विश्व हेपेटाइटिस दिवस पर जेएनएमसी में वैज्ञानिक संगोष्ठी, जांच शिविर और जनजागरूकता कार्यक्रम आयोजित

Aligarh Media Desk

 


अलीगढ़ मीडिया डिजिटल, अलीगढ़| अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के जवाहरलाल नेहरू मेडिकल कालिज में विश्व हेपेटाइटिस दिवस के अवसर पर वैज्ञानिक संगोष्ठी, निःशुल्क हेपेटाइटिस-बी प्रतिरक्षा जांच शिविर तथा जनजागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए गए। विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा निर्धारित इस वर्ष की थीम ‘हेपेटाइटिसः आइए इसे मिलकर समाप्त करें’ के अंतर्गत आयोजित कार्यक्रमों का उद्देश्य हेपेटाइटिस की रोकथाम, समय पर पहचान, स्वास्थ्यकर्मियों की सुरक्षा, रोगियों में जागरूकता और बेहतर उपचार व्यवस्था को बढ़ावा देना था।


मेडिसिन विभाग में कार्यक्रम का आयोजन चिकित्सा संकाय के अधिष्ठाता प्रो. मोहम्मद खालिद के संरक्षण तथा जेएनएमसी के प्राचार्य एवं मुख्य चिकित्सा अधीक्षक प्रो. अंजुम परवेज के मार्गदर्शन में किया गया।


कार्यक्रम की शुरुआत करते हुए आयोजन अध्यक्ष एवं मेडिसिन विभाग के अध्यक्ष प्रो. ख्वाजा सैफुल्लाह जफर ने कहा कि हेपेटाइटिस से संबंधित जानकारी को सरल भाषा में आम लोगों तक पहुंचाना आवश्यक है, ताकि देश को इस बीमारी से मुक्त बनाने के लक्ष्य को प्राप्त किया जा सके।


वैज्ञानिक सत्र में सामुदायिक चिकित्सा विभाग के डॉ. मोहम्मद यासिर जुबैर ने भारत में वायरल हेपेटाइटिस की वर्तमान स्थिति और वर्ष 2030 तक इसके उन्मूलन के लक्ष्य पर प्रकाश डाला। सूक्ष्मजीव विज्ञान विभाग की प्रो. फातिमा खान ने स्वास्थ्यकर्मियों में रक्तजनित संक्रमणों के जोखिम, संक्रमण के बाद बचाव के उपाय तथा हेपेटाइटिस-बी से सुरक्षा के महत्व पर विस्तार से जानकारी दी।


मेडिसिन विभाग के डॉ. एम. उवैस अशरफ ने बताया कि वायरल हेपेटाइटिस अक्सर बिना किसी स्पष्ट लक्षण के धीरे-धीरे लीवर सिरोसिस और लीवर कैंसर का कारण बन सकता है। उन्होंने समय पर जांच और उपचार की आवश्यकता पर बल दिया। वहीं प्रसूति एवं स्त्री रोग विभाग की डॉ. बुशरा फातिमा ने गर्भावस्था में हेपेटाइटिस की जांच, मां से शिशु में संक्रमण की रोकथाम तथा उपचार संबंधी पहलुओं पर जानकारी दी। बाल रोग विभाग के डॉ. जफर आलम ने बच्चों में वायरल हेपेटाइटिस की पहचान, टीकाकरण और उपचार पर अपने विचार रखे।


जेएनएमसी में हेपेटाइटिस उन्मूलन की बाधाओं को कैसे दूर किया जाए विषय पर आयोजित परिचर्चा में विभिन्न विभागों के शिक्षकों ने भाग लिया। इसमें हेपेटाइटिस की जांच का दायरा बढ़ाने, टीकाकरण को प्रोत्साहित करने, स्वास्थ्यकर्मियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने तथा रोगियों को निरंतर उपचार उपलब्ध कराने का संकल्प लिया गया।


एक अन्य महत्वपूर्ण कार्यक्रम के तहत डॉ. एम. उवैस अशरफ ने जेएनएमसी के रक्तकोष के सहयोग से उन स्वैच्छिक रक्तदाताओं की पहचान की, जिनमें नियमित जांच के दौरान हेपेटाइटिस-बी या हेपेटाइटिस-सी संक्रमण पाया गया था। इन लोगों से व्यक्तिगत रूप से संपर्क कर उन्हें परामर्श दिया गया तथा आगे के उपचार के लिए गैस्ट्रोएंटरोलॉजी एवं हेपेटोलॉजी क्लिनिक में पंजीकृत किया गया।


गैस्ट्रोएंटरोलॉजी एवं हेपेटोलॉजी बाह्य रोगी विभाग में रोगियों और उनके परिजनों के लिए हिंदी में विशेष जागरूकता सत्र भी आयोजित किया गया। चिकित्सकों ने सरल भाषा में हेपेटाइटिस-बी और सी के कारण, संक्रमण के तरीके, पूरा उपचार लेने और नियमित जांच की आवश्यकता के बारे में जानकारी दी। साथ ही राष्ट्रीय वायरल हेपेटाइटिस नियंत्रण कार्यक्रम के अंतर्गत उपलब्ध निःशुल्क जांच और उपचार सुविधाओं से भी अवगत कराया।

कार्यक्रम का समापन डॉ. मोहम्मद साकिब आलम के धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ। इस अवसर पर अस्पताल संक्रमण नियंत्रण समिति ने सूक्ष्मजीव विज्ञान विभाग के सहयोग से स्वास्थ्यकर्मियों के लिए निःशुल्क हेपेटाइटिस-बी प्रतिरक्षा जांच शिविर भी आयोजित किया। इसमें लगभग 200 चिकित्सकों, नर्सों, रेजिडेंट चिकित्सकों, इंटर्न, प्रयोगशाला कर्मियों और अन्य स्वास्थ्य कर्मचारियों ने भाग लिया। प्रतिभागियों के रक्त नमूनों की जांच की गई तथा जिनमें प्रतिरक्षा स्तर कम पाया गया, उन्हें बूस्टर टीका और आवश्यक चिकित्सकीय परामर्श लेने की सलाह दी गई।


प्रो. फातिमा खान ने कहा कि स्वास्थ्यकर्मियों की सुरक्षा सुनिश्चित करना उनके स्वयं के स्वास्थ्य के साथ-साथ रोगियों की सुरक्षा और अस्पतालों में संक्रमण की रोकथाम के लिए भी अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने कहा कि नियमित प्रतिरक्षा जांच, समय पर टीकाकरण तथा संक्रमण नियंत्रण संबंधी नियमों का पालन प्रभावी संक्रमण रोकथाम कार्यक्रम के प्रमुख आधार हैं।


जांच शिविर का आयोजन प्रो. फातिमा खान की देखरेख में किया गया। इस दौरान चिकित्सा संकाय के अधिष्ठाता प्रो. मोहम्मद खालिद, प्राचार्य एवं मुख्य चिकित्सा अधीक्षक प्रो. अंजुम परवेज, चिकित्सा अधीक्षक प्रो. नैय्यर आसिफ तथा सूक्ष्मजीव विज्ञान विभाग के अध्यक्ष प्रो. आदिल रजा का सहयोग रहा।