- वकीलों के संगठनों का संयुक्त श्रमिक किसान मोर्चा को पूर्ण विधिक समर्थन
- दैनिक जागरण-अमर उजाला के 50,000 बोरी चावल सड़ने के खुलासे पर विधिक संगठनों ने जिला प्रशासन को घेरा
- आपराधिक न्यास भंग (Criminal Breach of Trust) और आवश्यक वस्तु अधिनियम के उल्लंघन के तहत FCI अधिकारियों और ठेकेदार पर दर्ज हो FIR
- आम जनता, टैक्सपेयर्स और उपभोक्ताओं के संवैधानिक अधिकारों की रक्षा के लिए आर-पार की कानूनी लड़ाई का ऐलान
अलीगढ मीडिया डिजीटल , अलीगढ़। जनपद के हरदुआगंज रेलवे स्टेशन माल गोदाम पर भारतीय खाद्य निगम (FCI) और परिवहन ठेकेदार जय शर्मा की घोर विधिक लापरवाही के कारण खुले आसमान के नीचे पड़े थे।50,000 बोरी (हजारों क्विंटल) सरकारी चावल के बारिश में सड़ने की घटना पर संयुक्त श्रमिक किसान मोर्चा का कानूनी पक्ष बेहद मजबूत हो गया है। मोर्चे के निरंतर डिजिटल अभियान और राष्ट्रीय समाचार पत्रों ( दैनिक जागरण व अमर उजाला ) द्वारा आंकड़ों सहित किए गए खुलासे के बाद अब अलीगढ़ के प्रतिष्ठित वकीलों के संगठनों ( बार एसोसिएशन ) ने भी इस लड़ाई को जनहित में आवश्यक मानते हुए मोर्चे को अपना पूर्ण विधिक समर्थन देने का ऐलान किया है।
मोर्चे के संस्थापक व राष्ट्रीय अध्यक्ष जितेन्द्र शर्मा ने विधिक विमर्श के बाद जारी एक तीखे बयान में कहा कि यह मामला सिर्फ प्रशासनिक लापरवाही का नहीं, बल्कि सीधे तौर पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) के तहत राजकोष को करोड़ों रुपये की हानि पहुँचाने, आपराधिक न्यासभंग और आवश्यक वस्तु अधिनियम का घोर उल्लंघन है।
उपभोक्ताओं की थाली में ज़हर परोसने की तैयारी और विधिक संगठनों की चिंता:
मोर्चा अधिवक्ता प्रकोष्ठ के महानगर उपाध्यक्ष एडवोकेट जितेंद्र कश्यप सहित अन्य विधिक विशेषज्ञों ने चिंता जताई है कि ठेकेदार द्वारा कुप्रबंधन स्वीकार किए जाने के बाद अब इस फंगसयुक्त (जहरीले) चावल को कोटे की दुकानों (PDS) के माध्यम से गरीब उपभोक्ताओं और श्रमिकों की थाली तक पहुँचाने की साजिश रची जा रही है। दूषित अनाज का यह वितरण भारतीय संविधान के अनुच्छेद 21 ( जीवन का अधिकार) का सरेआम उल्लंघन है। इस गंभीर राष्ट्रीय क्षति और जन-स्वास्थ्य के खिलवाड़ पर स्थानीय कलेक्ट्रेट प्रशासन और पुलिस की चुप्पी विधिक रूप से संदेहास्पद है।
वकीलों के संगठनों एवं मोर्चे की संयुक्त विधिक मांगें :
तत्काल आपराधिक मुकदमा (FIR): राजकोषीय धन की जानबूझकर की गई बर्बादी के आरोप में जिम्मेदार FCI अधिकारियों, स्टेशन प्रबंधन और रसद ठेकेदार जय शर्मा पर BNS की सुसंगत धाराओं (आपराधिक न्यासभंग व धोखाधड़ी) के तहत तत्काल आपराधिक मुकदमा (FIR) दर्ज किया जाए।
ठेकेदार की संपत्ति से रिकवरी: देश के ईमानदार टैक्सपेयर्स के पैसे से खरीदे गए इस अनाज के नुकसान की पूरी वसूली (Recovery) संबंधित ठेकेदार की संपत्ति जब्त करके की जाए और उसकी फर्म को तत्काल 'ब्लैकलिस्ट' किया जाए।
FSSAI विधिक जांच: इस पूरे 50,000 बोरी भीगे स्टॉक की खाद्य सुरक्षा विभाग (FSSAI) द्वारा विधिक सैंपलिंग कराई जाए और इसे इंसानी उपभोग के लिए पूरी तरह प्रतिबंधित घोषित किया जाए।
कलेक्ट्रेट के पूर्ण विधिक घेराव की चेतावनी:
मोर्चा अधिवक्ता प्रकोष्ठ के महानगर उपाध्यक्ष एडवोकेट जितेंन्द्र कश्यप ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यदि इस नोटिस की प्राप्ति के 24 घंटे के भीतर धरातल पर कड़े विधिक कदम नहीं उठाए गए, तो संयुक्त श्रमिक किसान मोर्चा पूरे जनपद की जनता, टैक्सपेयर्स, उपभोक्ताओं और बार एसोसिएशन के अधिवक्ता साथियों को साथ लेकर अलीगढ़ कलेक्ट्रेट मुख्यालय का अनिश्चितकालीन पूर्ण विधिक घेराव करेगा। इसके बाद उत्पन्न होने वाले किसी भी प्रशासनिक, विधिक और वैधानिक गतिरोध की संपूर्ण जिम्मेदारी जिला प्रशासन और भारतीय खाद्य निगम की होगी। साथ में मौजूद मोर्चा अधिवक्ता प्रकोष्ठ के एडवोकेट अमित कुमार, एडवोकेट अजय कुमार, एडवोकेट प्रदुम्न कुमार एडवोकेट नितीश कुमार आदि।

