एएमयू में 15 दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला ‘एक्सरसाइज प्रिस्क्रिप्शन’ का शुभारंभ

Aligarh Media Desk


अलीगढ मीडिया डिजिटल, अलीगढ़| अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (एएमयू) में “जिम प्रशिक्षण के लिए एक्सरसाइज प्रिस्क्रिप्शन” विषय पर 15 दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला का उद्घाटन जेएनएमसी ऑडिटोरियम में किया गया। इसका उद्देश्य शारीरिक फिटनेस और जिम प्रशिक्षण में वैज्ञानिक एवं साक्ष्य-आधारित तरीकों को बढ़ावा देना है।

उद्घाटन सत्र की अध्यक्षता एएमयू के सहकुलपति प्रो. एम. मोहसिन खान ने की। उन्होंने विश्वविद्यालय और आसपास के क्षेत्र में खेल संस्कृति, फिटनेस जागरूकता और स्वस्थ जीवनशैली को बढ़ावा देने में शारीरिक शिक्षा विभाग की महत्वपूर्ण भूमिका पर प्रकाश डाला|


मुख्य अतिथि अलीगढ़ के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) नीरज जादौन ने विभिन्न आयु और वर्ग के लोगों के लिए व्यायाम कार्यक्रम तैयार करने में वैज्ञानिक समर्थन और शोध-आधारित पद्धतियों के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि पेशेवर ढंग से तैयार फिटनेस कार्यक्रम प्रदर्शन सुधार के साथ-साथ चोटों की रोकथाम और दीर्घकालिक स्वास्थ्य के लिए भी आवश्यक हैं।

विशिष्ट अतिथि और यूनिवर्सिटी गेम्स कमेटी के सचिव प्रो. यूसुफ उज जमां खान ने कहा कि आज की भागदौड़ और निष्क्रिय जीवनशैली के दौर में, खासकर युवाओं के लिए शारीरिक फिटनेस का महत्व लगातार बढ़ रहा है। स्वागत भाषण शारीरिक शिक्षा विभाग के अध्यक्ष एवं सामाजिक विज्ञान संकाय के डीन प्रो. इकराम हुसैन ने दिया। उन्होंने विभाग की शैक्षणिक उत्कृष्टता और शारीरिक स्वास्थ्य को साथ-साथ बढ़ाने की प्रतिबद्धता पर जोर दिया।


कार्यक्रम की रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए कार्यशाला निदेशक प्रो. बृज भूषण सिंह ने बताया कि 6 से 20 फरवरी तक चलने वाली इस राष्ट्रीय कार्यशाला का उद्देश्य प्रतिभागियों को वैज्ञानिक समझ के साथ व्यावहारिक कौशल प्रदान करना है, ताकि वे व्यक्तिगत जरूरतों के अनुसार व्यायाम कार्यक्रम तैयार कर सकें। सत्रों में फिटनेस आकलन, व्यक्तिगत प्रशिक्षण पद्धतियां, चोट से बचाव रणनीतियां, उद्देश्यपूर्ण आहार योजना और विभिन्न समूहों के लिए विशेष व्यायाम मॉड्यूल शामिल होंगे।

कार्यक्रम का संचालन कार्यशाला के आयोजन सचिव डॉ. अरशद बारी ने किया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन डॉ. मेराज फरीदी ने प्रस्तुत किया।


एएमयू के प्रोफेसर ने राष्ट्रीय चिकित्सा सम्मेलन में शोध प्रस्तुत किया


अलीगढ मीडिया डिजिटल, अलीगढ़ अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के जेएन मेडिकल कॉलेज के मेडिसिन विभाग के नेफ्रोलॉजी अनुभाग के प्रभारी प्रो. मोहम्मद असलम ने एसोसिएशन ऑफ फिजिशियंस ऑफ इंडिया के 81वें वार्षिक सम्मेलन में वैज्ञानिक व्याख्यान दिया और एक सत्र की अध्यक्षता भी की। यह सम्मेलन पटना के सम्राट अशोक कन्वेंशन सेंटर में आयोजित हुआ।

अपने व्याख्यान में प्रो. असलम ने गर्भावस्था से जुड़ी तीव्र गुर्दा चोट (पीआर-एकेआई) की बढ़ती समस्या पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि यह स्थिति भारतीय उपमहाद्वीप और अन्य अविकसित क्षेत्रों में अधिक पाई जाती है तथा मातृ और शिशु स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा है। गंभीर मामलों में लगभग 30 प्रतिशत मरीजों को डायलिसिस की आवश्यकता पड़ती है, जबकि 1.5 से 2.5 प्रतिशत मरीजों को गुर्दों की स्थायी क्षति के कारण आजीवन डायलिसिस की जरूरत हो सकती है।


रोकथाम पर जोर देते हुए उन्होंने गर्भावस्था के दौरान जनस्वास्थ्य जागरूकता और नियमित प्रसव पूर्व जांच (एंटीनटल केयर) के महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि यह समस्या अधिकतर प्रसव के आसपास की अवधि में होती है। प्रो. असलम ने वर्ष 2023-24 के दौरान जेएनएमसी, एएमयू में पीआर-एकेआई के 100 मरीजों पर किए गए अध्ययन के मूल क्लीनिकल आंकड़े भी प्रस्तुत किए।


शैक्षणिक प्रस्तुति के अलावा प्रो. असलम को रूमेटोलॉजी के नवीनतम अपडेट और हालिया प्रगतियों पर आयोजित सत्र की अध्यक्षता के लिए भी आमंत्रित किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में प्रतिनिधियों ने भाग लिया।

मेडिसिन विभाग के अध्यक्ष प्रो. ख्वाजा सैफुल्लाह जफर ने उन्हें बधाई देते हुए कहा कि प्रो. असलम ने राष्ट्रीय मंच पर अपना शोध प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया और गर्भावस्था से जुड़ी तीव्र गुर्दा चोट की क्लीनिकल चुनौतियों, प्रबंधन रणनीतियों और रोकथाम के पहलुओं की ओर विशेषज्ञों का ध्यान आकर्षित किया, जिससे इस विषय की पेशेवर समझ को विस्तार मिला है।

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