अलीगढ़ मीडिया डिजिटल, अलीगढ़ : जिला कृषि रक्षा अधिकारी धीरेन्द्र सिंह चौधरी ने किसान भाईयों को अवगत कराया है कि बसंत कालीन मक्के अच्छी पैदावार हो इसके लिए समय पर खरपतवारों को नियंत्रित करना बहुत महत्वपूर्ण है, फ़सल को खरपतवार मुक्त रखंे और समय से निराई-गुड़ाई कराएं। उन्होंने बताया कि अभी वर्तमान समय में मौसम में बदलाव को देखते हुए सिंचाई न करेें क्योंकि अगर आपकी फसल 35 से 40 दिन की अवस्था में है या घुटने से कमर की ऊंचाई की है और सिंचाई के बाद बारिश हो जाती है तो ऐसी स्थिति में फसल गिरने की सम्भावना हो सकती।
पीपीओ ने बताया कि फॉल आर्मीवर्म कीट के नियंत्रण के लिए स्पिनेटोरम 11.7 प्रतिशत एससी-100 मिलीलीटर प्रति एकड़ (डेलीगेट, लार्गाे, सुमिट) के साथ ही अन्य तकनीकी जैसे- इमामेक्टिन बेंजोएट 5 प्रतिशत एसजी 100 ग्राम प्रति एकड़ का उपयोग करें। पौधों की बाली निकलने से तुरंत पहले गभोट अवस्था मे सिंचाई कर के अगले 1 से 2 दिन पश्चात अंतिम यूरिया 35 से 50 किलो एवं 30 किलो पोटाश मिलाकर प्रति एकड़ प्रयोग करें। बसंत कालीन मक्का फसल में परागण की प्रक्रिया सुचारू रूप से पूर्ण हो सके इसके लिए मौसम का तापमान 36 से 38 डिग्री सेल्सियस के बीच में होना चाहिए। अगर तापमान 42 से 44 डिग्री सेल्सियस से ऊपर जा रहा है, जो की परागण की क्रिया को बाधित कर सकता है। ऐसी अवस्था में खेत में नमी बनाए रखने के लिए सिंचाई उपयुक्त समय में आपके खेत की जरूरत के अनुसार 4 से 5 दिन के अंतराल पर करते रहें जिससे खेत में उपयुक्त नमी बनी रहेगी जो मक्का फसल का आंतरिक ताप नियंत्रित करने में मदद करेगी और परागण की क्रिया बाधित नहीं होगी तो आपको मक्का की फसल में नुकसान नहीं होगा।
पीपीओ श्री चौधरी ने अधिक तापमान से वसंत कालीन मक्का को सुरक्षित रखने के सरल उपायों की जानकारी देते हुए बताया कि यदि मक्का फसल की अवस्था मई महीने में पुष्पण अवस्था से लेकर दानों के कठोरावस्था तक हो तो हर पाचवे या छटवें दिन खेत की सिंचाई करते रहें। पूरे मई व जून के प्रथम पखवारा तक खेत मे नमी बरकरार रखें। पौधों में 50 प्रतिशत बाली दिखते ही 2 से 3 दिन के अन्दर ही सिंचाई अवश्य करें व दानो के भरने तक खेत मे नमी बनाए रखें।

