संविधान में मूल अधिकार राज्य के कानून हैं, न कि नैसर्गिक अधिकार: डॉ. राजाराम

Aligarh Media Desk


अलीगढ मीडिया डिजिटल, अलीगढ़। संविधान निर्माण के अनछुए पहलुओं पर डॉ0 राजाराम ने प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि संविधान निर्माण की प्रक्रिया 1931 की जनगणना से शुरू हुई, जिसमें मताधिकार का अधिकार संपत्ति, शिक्षा, और सरकार को कर देने वाले लोगों को दिया गया था। डॉ0 राजाराम ने कहा कि संविधान में मूल अधिकार राज्य के कानून हैं, न कि नैसर्गिक अधिकार। उन्होंने यह भी कहा कि संविधान में बहुसंख्यक जनता के सामाजिक और आर्थिक विकास के लिए कोई संवैधानिक गारंटी नहीं है। उन्होने बताया कि बहुसंख्यक देश की जनता के सामाजिक और आर्थिक विकास के लिये संविधान में कोई भी संवैधानिक गारंटी नहीं है। उल्टा ये कहकर गुमराह किया गया कि ये दुनिया का सबसे श्रेष्ठ संविधान है। जिसे बाबा साहब डॉ0 अम्बेडकर ने बनाया है वही इसके निर्माता हैं।

   शुक्रवार को कलेक्ट्रेट प्रागण स्थित कैंटिन में आयोजित पत्रकार वार्ता में सेवानिवृत सीएमओ डॉ0 राजाराम ने कहा कि संविधान में मूल अधिकार राज्य के कानून हैं, न कि नैसर्गिक अधिकार। उन्होंने यह भी कहा कि संविधान में बहुसंख्यक जनता के सामाजिक और आर्थिक विकास के लिए कोई संवैधानिक गारंटी नहीं है। पत्रकार वार्ता को आगरा से आये संस्थापक संयोजक वंचित वर्ग संगठन के डॉ सुरेंद्र सिंह ताज प्रदेश निर्माण समिति संयोजक, प्रो. मुफ्ती जाहिद सेवानिवृत्ति डिपार्टमेंट ऑफ़ धर्मशास्त्र अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय और रमेश चंद्र विद्रोही ने भी संबांधित किया।