गोदी मीडिया के दौर में जन-पत्रकारिता के नायक क्यों बन गए हैं अजीत अंजुम?

Aligarh Media Desk
(फाईल फोटो श्रोत: FB)

पेपर लीक और परीक्षा धांधली के खिलाफ जंतर-मंतर पर छात्रों के प्रोटेस्ट को जब मुख्यधारा ने अनदेखा किया, तब अजीत अंजुम ने अपने माइक को युवाओं की आवाज बना दिया

✍️प्रवीण कुमार, अलीगढ| आज जब पत्रकारिता के मायने स्टूडियो की चकाचौंध और टीआरपी की होड़ में सिमटते जा रहे हैं, तब कुछ पत्रकार कैमरा हाथ में लेकर सड़क की हकीकत दिखाने का साहस कर रहे हैं। वरिष्ठ पत्रकार अजीत अंजुम ऐसे ही नामों में सबसे आगे हैं, जिन्होंने अपनी ज़मीनी रिपोर्टिंग से 'गोदी मीडिया' और 'एसी स्टूडियो जर्नलिज्म' के चलन को पूरी तरह नकार दिया है। देश के गांवों, कस्बों की गलियों और शहरों की सड़कों की खाक छानती उनकी रिपोर्टिंग ने उन्हें मुख्यधारा के स्टूडियो पत्रकारों से कहीं बड़ा जन-पत्रकार बना दिया है।


छात्रों के प्रोटेस्ट में दिखा पत्रकारिता का सबसे भावुक चेहरा

अजीत अंजुम की पत्रकारिता का सबसे खूबसूरत और मानवीय चेहरा तब सामने आया, जब वे परीक्षाओं में धांधली, पेपर लीक और भर्ती घोटालों के खिलाफ सड़कों पर उतरे छात्रों की आवाज बने।

जब देश का भविष्य कहे जाने वाले युवा अपने हक के लिए जंतर-मंतर पर लाठियां खा रहे थे और पुलिस के पहरे के बीच इंसाफ मांग रहे थे, तब अधिकांश बड़े मीडिया घरानों ने चुप्पी साध रखी थी। ऐसे नाजुक दौर में अजीत अंजुम ने अपने माइक को उन लाचार और मासूम छात्रों की बुलंद आवाज में बदल दिया।

उन्होंने न सिर्फ छात्रों के दर्द को बिना किसी लाग-लपेट के देश के सामने रखा, बल्कि सत्ता के गलियारों से सीधे और तीखे सवाल भी पूछे। यही वजह है कि प्रोटेस्ट ग्राउंड पर जब भी छात्र अजीत अंजुम को देखते हैं, उनके चेहरों पर एक भरोसा और अपनेपन की चमक आ जाती है।


पुरस्कार नहीं, जनता का प्यार है असली पूंजी

एक सच्चे पत्रकार की सबसे बड़ी कमाई क्या होती है? कोई बड़ा अवॉर्ड या करोड़ों की टीआरपी नहीं। अजीत अंजुम की सबसे बड़ी पूंजी वह निश्छल प्यार और दुआएं हैं, जो उन्हें आंदोलनकारी छात्रों और उनके चिंतित माता-पिता से मिल रही हैं।

सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो इस बात के गवाह हैं कि कैसे छात्र उन्हें घेरकर अपना दुखड़ा सुनाते हैं, जैसे कोई बच्चा अपने घर के बड़े-बुजुर्ग के सामने अपना हक मांग रहा हो।


चाटुकारिता के इस दौर में जहां सच बोलना सबसे बड़ा जोखिम बन गया है, अजीत अंजुम की बेबाकी ने साबित किया है कि बड़ी से बड़ी ट्रोल सेना भी एक निडर पत्रकार के हौसले को नहीं डिगा सकती। बच्चों के प्रोटेस्ट में मिला अपार जनसमर्थन यही बताता है कि जनता आज भी निष्पक्ष और निडर पत्रकारिता की प्यासी हैं|

      (...लेखक, अलीगढ़ मीडिया ग्रुप के विधिक सलाहकार हैं)