जरूरी हैं|  मामले में न्याय क़ी उम्मीद लगाये बैठे पक्षकार का कहना हैं कि यह गंभीर बात हैं कि न्यायालय से सबूत और आरोप पत्र गायब हो गए| मामले पर अधिवक्ता प्रतीक चौधरी का कहना हैं कि यदि ऐसा मामला हैं तो यह गंभीर प्रकरण हैं इस मामले में मुकदमा दर्ज कर जिम्मेदार के खिलाफ जाँच और कार्रवाई होनी चाहिए|