अलीगढ़ मीडिया डिजिटल ,अलीगढ | पैगंबर-ए-इस्लाम हजरत मुहम्मद साहब के जन्मदिवस के अवसर पर अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के कैनेडी हॉल में जश्न-ए-मीलादुन्नबी का भव्य आयोजन किया गया। कार्यक्रम में वक्ताओं ने हजरत मुहम्मद साहब के पवित्र जीवन के विभिन्न पहलुओं पर प्रकाश डालते हुए उनके आदर्शों को अपनाने और समाज को शांति, न्याय तथा आपसी सद्भाव का केंद्र बनाने की अपील की। इस अवसर पर देश की सर्वांगीण प्रगति, शांति, सुरक्षा और एकता के लिए दुआ भी की गई।
मौलाना आजाद पुस्तकालय में मौहम्मद साहब के पवित्र जीवन और उनकी शिक्षाओं से संबंधित पुस्तकों, पांडुलिपियों, दुर्लभ वस्तुओं, कुरआन शरीफ की दुर्लभ और अलंकृत प्रतियों तथा इस्लामी सुलेख के नमूनों पर आधारित दो दिवसीय सीरत प्रदर्शनी भी लगाई गई।
कार्यक्रम में दारुल उलूम देवबंद के हदीस शिक्षक मुफ्ती सलमान बिजनौरी और जामिया हैदरिया, खैराबाद, मऊ, उत्तर प्रदेश के प्रधानाचार्य मौलाना नाजिम अली खैराबादी ने मुख्य वक्ता के रूप में संबोधित किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता एएमयू के सहकुलपति प्रोफेसर मोहम्मद मोहसिन खान ने की।
मुफ्ती सलमान बिजनौरी ने कहा कि मौहम्मद साहब से प्रेम की वास्तविक मांग यह है कि उनके कथन और आचरण को अपने जीवन में उतारा जाए। उन्होंने कहा कि मुसलमानों को मौहम्मद साहब के जीवन की घटनाओं की जानकारी होनी चाहिए, लेकिन दुख की बात है कि आज उनके जीवन से अनजान लोगों की संख्या काफी है। विशेष रूप से युवाओं को मौहम्मद साहब के कथनों और कार्यों से मार्गदर्शन लेना चाहिए। घर और घर के बाहर सामाजिक व्यवहार तथा जीवन के सभी बाहरी और आंतरिक कार्यों में हमें पैगंबर-ए-इस्लाम के जीवन से सीख लेनी चाहिए।
उन्होंने मोहम्मद साहब के जीवन की विभिन्न घटनाओं का उल्लेख करते हुए बताया कि वे अपनी पत्नी, बच्चों, रिश्तेदारों, पड़ोसियों, मेहमानों, मेजबानों, निकट साथियों, सेवकों, दिव्यांगों, बुजुर्गों, मुसीबत में पड़े लोगों, गरीबों, जरूरतमंदों, धनवानों, प्रतिष्ठित लोगों, विद्वानों, विवाद लेकर आने वालों, नए मुसलमानों, ग्रामीण लोगों और यहां तक कि जानवरों के साथ भी किस प्रकार प्रेम, दया और सद्भाव का व्यवहार करते थे।
मुफ्ती सलमान बिजनौरी ने कहा कि यदि मोहम्मद साहब के जीवन को समझना है तो कुरआन शरीफ पढ़ना चाहिए, जिसमें इन बातों को स्पष्ट रूप से बताया गया है। मौहम्मद साहब के कथन और आचरण कुरआन शरीफ की व्याख्या हैं।
मौलाना नाजिम अली खैराबादी ने कहा कि मोहम्मद साहब के पवित्र जीवन का उल्लेख केवल सुनने और फिर भूल जाने के लिए नहीं किया जाता, बल्कि इसलिए किया जाता है कि मुसलमान उनके जीवन के आदर्शों को अपने अंदर इस तरह पैदा करे कि दूसरे लोग उसके आचरण को देखकर उसे मौहम्मद साहब का सच्चा अनुयायी समझें। उन्होंने सीरत के अर्थ को स्पष्ट करते हुए कहा कि इसमें कथन और आचरण दोनों शामिल हैं। उन्होंने मौहम्मद साहब के जीवन की विभिन्न घटनाओं का उल्लेख करते हुए लोगों से उनके उत्तम चरित्र को अपने जीवन में अपनाने की अपील की। उन्होंने कहा कि मौहम्मद साहब की सीरत का वर्णन कुरआन में किया गया है।
अध्यक्षीय संबोधन में सहकुलपति प्रोफेसर मोहम्मद मोहसिन खान ने कहा कि मोहम्मद साहब को पूरी दुनिया के लिए रहमत बनाकर भेजा गया। उनके जीवन के विभिन्न पहलू हैं और हर पहलू में हमारे लिए मार्गदर्शन मौजूद है। उन्होंने कहा कि आज वैज्ञानिक प्रगति के बावजूद दुनिया में युद्ध, अशांति और बेचैनी का माहौल है। अत्याचार, दिलों में दूरियां और असमानता जैसी समस्याएं मौजूद हैं। इन सभी समस्याओं का समाधान मौहम्मद साहब की सीरत में मौजूद है।
उन्होंने कहा कि मौहम्मद साहब ने सभी के साथ अच्छा व्यवहार किया, चाहे वह मुसलमान हो या गैर-मुसलमान। शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व, रहमत और दया उनके जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा थे। मदीना में विभिन्न समूहों के बीच एक संगठित समाज का निर्माण, मक्का विजय के समय आम माफी की घोषणा और महिलाओं के साथ अच्छे व्यवहार की विशेष हिदायत में इन्हीं सिद्धांतों की झलक दिखाई देती है। इन सिद्धांतों को हमें अपने जीवन में जरूर अपनाना चाहिए।
प्रोफेसर मोहसिन खान ने मोबाइल फोन का इस्तेमाल करने वाले युवाओं से विशेष रूप से अपील की कि वे मौहम्मद साहब की सीरत पढ़ने के लिए प्रतिदिन कम से कम आधा घंटा निर्धारित करें। इससे उन्हें कई अनजाने तथ्यों की जानकारी मिलेगी और इसका लाभ उनके व्यावहारिक जीवन में भी होगा।
कार्यक्रम में स्कूली बच्चों ने नात-ए-पाक प्रस्तुत की। कार्यक्रम के संयोजक और एएमयू के कुलसचिव प्रोफेसर मोहम्मद आसिम जफर ने धन्यवाद ज्ञापित किया। कार्यक्रम के अंत में देश में शांति, सुरक्षा, प्रगति और एकता के लिए दुआ की गई। धर्मशास्त्र संकाय के डीन प्रोफेसर हबीबुल्लाह कासमी ने कार्यक्रम का संचालन किया।
कैनेडी हॉल में कार्यक्रम से पहले मौलाना आजाद पुस्तकालय में सीरत प्रदर्शनी का उद्घाटन सहकुलपति प्रोफेसर मोहम्मद मोहसिन खान ने रजिस्ट्रार प्रो. आसिम जफर, प्रोक्टर प्रो. एम नवेद खान व पुस्तकालयाध्यक्ष प्रोफेसर निशात फातिमा और विश्वविद्यालय के अन्य वरिष्ठ अधिकारियों की मौजूदगी में किया। सीरत प्रदर्शनी 26 अगस्त को शाम 5 बजे तक और 27 अगस्त को सुबह 9 बजे से शाम 4.30 बजे तक आम लोगों के लिए खुली रहेगी।
कैनेडी हॉल के प्रवेश कक्ष में के. ए. निजामी कुरआनी अध्ययन केंद्र की ओर से कैलीग्राफी प्रदर्शनी भी आयोजित की गई। प्रदर्शनी का उद्घाटन विश्वविद्यालय के सहकुलपति प्रोफेसर मोहम्मद मोहसिन खान ने किया।

