देखिये, अलीगढ नुमाईश क़ी महिमा,"लोक प्राधिकरण" की श्रेणी में नहीं आती प्रदर्शनी, एक "स्व-वित्त पोषित स्वयंसेवी संस्था

Aligarh Media Desk


प्रदर्शनी एक "स्व-वित्त पोषित स्वयंसेवी संस्था हैं तो सरकारी मशीनरी और तामझाम का दुरूपयोग किसके निर्देशों पर होता हैं?

राजकीय औद्योगिक एवं कृषि प्रदर्शनी प्रशासन द्वारा सूचना साझा करने से इनकार; जवाबदेही पर उठे गंभीर सवाल


अलीगढ मीडिया डिजिटल, अलीगढ| राजकीय औद्योगिक एवं कृषि प्रदर्शनी (अलीगढ़ नुमाइश) के वित्तीय और प्रशासनिक कार्यों में पारदर्शिता को लेकर एक बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। आरटीआई के माध्यम से मांगी गई महत्वपूर्ण जानकारियों को प्रशासन ने यह कहकर देने से मना कर दिया है कि यह प्रदर्शनी एक "स्व-वित्त पोषित स्वयंसेवी संस्था" है। प्रशासन (उप-जिलाधिकारी कोल/सामान्य मंत्री) ने अपने आधिकारिक जवाब (पत्रांक 757/प्र•सहा•/2025-26 और 758/प्र•सहा•/2025-26, दिनांक 06/03/2026) में स्पष्ट किया है कि नुमाइश "लोक प्राधिकरण" की श्रेणी में नहीं आती, इसलिए इस पर सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 के प्रावधान लागू नहीं होते हैं। यह तर्क इसलिए हैरान करने वाला है क्योंकि इस संस्था का पूरा प्रबंधन जिलाधिकारी, अपर जिलाधिकारी जैसे वरिष्ठ पदों पर बैठे सरकारी/प्रशानिक अधिकारियों के हाथों में रहता है।


आरटीआई आवेदनों में मीडिया सेंटर के चयन की प्रक्रिया, पिछले 5 वर्षों के अनुबंधों के विवरण, सांस्कृतिक मंचों पर कलाकारों और इवेंट कंपनियों को किए गए भुगतान, तथा प्रदर्शनी से प्राप्त कुल वार्षिक राजस्व का लेखा-जोखा मांगा था। इन सूचनाओं के बदले प्राप्त हुए नकारात्मक जवाब ने प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवालिया निशान लगा दिए हैं। एक तरफ इस आयोजन के लिए 'राजकीय' शब्द का प्रयोग किया जाता है और यह सरकारी भूमि पर जिला प्रशासन की देखरेख में संपन्न होता है, वहीं दूसरी ओर सूचना देने के वक्त इसे निजी एनजीओ बताकर पल्ला झाड़ लिया जाता है।

​प्रशासन के इस विरोधाभासी रुख को चुनौती देते हुए आरटीआई कार्यकर्ता ने कहा कि यदि यह संस्था निजी है, तो इसके पदों पर सरकारी/प्रशानिक अधिकारियों की नियुक्ति और सरकारी मशीनरी का व्यापक उपयोग किस आधार पर किया जा रहा है? उन्होंने इस मामले को दबाने का प्रयास बताते हुए घोषणा की है कि वह इस निर्णय के विरुद्ध 'प्रथम अपील' दायर करेंगे। यदि जिला स्तर पर संतोषजनक समाधान नहीं मिलता है, तो इस मुद्दे को राज्य सूचना आयोग (लखनऊ) के समक्ष ले जाया जाएगा ताकि यह स्पष्ट हो सके कि जनता के संसाधनों का उपयोग करने वाली ऐसी बड़ी प्रदर्शनी जनता के प्रति जवाबदेह क्यों नहीं है।